
नई दिल्ली। ओमान के एक बंदरगाह के निकट अमेरिकी हमले का शिकार हुए भारतीय स्वामित्व वाले टैंकर एमटी जलवीर के 20 भारतीय चालक दल सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रूप से अपने घर लौट आए हैं। इस घटना ने न केवल भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में बढ़ते तनाव और वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की एक नई श्रृंखला को भी उजागर किया है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि सभी 20 सदस्यों को घटना के तुरंत बाद सुरक्षित निकाला गया और अब वे भारत पहुंच चुके हैं।
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ओमान ने दी तुरंत मदद
ओमान में भारत के राजदूत प्रशांत पिसे ने मस्कट में इन चालक दल के सदस्यों से उनकी भारत वापसी से पहले विशेष मुलाकात की। राजदूत ने उनके साहस की सराहना की और सुरक्षित घर पहुंचने की शुभकामनाएं दीं। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारतीय मिशन मुसीबत में फंसे किसी भी भारतीय नागरिक की तुरंत मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दूतावास का कहना है कि, चालक दल की भलाई और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। दूतावास ने बचाए गए चालक दल की एक वीडियो क्लिप भी जारी की, जिसमें सदस्य खुश नजर आ रहे थे और अपने परिवारों से मिलने की उत्सुकता व्यक्त कर रहे थे।
वीडियो में वे भारतीय मिशन और ओमान के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में मिली त्वरित प्रतिक्रिया ने उनकी जान बचाई। भारतीय पक्ष ने पूरे राहत और बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियों, खासकर ओमानी नौसेना और स्थानीय प्रशासन का धन्यवाद किया है।
कैप्टन ने दी प्रतिक्रिया
एमटी जलवीर के कैप्टन सुबोध ने घटना के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बताया कि, उनका रेस्क्यू ओमानी नेवी द्वारा किया गया। हमले के तुरंत बाद ओमानी नौसेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे चालक दल को सुरक्षित तट पर पहुंचाया। कैप्टन सुबोध ने कहा, हमले के बाद भारतीय दूतावास हमारे लगातार संपर्क में रहा। उन्होंने हर कदम पर सहायता प्रदान की।
शिपिंग कंपनी भी हर संभव मदद करती रही। 11 जून से 14 जून तक हमें होटल में सुरक्षित रखा गया, जहां हमारी हर जरूरत का ध्यान रखा गया। कैप्टन ने आगे बताया कि, पूरे चालक दल ने इस दौरान एकजुटता दिखाई और एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि समुद्री यात्राएं हमेशा चुनौतियों से भरी होती हैं, लेकिन इस तरह के हमले अप्रत्याशित और बेहद खतरनाक थे।
सेकेंड ऑफिसर नाजिम की बातपोत के सेकेंड ऑफिसर नाजिम ने भी दूतावास, ओमान सरकार और अपनी कंपनी की सराहना की। उन्होंने कहा, दूतावास, ओमान प्रशासन और कंपनी ने पूरा सहयोग दिया। आम लोगों की दुआओं और सबके सामूहिक प्रयासों से हम अपने परिजनों से मिल पा रहे हैं। नाजिम ने बताया कि, संकट की स्थिति में समन्वित कार्रवाई ने न केवल उनकी जान बचाई बल्कि पूरे चालक दल का मनोबल भी बनाए रखा।
चालक दल के अन्य सदस्यों ने भी कहा कि विदेशी बंदरगाह के पास ऐसी घटना में फंसना जीवन की सबसे भयावह अनुभूतियों में से एक है लेकिन भारतीय दूतावास की त्वरित प्रतिक्रिया और ओमानी अधिकारियों की पेशेवर कार्यशैली ने उन्हें उम्मीद दी। उन्होंने सभी का आभार जताते हुए कहा कि इस अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत समझाई है।
ये थी घटना
यह घटना 11 जून को हुई थी, जब ओमान के एक प्रमुख बंदरगाह के पास एमटी जलवीर पर हमला किया गया। हमले के बाद चालक दल को ओमानी प्राधिकारियों के सहयोग से तुरंत सुरक्षित निकाल लिया गया। उल्लेखनीय है कि, पिछले चार दिनों में यह तीसरी ऐसी घटना थी, जिसमें ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया।
इससे पहले 8 जून को अमेरिकी बलों ने पलाऊ झंडे वाले तेल टैंकर एमटी मैरिवेक्स को निष्क्रिय कर दिया था। इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। फिर बुधवार को पलाऊ झंडे वाले एक अन्य टैंकर एमटी सेटेबेलो पर हमला हुआ, जिसमें 24 भारतीय नाविकों में से तीन की दुखद मौत हो गई। भारत सरकार ने इन तीनों घटनाओं एमटी सेटेबेलो, एमटी मैरिवेक्स और एमटी जलवीर को अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमले बताते हुए गहरी चिंता जताई है। ये घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
ओमान के पास का क्षेत्र विश्व व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां हजारों जहाज रोजाना गुजरते हैं। भारतीय चालक दल की बड़ी संख्या इन मार्गों पर सक्रिय होने के कारण भारत को इन घटनाओं का सीधा असर झेलना पड़ रहा है।
भारत ने लिया तत्काल संज्ञान
भारतीय सरकार और दूतावास ने इन घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लिया। राजदूत प्रशांत पिसे के नेतृत्व में मिशन ने न केवल बचाव कार्य में सहयोग किया बल्कि चालक दल के सदस्यों को मनोवैज्ञानिक सहायता भी उपलब्ध कराई। भारत ने ओमान सरकार के साथ निकट समन्वय बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समुद्री सुरक्षा के मुद्दे को उठाने की तैयारी की है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित देशों के साथ बातचीत जारी है। शिपिंग कंपनियों को भी सतर्क रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत करने की सलाह दी गई है।
घर लौट रहे चालक दल के सदस्यों के चेहरों पर राहत साफ झलक रही थी। कई सदस्यों ने कहा कि, परिवार से दूर इस संकट में फंसना कितना डरावना था। एक क्रू मेंबर ने बताया, हम बस घर जाना चाहते थे। दूतावास और ओमान की मदद के बिना शायद स्थिति और बिगड़ जाती। परिवारों की ओर से भी सरकार और दूतावास के प्रति आभार व्यक्त किया जा रहा है।
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