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मार्च से ही अस्पतालों को नियम पूरे करने के लिए दिया जा रहा था समय
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फायर NOC और कचरा प्रबंधन जैसी जरूरी शर्तें न मानने पर हुई कार्रवाई
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डिप्टी CM बोले- मरीजों की सुरक्षा सबसे पहले
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शर्तें पूरी करने वाले अस्पताल दोबारा जुड़ सकते हैं योजना से
लखनऊ। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। राज्य के 184 निजी अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है, यानी अब इन अस्पतालों में मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाएगी। यह फैसला नए तय मानकों के आधार पर हुई जांच-पड़ताल के बाद लिया गया है।
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नियमों को किया गया कड़ा
केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता के नियमों को पहले से ज्यादा कड़ा बना दिया है। इसी क्रम में राज्य के सभी संबद्ध अस्पतालों के कागजात और सुविधाओं की गहन जांच कराई गई। इस दौरान अस्पतालों से फायर विभाग की एनओसी, बायो-मेडिकल कचरे के सही निपटान जैसे अनिवार्य मानकों को पूरा करने और इससे जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया था।
फायर NOC तक नहीं है
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि, मार्च महीने से ही अस्पतालों को मानकों को पूरा करने का अवसर दिया जा रहा था। इसके लिए उन्हें सूचनाएं भी दी जा रही थीं। इसके बावजूद कई अस्पतालों ने तय समय में जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं। विशेष रूप से फायर एनओसी जैसे मानक, जो मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़े होते हैं।

डिप्टी सीएम ने कहा कि, मानकों में कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई और प्रदेश भर के 184 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि, डी-इम्पैनल की कार्रवाई का मकसद अस्पतालों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत वही अस्पताल जुड़े रहेंगे, जो सभी जरूरी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे।
दोबारा कर सकते हैं आवेदन
हालांकि, उप मुख्यमंत्री ने ये भी सुनिश्चित किया कि, डी-इम्पैनल किए गए अस्पतालों के लिए दोबारा योजना से जुड़ने का रास्ता भी खुला रहेगा। अगर वे भविष्य में सभी अनिवार्य शर्तें पूरी कर लेंगे और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा देंगे, तो वे दोबारा इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके आवेदन और व्यवस्थाओं का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि आयुष्मान योजना में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों में किसी तरह का समझौता करने वाले अस्पतालों को योजना में शामिल नहीं रखा जाएगा।
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