
वॉशिंगटन। कई महीनों से सुलग रहे पश्चिम एशिया को लेकर अमेरिका ने एक फैसला ले लिया है, जिसने वैश्विक राजनीति और सामरिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने प्रोजेक्ट फ्रीडम का बिगुल फूंक दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बेहद कड़े और स्पष्ट संबोधन में ईरान को चेतावनी देते हुए इस विशाल मिशन की रूपरेखा दुनिया के सामने रखी।
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हजारों लोगों को निकाला जाएगा सुरक्षित
इस मिशन का केंद्र बिंदु फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य है, जिसे ईरान ने अपनी आक्रामक नीतियों के जरिए एक युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया है। रूबियो के मुताबिक, यह ऑपरेशन न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि उन हजारों निर्दोष जिंदगियों को भी सुरक्षित बाहर निकालेगा, जो पिछले कई हफ्तों से ईरानी शासन की समुद्री डकैती का शिकार होकर समुद्र के बीच फंसे हुए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ईरान की हरकतों को लेकर जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम का मुख्य और तत्काल लक्ष्य फारस की खाड़ी में फंसे 87 अलग-अलग देशों के लगभग 23,000 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। रूबियो ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरानी शासन ने इन निर्दोष लोगों को वहां बंधक जैसी भयावह स्थिति में डाल रखा है। पिछले दो महीनों से ये नाविक और व्यापारिक जहाजों के कर्मचारी समुद्र के बीच अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर हैं।
ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की जिस तरह से घेराबंदी की है, उसे रूबियो ने आपराधिक और विनाशकारी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए समुद्री डकैती पर उतर आया है। इन जहाजों पर बिना किसी उकसावे के हमले किए गए, गोलियां चलाई गईं और उनके चालक दल को आतंकित किया गया, जबकि इन देशों और कर्मचारियों का इस क्षेत्रीय विवाद से कोई सीधा लेना-देना नहीं था।
समुद्र में फंसे जहाज़ों को मिलेगा सुरक्षा कवच
होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत को दुनिया जानती है और इसी का फायदा उठाकर ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। रूबियो ने खुलासा किया कि दुनिया के कई देशों ने सार्वजनिक मंचों पर और कई ने निजी तौर पर गिड़गिड़ाते हुए अमेरिका से मदद की गुहार लगाई थी। इन देशों की चिंता जायज थी क्योंकि उनके जहाज और नागरिक ईरान की अवैध घेराबंदी के बीच घिरे हुए थे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन सभी अपीलों पर गंभीरता से विचार किया और अंततः अमेरिकी सेना को यह सख्त आदेश दिया कि वे इन फंसे हुए जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान करें और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाकर बाहर निकालें। प्रोजेक्ट फ्रीडम महज एक निकासी अभियान नहीं है, बल्कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से स्वतंत्र और सुरक्षित करने की दिशा में अमेरिका का पहला बड़ा प्रहार है। मार्को रूबियो ने साफ कर दिया कि ईरान की आर्थिक आगजनी की इस नीति को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अमेरिका अपने दोस्तों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
ईरान को दी गई इस चेतावनी में रूबियो ने अमेरिका की सैन्य शक्ति का जिक्र करते हुए यह स्पष्ट किया कि यद्यपि अमेरिका शांति का पक्षधर है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए वह बल प्रयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम पूरी तरह से एक रक्षात्मक अभियान है।
ईरान की विस्तारवादी सोच पर हमला
अमेरिकी नौसेना और वायुसेना तब तक अपनी बंदूकों का इस्तेमाल नहीं करेगी, जब तक उन पर या उनके द्वारा संरक्षित जहाजों पर हमला नहीं होता। रूबियो ने तेहरान को आगाह करते हुए कहा कि अगर ईरान की तेज रफ्तार नावों, उनके हमलावर ड्रोन्स या मिसाइलों ने अमेरिकी सेना के सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की या उनके लिए खतरा पैदा किया, तो उन्हें बिना किसी देरी के समुद्र के भीतर दफन कर दिया जाएगा। यह मिशन वैश्विक नौवहन की आजादी को बहाल करने की अमेरिकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
