
देहरादून। भारतीय सैन्य इतिहास में 13 जून का दिन एक अभूतपूर्व और स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने देश की रक्षा प्रणाली और महिला सशक्तिकरण को एक नई और ऐतिहासिक दिशा दी है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 94 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के पहले महिला बैच की 9 महिला कैडेट्स ने अपना कठिन प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय थल सेना में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल होकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया।
इसे भी पढ़ें- देहरादून पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, IMA पासिंग आउट परेड की लेंगी सलामी
सेना को मिलीं 14 महिला अधिकारी
देश के लिए यह दोहरी खुशी और गर्व का अवसर तब बन गया जब इसी दिन तेलंगाना के हैदराबाद (डुंडीगल) में स्थित भारतीय वायुसेना अकादमी (AFA) से भी 5 महिला कैडेट्स ने फाइटर और फ्लाइंग विंग में सफलतापूर्वक कमीशन प्राप्त कर लिया। इस तरह महज़ एक ही दिन के भीतर भारतीय सशस्त्र बलों को कुल 14 नई जांबाज महिला अधिकारी मिल गईं, जो सीमाओं पर देश की संप्रभुता की मुस्तैदी से रक्षा करेंगी।

भारत की राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने इस अद्भुत और महान उपलब्धि पर गहरा गर्व व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र के इतिहास में मील का पत्थर करार दिया है।
देहरादून के कसमंड ब्लॉक में आयोजित आईएमए की इस 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड का नजारा हर आंख को भावुक और सीने को गर्व से चौड़ा कर देने वाला था। जैसे ही अपना अंतिम पडाव पार कर ये 9 महिला कैडेट्स मुख्य धारा की सेना का हिस्सा बनीं, वैसे ही पूरा अकादमी परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता की जय के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ली सलामी
इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण पल की गवाह खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनीं, जिन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की भव्य सलामी ली और इसकी गम्भीरता से समीक्षा की। राष्ट्रपति ने परेड ग्राउंड में कैडेट्स के बेमिसाल अनुशासन और शानदार मार्च-पास्ट की खुले दिल से सराहना की और इसके बाद बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जांबाज ऑफिसर कैडेट्स को प्रतिष्ठित मेडल्स और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर सम्मानित किया।

यह भारतीय सेना के इतिहास में पहला मौका था जब इस सबसे प्रतिष्ठित पासिंग आउट परेड में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की बेटियों ने कदमताल किया, जो बदलते और सशक्त होते भारत की एक बुलंद तस्वीर को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा था।
सशस्त्र बलों के मुख्य युद्धक और कमान भूमिकाओं में महिलाओं की यह ऐतिहासिक एंट्री रातों-रात या आसानी से नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत लंबा कानूनी और सामाजिक संघर्ष रहा है। इससे पहले महिलाओं को नेशनल डिफेंस एकेडमी के जरिए सीधे सेना की नियमित विंग में परमानेंट कमीशन के तहत प्रवेश की अनुमति बिल्कुल नहीं थी और वे केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से ही कुछ चुनिंदा गैर-युद्धक विभागों में अपनी सेवाएं दे पाती थीं।
सुप्रीम कोर्ट में 2022 में खोला था NDA का दरवाजा
इसके बाद जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक युगांतरकारी और बड़ा फैसला सुनाते हुए महिलाओं के लिए एनडीए के बंद दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए थे। इसी ऐतिहासिक अदालती आदेश के बाद एनडीए ने अपने पहले महिला बैच को प्रवेश दिया था और आज जब वह पहला बैच अपनी कठिन ट्रेनिंग पूरी कर आईएमए और वायुसेना अकादमी से एक साथ पास आउट हुआ है, तो उसने सदियों पुरानी उस रूढ़िवादी धारणा को हमेशा के लिए मटियामेट कर दिया है कि महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर रहकर मुख्य सशस्त्र बलों का नेतृत्व नहीं कर सकतीं। अब भारतीय सेना के हर विंग और हर मोर्चे पर देश की ये बेटियां मुख्य और निर्णायक भूमिकाएं निभाती हुई नजर आएंगी।

पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बेहद भावुक और गर्वित नजर आईं और उन्होंने इस खास दिन को भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी और अहम उपलब्धियों में से एक बताया। राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों और खासकर महिला कैडेट्स को बधाई देते हुए कहा कि आज आईएमए के इस पावन मंच से 9 महिला कैडेट्स का पास आउट होना केवल हमारी सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में एक साधारण मील का पत्थर नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत में ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में पूरे देश के लिए एक बेहद प्रेरक और जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
भविष्य के लिए तैयार रहना होगा- मुर्मू
उन्होंने कहा कि आज इस दीक्षांत समारोह के पूरा होने के बाद देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा का जो महान और पावन जिम्मा है, वह अब आप जैसे होनहार, अनुशासित और युवा कंधों पर आ गया है। इस समय पूरे 140 करोड़ देशवासियों का भरोसा और उनकी सुरक्षा की तमाम उम्मीदें सीधे तौर पर आपसे जुड़ चुकी हैं, इसलिए चाहे सामने कैसी भी कठिन परिस्थिति या संकट आए, अपने व्यक्तिगत हितों और सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़कर सिर्फ देश सेवा को ही अपना पहला, अंतिम और सर्वोच्च कर्तव्य मानें।

बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के आधुनिक व वैज्ञानिक तौर-तरीकों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने युवा अफसरों को हमेशा सतर्क, सजग और अपडेटेड रहने की कड़ी सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में युद्ध केवल भौगोलिक सीमाओं और पारंपरिक हथियारों तक ही सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों के आने से सुरक्षा की चुनौतियां दिन-प्रतिदिन तेजी से बदल रही हैं। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारतीय सेना को दुश्मनों पर हर हाल में बढ़त बनाए रखने के लिए हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा।
इसे भी पढ़ें- देहरादून में सीएम धामी की हुंकार, महिलाओं की दुश्मन है कांग्रेस



