
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर के निर्माण कार्य और वहां आने वाले चढ़ावे तथा दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देश की राजनीति में भारी उथल-पुथल मच गई है। इस विवादास्पद मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरुद्ध खुलकर मोर्चा खोल दिया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा ‘मोना’ तथा यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने साझा रूप से केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर कड़े प्रहार किए।
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राम के नाम पर राजनीति करती है BJP
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि, भगवान राम के नाम पर न केवल दशकों से राजनीति की जाती रही है, बल्कि अब मंदिर निर्माण, भूमि अधिग्रहण और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान राशि में भी भारी गबन किया गया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों भक्तों के साथ घोर विश्वासघात करार दिया। अराधना मिश्रा ‘मोना’ ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य वित्तीय चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और सुसंगठित घोटाला है।

राम मंदिर की नींव रखने से लेकर वर्तमान निर्माण कार्य तक, हर स्तर पर गड़बड़ियां और विसंगतियां सामने आ रही हैं। जमीन अधिग्रहण से लेकर मंदिर के मुख्य ढांचे के निर्माण तक में धांधली हुई है और अब भगवान के चरणों में चढ़ाया गया दान भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इससे भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
रामशिलाएं गायब होने का आरोप
अराधना मिश्रा ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि, मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से मंगाई गई 1,250 पूजनीय राम शिलाएं मंदिर परिसर से रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। उन्होंने कहा कि, ये शिलाएं महज पत्थर के टुकड़े नहीं थीं, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं द्वारा भेजी गई आस्था की अमूल्य धरोहर थीं। इन पवित्र शिलाओं को गायब कर भाजपा और उनसे जुड़े लोगों ने करोड़ों रामभक्तों के साथ गहरा छल किया है। उन्होंने मांग की कि, इस पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश की सीधी निगरानी में, एक निश्चित समयसीमा के भीतर होनी चाहिए।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले में और अधिक आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने पूरे प्रकरण को एक संगठित लूट बताते हुए इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में जब राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था, तब भाजपा-आरएसएस और उनके सहयोगी संगठनों ने पूरे देश में शिलापूजन अभियान चलाया था। उस दौरान देश के हर वर्ग से करोड़ों रुपये एकत्र किए गए, लेकिन उस धन का आज तक कोई पारदर्शी हिसाब-किताब जनता के सामने नहीं रखा गया।
मामले को दबाने की कोशिश
अजय राय ने दावा किया कि, यह 1,400 करोड़ रुपये से भी अधिक की चोरी का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि, विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में, विशेषकर स्वर्गीय अशोक सिंघल के कार्यकाल में जुटाई गई वह भारी-भरकम धनराशि आखिर कहां गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, जो लोग खुद को धर्म का रक्षक कहते हैं, उन्होंने ही भगवान का चढ़ावा और भक्तों की श्रद्धा से अर्पित राशि को हड़प लिया।
अजय राय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, सरकार इस मामले की ईमानदार जांच कराने की बजाय इसे दबाने की कोशिश कर रही है। एसआईटी की जिम्मेदारी जिस प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी गई है, वह खुद पहले से ही विवादों में घिरे हैं और महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ से संबंधित जांच में उनका नाम शामिल है। ऐसे दागी अधिकारी से इस बड़े घोटाले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है और सच्चाई को छिपाने में लगी है।
कांगेस ने की ये दो मांग
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखीं। पहली, एसआईटी की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक की जाए। दूसरी, पूरे मामले की निगरानी उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश द्वारा की जाए ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
कांग्रेस नेताओं ने एकस्वर में कहा कि राम मंदिर के नाम पर हुआ यह कथित घोटाला देश की आस्था और सनातन समाज की भावनाओं पर सीधा प्रहार है। इसे अनिश्चितकाल तक लटकाए नहीं रखा जा सकता। अब देखना यह होगा कि इन गंभीर आरोपों पर भाजपा, आरएसएस और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की क्या प्रतिक्रिया आती है।
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