
नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल क़िले से देश को संबोधित किया। यह लगातार 13वीं बार था जब उन्होंने इस मौक़े पर तिरंगे के नीचे से देशवासियों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं का उल्लेख किया।
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भाषण के समापन पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले जैसी विभूतियों के सपनों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की बात कही। अपने 12 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग़रीब-मध्यम वर्ग के परिवारों का विशेष ज़िक्र किया और 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराया।
नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार
पीएम मोदी ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार लाल क़िले की प्राचीर से इस गीत की गूंज सुनाई दी है। उन्होंने भारत की मैन्युफ़ैक्चरिंग, टेक्सटाइल, रक्षा, रेलवे, कनेक्टिविटी, फ़ार्मा और स्टार्टअप क्षेत्रों की उपलब्धियों को गिनाया, साथ ही कोरोना काल और हाल के युद्धों से उपजे ऊर्जा संकट का भी उल्लेख किया।

उन्होंने विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सभी राजनीतिक दलों से अपील की और विकसित भारत के लक्ष्य के लिए “शक्ति की सप्तधारा” का विज़न प्रस्तुत किया।
नक्सलवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और अनेक परिवारों के सपने तोड़े। चार दशकों तक देश के बड़े हिस्से को हिंसा के दम पर दबाए रखने वाले इस आंदोलन में साढ़े तीन हज़ार से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए। उन्होंने बताया कि 2014 में देश को नक्सलवाद-मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था और आज नक्सली व माओवादी हिंसा अपने अंतिम चरण में है जहां कभी गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास और विश्वास का तिरंगा लहरा रहा है।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि इस चुनौती को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि माओवादी सोच सालों तक सत्ता के गलियारों और सरकारी सलाहकार समितियों तक में प्रभाव जमाए रही। हथियारबंद नक्सलियों पर तो काबू पा लिया गया है, लेकिन “दिमागी नक्सल” अब भी समाज को भटकाने के मौक़े तलाश रहे हैं, जिन्हें पहचानकर अलग-थलग करना ज़रूरी है।
उपलब्धियां गिनाईं
पीएम ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशवासियों के सामूहिक प्रयास से भारत ने नई ऊंचाइयां छुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 25 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर निकले हैं और भारत एक बड़ी, तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने याद दिलाया कि, 2014 तक दुनिया भारत को कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं में गिनती थी, लेकिन बीते एक दशक में देश ने नई रफ़्तार पकड़ी है।

रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी उद्योग पांच गुना, मोबाइल फ़ोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है, जबकि डिजिटल लेनदेन में सौ गुना और पेटेंट स्वीकृतियों में चार गुना वृद्धि दर्ज हुई है। शौचालय और आवास निर्माण से लेकर मेट्रो विस्तार तक, जिस स्केल पर काम हुआ है वह आज़ादी के बाद अभूतपूर्व है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 2047 तक विकसित भारत का संकल्प अधूरा नहीं रह सकता और भारत को दूसरे देशों पर निर्भरता छोड़कर आत्मनिर्भर बनना होगा। भले ही बाहर से चीज़ें सस्ती और जल्दी मिल जाएं, उनसे देश का सामर्थ्य नहीं बढ़ता, इसीलिए मेक इन इंडिया, लोकल फ़ॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ना ज़रूरी है।
तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने बताया कि, भारत तीन सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित कर उत्पादन शुरू कर चुका है और आने वाले सात-आठ वर्षों में पांच से आठ और प्लांट शुरू होंगे। क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी दुनिया भारत की ओर देख रही है। चिप, एआई और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा अनिवार्य बताते हुए उन्होंने परमाणु ऊर्जा से जुड़े क़ानूनों में सुधार का ज़िक्र किया और परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए क़दमों को गिनाया।
कच्चे तेल पर निर्भरता को उन्होंने पुरानी सोच की सीमा बताया। पहले देश के 99 प्रतिशत समुद्री क्षेत्र को “नो गो एरिया” घोषित कर रखा गया था, जिसे अब “गो अहेड एरिया” में बदल दिया गया है और नए भंडार खोजने का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए 85,000 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना की घोषणा की गई है।
2014 से पहले सिर्फ़ 70 शहरों में पाइप से गैस पहुंचती थी, जो अब बढ़कर 700 शहरों तक पहुंच गई है, और घरेलू पाइप्ड गैस कनेक्शन 20-22 लाख से बढ़कर लगभग पौने दो करोड़ हो गए हैं। सोलर ऊर्जा क्षमता 2014 के 2 गीगावाट से बढ़कर आज 160 गीगावाट हो चुकी है। रेलवे के विद्युतीकरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 1925 में शुरू हुए इस काम में 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत प्रगति हुई थी, जबकि पिछले एक दशक में 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जिससे डीज़ल की बचत और पर्यावरण को लाभ हुआ है। उन्होंने देश की पहली और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ का भी उल्लेख किया।
पश्चिम एशिया संकट
पीएम ने कहा कि बीते 12 वर्षों में कोरोना महामारी और उसके बाद रूस-यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के युद्धों जैसे कई संकटों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आलोचना की कि कुछ लोगों ने इन संकटों के दौरान देश में डर और चिंता फैलाने की कोशिश की — चाहे वैक्सीन को लेकर हो या पेट्रोल, खाद और गैस की कमी की आशंका जताकर, लेकिन “नागरिक देवो भव” की भावना के साथ देश ने इन चुनौतियों का सामना किया और आज पेट्रोल, गैस और यूरिया की कोई कमी नहीं है।

उन्होंने बताया कि वैश्विक बाज़ार में यूरिया की क़ीमत लगभग 3,000 रुपये प्रति बोरी है, जबकि भारत सरकार इसे किसानों को मात्र 300 रुपये में उपलब्ध करा रही है, और डीएपी जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़रीब पांच हज़ार रुपये तक पहुंच चुका है, वह भी किसानों को रियायती दर पर मिल रहा है।
रिफॉर्म एक्सप्रेस
भाषण के अंतिम हिस्से में मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एक मज़बूत नींव पर टिका है और सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुकने के बाद अगला चौथाई हिस्सा बेहद अहम है। उन्होंने वर्क कल्चर और काम की रफ़्तार बदलने पर ज़ोर दिया ताकि जो काम पचास वर्षों में नहीं हो सका, वह अगले पांच वर्षों में पूरा किया जा सके। उन्होंने हर क्षेत्र में सुधार को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की संज्ञा दी और विकसित भारत के लिए “शक्ति की सप्तधारा” का आह्वान दोहराया, जिसमें भारत की युवा शक्ति को विकास से जोड़ने पर बल दिया गया।
मैन्युफ़ैक्चरिंग को आगे बढ़ाने, छोटे पुर्जों से लेकर बड़ी मशीनरी तक उत्पादन बढ़ाने, और लागत, गुणवत्ता व स्केल में वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की ज़रूरत बताते हुए उन्होंने “ज़ीरो डिफ़ेक्ट” को भारत की पहचान बनाने और गुणवत्ता से कोई समझौता न करने का आह्वान किया। फ़ूड प्रोसेसिंग और केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देने की बात भी उन्होंने कही। ढाई लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और उनके लिए रखे गए एक लाख करोड़ रुपये के फंड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह युवाओं के सपनों को पंख देगा।
अंत में उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ज़िक्र करते हुए सभी राजनीतिक दलों से लाल क़िले की प्राचीर के नीचे अपील की कि वे महिलाओं के सम्मान में आगे आएं और विधानसभाओं व संसद में उन्हें 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने में योगदान दें।
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