साइबर फ्रॉड के आरोपी को SC से नहीं मिली बेल, CJI बोले- ‘तुम परजीवी हो, जेल में ही रहो’

नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और आम लोग इन ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। इस गंभीर समस्या पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के एक आरोपी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए ऐसे अपराधियों के खिलाफ बेहद तीखी और सख्त टिप्पणियां कीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि, समाज की भलाई इसी में है कि ऐसे साइबर अपराधी जेल में ही रहें।

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जमानत याचिका हुई खारिज

सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने साइबर अपराध के एक आरोपी की जमानत याचिका पेश की गई थी। आरोपी की ओर से दलीलें दी गईं और जमानत देने की गुजारिश की गई, लेकिन बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए कोई नरमी दिखाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि, साइबर अपराधी पूरे देश में फैले हुए हैं और ये अपराधी देशभर के आम लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। इनकी वजह से लाखों लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और इनके खिलाफ किसी भी तरह की नरमी बरतना उचित नहीं है।

CJI ने की बेहद तीखी टिप्पणी

जमानत याचिका खारिज करते हुए CJI सूर्यकांत ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त और तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ये लोग समाज के परजीवी हैं, जो निर्दोष निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाते हैं। सीजेआई ने कहा कि, साइबर क्रिमिनल्स के साथ बेहद सख्ती से पेश आना जरूरी है क्योंकि इनके पीड़ित हमेशा देशभर के आम भारतीय नागरिक होते हैं।

Cyber ​​Crime

सीजेआई सूर्यकांत ने इन अपराधियों की कार्यशैली पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि, ये ठग किसी को तमिलनाडु में ठगते हैं और फिर जम्मू चले जाते हैं। यानी ये एक राज्य में अपराध करके दूसरे राज्य में जा छुपते हैं जिससे इनकी पकड़ और भी मुश्किल हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि, समाज की भलाई सिर्फ इसी में है कि, ऐसे अपराधी जेल के अंदर ही रहें और इन्हें किसी भी कीमत पर बाहर नहीं आने दिया जाना चाहिए।

अलग-अलग राज्यों से ठगते हैं लोगों को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बेहद अहम बात की ओर ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि, साइबर अपराधी एक साथ कई राज्यों में अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। वे किसी एक जगह बैठकर पूरे देश में अलग-अलग लोगों को ठगते रहते हैं। इस तरह के अपराध की प्रकृति इतनी जटिल होती है कि, इनका पता लगाना और इनकी जांच करना जांच एजेंसियों के लिए भी बेहद मुश्किल काम हो जाता है।

एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर जांच करे, यह प्रक्रिया लंबी और पेचीदा होती है और इसी का फायदा ये साइबर ठग उठाते हैं, इसीलिए अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि, साइबर अपराध के मामलों से निपटने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाना जरूरी है। ऐसे अपराधियों को आसानी से जमानत देना उचित नहीं होगा क्योंकि बाहर आते ही ये फिर से अपराध की राह पर चल पड़ते हैं और नए पीड़ितों को अपना शिकार बनाते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब सीजेआई सूर्यकांत ने किसी मामले में इतनी कठोर और बेबाक भाषा का इस्तेमाल किया हो। बीते एक महीने में यह दूसरा मौका है जब उन्होंने किसी मामले में फैसला सुनाने से पहले इतनी सख्त टिप्पणी की है। इससे साफ है कि, सुप्रीम कोर्ट समाज को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों और अपराधियों के प्रति अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त रवैया अपना रहा है।

कॉकरोच वाली टिप्पणी भी चर्चा में रही

इससे पहले मई महीने में भी सीजेआई सूर्यकांत एक मामले में अपनी बेबाक टिप्पणी की वजह से सुर्खियों में आए थे। उस समय एक वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने की अर्जी लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। तब सीजेआई ने देश में कुछ ऐसे लोगों का मुद्दा उठाया था जो बिना किसी जिम्मेदारी के एक्टिविज्म या मीडिया के नाम पर महत्वपूर्ण संस्थानों पर निशाना साधते रहते हैं।

Cyber ​​Crime

उस मौके पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि, समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं, जो सिस्टम पर हमला करते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ ऐसे युवा भी हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता या अपने पेशे में कोई जगह नहीं मिलती और वे कॉकरोच की तरह हर जगह घुस जाते हैं। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बन जाते हैं, कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सभी संस्थाओं पर हमला शुरू कर देते हैं। सीजेआई की यह टिप्पणी उस समय काफी चर्चा में रही थी।

साइबर अपराध से कैसे बचें?

सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि, साइबर अपराध आज देश के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से सावधान रहें। साइबर ठग हमेशा नए-नए तरीके अपनाते हैं इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

 

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