बार-बार ब्लड टेस्ट कराना पड़ सकता है भारी, जानें कब और कितनी बार करानी चाहिए जांच

शहरों में अब एक नया चलन तेजी से बढ़ रहा है, जरा-सी थकान हो, वजन थोड़ा बढ़ जाए या फिटनेस को लेकर सतर्कता बरतनी हो, लोग सबसे पहले लैब की तरफ दौड़ते हैं। कभी विटामिन बी-12 की जांच कराई जाती है, तो कभी थायरॉयड की। कई बार तो दर्जनों टेस्ट वाले महंगे हेल्थ पैकेज भी बिना सोचे-समझे बुक करा लिए जाते हैं, लेकिन अब डॉक्टर इसे लाकर चेतावनी दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ये आदत भारी पड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि, जरूरत से ज्यादा जांच कराना सेहत सुधारने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।

इसे भी पढ़ें- कैंसर की पहचान अब सिर्फ ब्लड टेस्ट से, रिलायंस की स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को मिला पेटेंट

हर छोटी गड़बड़ी बीमारी का संकेत नहीं

चिकित्सकों का कहना है कि, समस्या तब शुरू होती है, जब किसी रिपोर्ट में एक भी वैल्यू सामान्य दायरे से जरा-सा इधर-उधर दिखे। मरीज घबरा जाते हैं और मान बैठते हैं कि, कोई गंभीर बीमारी दस्तक दे चुकी है, जबकि हकीकत में शरीर में मामूली उतार-चढ़ाव आम बात है। ये हर बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं हो होता, लेकिन इसी घबराहट के चलते लोग एक जांच के बाद दूसरी जांच, फिर डॉक्टरों के चक्कर और आखिर में ऐसा इलाज शुरू कर देते हैं, जिसकी असल में जरूरत ही नहीं होती।

Repeated blood tests can be costly.

विशेषज्ञों की सलाह है कि सिर्फ इसलिए बार-बार टेस्ट कराना कि, वह आसानी से उपलब्ध और सस्ता है, समझदारी नहीं मानी जा सकती। फरीदाबाद के सेक्टर-88 स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल कहते हैं कि, ब्लड टेस्ट हमेशा मरीज के लक्षणों, उसकी मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर ही कराई जानी चाहिए। बिना किसी ठोस वजह के बार-बार जांच कराते रहना उचित नहीं है, इससे बचना ही बेहतर रहता है।

कौन-सी जांचें सबसे ज्यादा कराई जाती हैं

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, जिन जांचों को लोग सबसे ज्यादा और अक्सर बिना जरूरत कराते हैं, वह हैं विटामिन डी, विटामिन बी-12, थायरॉयड फंक्शन टेस्ट, HbA1c यानी ब्लड शुगर का औसत स्तर, कोलेस्ट्रॉल और कम्प्लीट ब्लड काउंट आदि। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी नहीं है, इलाज में कोई फेरबदल नहीं हुआ है और कोई नया लक्षण भी सामने नहीं आया है, तो इन जांचों को बार-बार कराने से आमतौर पर कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिलता। जांच कब जरूरी है, इसका निर्णय डॉक्टर की सलाह और व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को देखकर ही लिया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सुविधा या चिंता के आधार पर।

अनावश्यक जांच के दुष्परिणाम

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार बार-बार ब्लड टेस्ट कराने का नुकसान सिर्फ सुई चुभने की तकलीफ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई और दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट में हल्का-सा उतार-चढ़ाव देखकर बहुत-से लोग मानसिक तनाव और चिंता का शिकार हो जाते हैं। कई बार रिपोर्ट में फॉल्स पॉजिटिव नतीजे भी आ जाते हैं, यानी बिना किसी वास्तविक समस्या के भी रिपोर्ट असामान्य दिखा सकती है, जिसके चलते और जांचें करानी पड़ती हैं, अतिरिक्त खर्च होता है और कभी-कभी ऐसा इलाज भी शुरू कर दिया जाता है जिसकी वास्तव में कोई आवश्यकता ही नहीं थी।

इसके अलावा बार-बार नस से खून निकलवाने की प्रक्रिया से सूजन, त्वचा पर नील पड़ना या नसों में जलन जैसी शारीरिक तकलीफें भी हो सकती हैं। कुछ मामलों में, विशेषकर महिलाओं में, लगातार खून निकाले जाने से एनीमिया यानी खून की कमी का खतरा भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर सलाह देते हैं कि ब्लड टेस्ट तभी कराया जाना चाहिए जब उसके पीछे कोई स्पष्ट और वाजिब चिकित्सीय कारण मौजूद हो।

कब कराना चाहिए ब्लड टेस्ट

तो फिर सवाल उठता है कि, एक पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति को आखिर कितने अंतराल पर ब्लड टेस्ट कराना चाहिए? डॉ. अग्रवाल के अनुसार अगर किसी वयस्क को कोई लक्षण नहीं है और वह पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा है, तो सामान्यतः हर एक से तीन साल में एक बार नियमित जांच कराना पर्याप्त होता है। हालांकि, इसकी सही अवधि हर व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करती है, यानी यह कोई एक जैसा फॉर्मूला नहीं है, जो सबके लिए लागू हो।

Repeated blood tests can be costly.

रूटीन जांच में आमतौर पर कम्प्लीट ब्लड काउंट, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और किडनी फंक्शन टेस्ट शामिल किए जाते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर लिवर और थायरॉयड फंक्शन टेस्ट भी जोड़े जा सकते हैं। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, वजन और कुल मिलाकर जीवनशैली का नियमित मूल्यांकन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है, जितनी खुद ब्लड जांच।

संतुलित जीवनशैली ही असली उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि, अच्छी सेहत बनाए रखने का मतलब ज्यादा-से-ज्यादा टेस्ट कराना नहीं, बल्कि सही समय पर सही जांच कराना है। अगर शरीर में कोई नया लक्षण नजर आए, पहले से कोई बीमारी मौजूद हो या डॉक्टर खुद किसी खास जांच की सलाह दें, तभी ब्लड टेस्ट कराना सबसे उचित माना जाता है। बेवजह बार-बार जांच कराने के बजाय संतुलित और अनुशासित जीवनशैली अपनाना, नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य जांच कराना और डॉक्टर की सलाह का ईमानदारी से पालन करना ही लंबे समय तक निरोग रहने का सबसे भरोसेमंद तरीका है। कुल मिलाकर, स्वास्थ्य के मामले में “जितना ज्यादा उतना अच्छा” वाली सोच से बचना ही समझदारी है।

 

इसे भी पढ़ें- अब सिर्फ एक ब्लड टेस्ट से खुलेगा कैंसर का राज, MethylScan से जांच हुई आसान

Related Articles

Back to top button