ईरान की विस्तारवादी सोच पर हमला करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि, दुनिया के किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अपनी मनमर्जी चलाए या उन्हें अपनी जागीर समझे। होर्मुज जलडमरूमध्य से पूरी दुनिया का व्यापार गुजरता है और ईरान की कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय अपराध है।
प्रोजेक्ट फ्रीडम के शुरुआती चरणों की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिकी झंडे वाले व्यापारिक जहाज पहले ही सुरक्षित तरीके से इस रास्ते को पार कर चुके हैं। अब अमेरिकी सेना इस सुरक्षा दायरे को विस्तार दे रही है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे खतरे को टाला जा सके। अमेरिका अब यह सुनिश्चित करेगा कि तेल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार का यह मुख्य द्वार किसी तानाशाही शासन के नियंत्रण में न रहे।
ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी
मार्को रूबियो ने बातचीत के दौरान ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी का भी उल्लेख किया, जो सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही जर्जर स्थिति में है और अब अमेरिकी प्रतिबंधों को पहले से कहीं अधिक सख्ती और नए आयामों के साथ लागू किया जा रहा है। अमेरिका अब ईरान की आय के उन गुप्त स्रोतों पर भी प्रहार करेगा जिनके जरिए वह आतंकवाद को फंड करता है।

रूबियो ने ईरानी नेतृत्व को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संकल्पों को परखने की भूल कतई न करें। उन्होंने कहा कि ट्रंप की कार्यशैली बहुत स्पष्ट है। वे जो कहते हैं, उसे जमीन पर उतारकर दिखाते हैं। अगर ईरान ने अमेरिकी संयम को उसकी कमजोरी समझा और चुनौती देने की कोशिश की, तो इस टकराव का अंत केवल और केवल ईरान की करारी हार के साथ होगा।
क्षेत्रीय राजनीति और इजरायल के साथ जारी संघर्ष पर बात करते हुए रूबियो ने लेबनान और वहां सक्रिय हिजबुल्लाह को लेकर भी अमेरिका का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि लेबनान में अस्थिरता और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव की असली जड़ हिजबुल्लाह है। यह संगठन लेबनान की संप्रभु धरती का इस्तेमाल इजरायली नागरिकों पर कायरतापूर्ण हमले करने के लिए करता है, जिसका खामियाजा लेबनान के मासूम लोगों को भुगतना पड़ता है।
वैश्विक समुदाय को रुबियो का संदेश
रूबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे हिजबुल्लाह हो, हमास हो या यमन के हूती विद्रोही, इन सभी की डोर तेहरान के हाथों में है। ईरान इन आतंकी समूहों के जरिए पूरे मध्य पूर्व को अशांति की आग में झोंकना चाहता है। अमेरिका की नीति अब यह है कि, लेबनान की आधिकारिक सरकार और उसकी सेना को इतना सशक्त और साधन संपन्न बनाया जाए कि, वे खुद हिजबुल्लाह को चुनौती दे सकें और उन्हें निहत्था कर सकें, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
रूबियो ने वैश्विक समुदाय को यह संदेश दिया कि अमेरिका अब पीछे हटकर देखने वाली नीति को त्याग चुका है। प्रोजेक्ट फ्रीडम की शुरुआत इस बात का संकेत है कि अब समुद्र से लेकर जमीन तक, जहां भी अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय गरिमा को चुनौती दी जाएगी, वहां अमेरिका का जवाब त्वरित और निर्णायक होगा। यह खबर उन 23,000 नागरिकों के परिवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण बनकर आई है, जो हफ्तों से अपने प्रियजनों की घर वापसी का इंतजार कर रहे थे।
वॉशिंगटन की इस नई रणनीतिक आक्रामकता ने न केवल ईरान बल्कि दुनिया की अन्य उन ताकतों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। आने वाले दिन फारस की खाड़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि अमेरिकी बेड़ा अब वहां अपनी उपस्थिति को अभेद्य बनाने की दिशा में बढ़ चुका है।
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