फिर बढ़े LPG के दाम, सरकार बोली- हर सिलेंडर पर हो रहा 700 रुपये का नुकसान

 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला 7 जून से लागू हो गया है। इसके साथ ही दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर अब 942 रुपये हो गई है। इससे पहले सात मार्च को भी 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह चालू वर्ष में कुल 89 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस फैसले पर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि आम परिवारों की रसोई पर इसका सीधा असर पड़ता है।

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सरकार ने जारी की सफाई

सरकार ने इस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए विस्तृत सफाई जारी की है और कहा है कि, वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में परिवारों को अन्य देशों की तुलना में सस्ती कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध हो रही है। सरकार के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की आपूर्ति बाधित होने से कीमतें बहुत बढ़ गई हैं।

LPG

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधा के कारण एलपीजी का वैश्विक बेंचमार्क सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है। नतीजतन घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत अब 1600 रुपये से ज्यादा हो चुकी है।

 पेट्रोलियम कंपनियों मिलेगी क्षतिपूर्ति

तेल कंपनियों को हर सिलेंडर पर अभी भी करीब 700 रुपये का नुकसान हो रहा है। ताजा बढ़ोतरी से पहले यह नुकसान 703 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गया था। घरेलू उपभोक्ता केवल 942 रुपये ही भुगतान कर रहे हैं, जबकि बाकी लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां और केंद्र सरकार वहन कर रही हैं। पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल नुकसान बढ़कर लगभग 60 हजार करोड़ रुपये हो गया था जो उससे पहले वाले वर्ष में 41,338 करोड़ रुपये था। इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने की मंजूरी दी है।

सरकार का तर्क है कि, बिना इस बढ़ोतरी के नुकसान और बढ़ जाता जो अंत में टैक्सपेयर्स के बोझ के रूप में वापस आता। साथ ही रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सरकार ने कुछ राहत दी है। इन उपभोक्ताओं को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलने के बाद सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध होगा। हालांकि पहले सब्सिडी साल में नौ बार देने की घोषणा थी जो अब चार बार तक सीमित हो गई है।

कई देशों से मंगाई जा रही एलपीजी

उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं और सरकार का दावा है कि, योजना से स्वच्छ ईंधन की पहुंच बढ़ी है, लेकिन बढ़ती कीमतों और कम सब्सिडी के कारण कई परिवार अभी भी परंपरागत ईंधन पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। सरकार ने संकट के दौरान घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास भी किए हैं। घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की गई है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था की गई ताकि देश में सप्लाई बनी रहे।

सरकार का मुख्य दावा यह है कि, भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में अभी भी काफी कम हैं। कई रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों के अनुसार पड़ोसी देशों में समान सिलेंडर की कीमत भारत से सैकड़ों रुपये ज्यादा है जबकि विकसित देशों में तो यह और भी महंगा है। यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के पूरे असर से बचाने और देशभर में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

आम लोगों का बिगड़ चुका है बजट

भारत लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी की जरूरत आयात से पूरी करता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर अनिवार्य रूप से पड़ता है। होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग में बाधा से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे पूरी दुनिया में कीमतें बढ़ी हैं। भारत ने इस स्थिति में भी उपभोक्ताओं को पूर्ण बाजार भाव से बचाने की कोशिश की है। आम आदमी के नजरिए से देखें तो यह बढ़ोतरी महंगाई का एक और झटका है। रसोई का खर्च बढ़ने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों पर दबाव बढ़ता है। कई परिवार पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं और ईंधन की कीमतें उनके बजट को और तंग कर रही हैं।

LPG

विपक्षी दलों ने भी सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर सरकार का पक्ष यह है कि, तेल कंपनियों को घाटा होने से उनकी वित्तीय सेहत खराब हो सकती है जो लंबे समय में निवेश और सप्लाई पर असर डालेगी, इसलिए आंशिक बढ़ोतरी के साथ नुकसान को साझा करने की नीति अपनाई जा रही है। कुल मिलाकर यह फैसला वैश्विक परिस्थितियों से उपजा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ और सप्लाई सामान्य हुई तो कीमतें स्थिर हो सकती हैं।

उपभोक्ताओं को सलाह

फिलहाल सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात विविधीकरण करने और सब्सिडी व्यवस्था को लक्षित रखने पर जोर दे रही है। उपभोक्ताओं के लिए सलाह यही है कि, एलपीजी का सही उपयोग करें, लीकेज रोके और जहां संभव हो दक्षता बढ़ाने वाले उपकरण अपनाएं। यह स्थिति दिखाती है कि ऊर्जा क्षेत्र कितना संवेदनशील है।

भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश को वैश्विक घटनाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन सरकार की कोशिश है कि आम नागरिक पर बोझ कम से कम पड़े। भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा और पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार से इस निर्भरता को कम किया जा सकता है। फिलहाल 942 रुपये का सिलेंडर और उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 642 रुपये का भाव वास्तविकता है जो वैश्विक संकट के बीच भारत की कोशिशों को दर्शाता है।

 

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