US-Iran War: अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविक शहीद, भारत ने की निंदा, जताया दुःख

नई दिल्ली। ओमान के तट के पास अमेरिकी सेना द्वारा पलाऊ झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो ( (MT Settebello) ) पर किए गए हमले में लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस दुखद घटना की जानकारी देते हुए बताया कि, तीनों भारतीय नाविक अब इस दुनिया में नहीं रहे। शुरू में तीनों के लापता होने की खबर आई थी, लेकिन बचाव अभियान के दौरान दो के शव बरामद होने के बाद उनकी मौत की पुष्टि हो गई। इसके बाद तीसरे नाविक की भी मौत की खबर सामने आई।

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ये हैं मृतक नाविकों के नाम

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मारे गए नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है, क्योंकि जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया।

मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जारी किया बयान

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस घटना का जिक्र करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया।

उन्होंने लिखा- पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत अफसोस हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि, बचाए गए क्रू सदस्यों को तुरंत स्वदेश लाया जाए और मृतकों के शवों को भी जल्द से जल्द वापस लाया जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार सम्मान जंक तरीके से किया जा सके। मंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है।

 ये थी पूरी घटना

बुधवार को अमेरिकी सेना ने एमटी सेटेबेलो नाम के तेल टैंकर के इंजन रूम पर सटीक हथियारों से हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। क्रू मेंबरों द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों की अवहेलना करने के बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर प्रेसिजन मुनिशन दागे। यह हमला ओमान के सोहर पोर्ट से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में हुआ।

हमले के बाद जहाज में आग लग गई और संचार व्यवस्था बाधित हो गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 21 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन तीन भारतीय नाविक शुरू में लापता बताए गए थे।

भारत ने हमले की निंदा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार पूरे मामले पर लगातार नजर रख रही है। ओमान और अन्य सहयोगी देशों के साथ समन्वय कर बचाव कार्य चलाया गया। भारत सरकार ने मृतकों के शवों को स्वदेश लाने और परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन का आरोप

ईरान ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि, अमेरिकी हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, ईरान ने दावा किया कि, अमेरिकी कार्रवाइयों से उसके दक्षिणी शहर सीरिक के दो जलाशय क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे हजारों लोगों की जल आपूर्ति बाधित हुई है।

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यह घटना अमेरिकी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद हुई, जिसमें ईरानी ड्रोन से टक्कर का आरोप लगाया गया। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और कतर के एक प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता के लिए तेहरान का दौरा किया है।

 खतरे में भारतीय नाविक

यह पहली बार नहीं है जब मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों को खतरा हुआ हो। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हजारों भारतीय नाविक इस क्षेत्र में काम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा बढ़ गया है। भारत सरकार को अब इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए और मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।

परिवार में मातम

मृत नाविकों के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है। आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश जैसे युवा नाविक अपने परिवार की आर्थिक कमर थे। सरकार ने आश्वासन दिया है कि, मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा और नौकरी देने पर विचार किया जाएगा।

यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जहां एक ओर अमेरिका अपनी नाकेबंदी का हवाला दे रहा है, वहीं भारत जैसे देशों को अपने नागरिकों की जान बचाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

 

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