
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अभी 6 से 8 महीने का समय बाकी है, लेकिन यहां की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर एक के बाद एक तीखे शब्द बाण छोड़े। हालांकि, इस दौरान उन्होंने सपा मुखिया का नाम नहीं लिया।
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर कार्यक्रम में की शिरकत
सीएम योगी ने यह हमला उस समय किया, जब वे राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में पूर्ववर्ती सपा सरकार पर जमकर निशाना साधा और उसे प्रदेश की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन सभागार में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संत कबीर राज्य स्तरीय हैंडलूम पुरस्कार से हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को सम्मानित किया।
इस मौके पर अपने संबोधन में सीएम योगी ने हथकरघा को भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि, यह दिवस केवल एक साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि इसका भारत के स्वाधीनता आंदोलन से भी गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद कारीगरों और बुनकरों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि, यही परंपरागत कारीगर देश की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं।
‘बबुआ’ पर कसा तीखा तंज
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने अपने संबोधन में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बिना सीधे नाम लिए तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि, कुछ लोगों के जीवन में एक बार जो शब्द जुड़ जाता है, वे उससे कभी पीछा नहीं छुड़ा पाते। उनका इशारा साफ तौर पर अखिलेश यादव के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘बबुआ’ संबोधन की ओर था।
हमारा प्रयास होना चाहिए…
विदेश में बने उत्पाद नहीं, बल्कि हमारे कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा जो उत्पाद तैयार होते हैं, उन्हें ही गिफ्ट के रूप में प्रदान करें… pic.twitter.com/zoZC1KZYli
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 7, 2026
सीएम योगी ने आगे कहा कि, कुछ लोग पूरे जीवन बच्चे ही बने रहते हैं। वे जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘बबुआ’ भी कुछ ऐसा ही करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, पूर्व मुख्यमंत्री की दिनचर्या दोपहर 12 बजे सोकर उठने से शुरू होती थी, इसके बाद तैयार होने में 2 बजे तक का समय लगता था, शाम 5 बजे जिम जाना और फिर 7 बजे तक महफिलें सजनी शुरू हो जाती थीं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए सवाल किया कि, ऐसी दिनचर्या में भला प्रदेश और उसकी जनता के बारे में सोचने का समय ही कहां मिल पाता होगा।
इसी क्रम में सीएम योगी ने आरोप लगाया कि, यही वजह थी कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में लगभग हर दूसरे दिन दंगे होते थे और कई-कई महीनों तक कर्फ्यू लग जाते थे। उन्होंने यह भी कहा कि, उस दौर में इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियों से मासूम बच्चों की मौतें होना आम बात हो गई थी, जिस पर तत्कालीन सरकार का कोई ठोस ध्यान नहीं था।
2017 से पहले वीरान रहते थे बाजार
अपने संबोधन में सीएम ने पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के कार्यकाल की खामियां गिनाते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बिजली आपूर्ति, सड़क निर्माण और कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बदहाल थी। उन्होंने कहा कि, जब बाजारों में वीरानी छाई रहती है, तो इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक असर उन महिलाओं और स्थानीय कारीगरों पर पड़ता है, जो कुल कार्यबल का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा होती हैं।

सीएम योगी ने आगे कहा कि, पूर्व की सरकारों की दिलचस्पी सिर्फ विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट में भ्रष्टाचार और लूट-खसोट करने में रहती थी, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार में विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश के बेसिक स्कूलों में विद्यार्थियों को साफ पेयजल, बेहतर टॉयलेट सुविधा, निःशुल्क यूनिफॉर्म और स्कूल बैग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के ‘निपुण भारत अभियान’ का जिक्र किया और इसकी जमकर तारीफ़ भी की। सीएम ने कहा, इस महत्वाकांक्षी अभियान को अब जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूती मिल रही है।
भदोही के कालीन उद्योग का जिक्र
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए भदोही के प्रसिद्ध कालीन उद्योग का विशेष रूप से उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि, आज जब वे भदोही के कालीन क्लस्टर को देखते हैं, तो उन्हें संतोष होता है, क्योंकि यह उद्योग वर्ष 2017 से पहले लगभग मृतप्राय होने की कगार पर पहुंच चुका था, लेकिन वर्तमान सरकार के प्रयासों से आज यह उद्योग एक बार फिर जीवंत हो उठा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये का एक्सपोर्ट कर रहा है।

इसके साथ ही सीएम योगी ने स्वदेशी आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी के मंत्र ने पूरे देश को पूर्व से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक एकता के बेहद एक मजबूत सूत्र में बांध दिया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि, यह वह दौर था, जब महात्मा गांधी का स्वतंत्रता आंदोलन में विधिवत पदार्पण भी नहीं हुआ था, लेकिन इसके बावजूद स्वदेशी आंदोलन ने भारत की आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की थी।
सीएम योगी ने कहा कि, आज के दौर में हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग उसी ऐतिहासिक स्वदेशी भावना की मुख्य ताकत बने हुए हैं और सरकार इस परंपरागत उद्योग को संरक्षित करने के साथ-साथ इसे आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े तमाम कारीगर, बुनकर और उद्यमी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए इस संबोधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से पलटवार आने की भी संभावना जताई जा रही है।
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