क्या आपकी भी नींद टूटती है बार-बार, कहीं ये डायबिटीज का संकेत तो नहीं, तुरंत कराएं चेकअप

आज की आधुनिक जीवनशैली और खान-पान में आए बदलाव की वजह से डायबिटीज तेजी से पैर पसार रहा है, जो दुनिया भर के लिए चुनौती बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के हाल के आंकड़ों पर गौर करें तो ये बेहद चौंकाने वाले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1990 में जहां पूरी दुनिया में लगभग 20 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे थे। वहीं 2022 तक यह आंकड़ा बढ़कर 83 करोड़ के पार पहुंच गया है। इससे भी डरावना तथ्य यह है कि, इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक मरीजों को यह पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी की चपेट में हैं, जिससे उन्हें सही समय पर इलाज और दवाएं नहीं मिल पातीं। अक्सर लोग इसे केवल ब्लड शुगर का बढ़ना मानकर हल्के में लेते हैं, लेकिन यही लापरवाही किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक कि अंगों को काटने  की नौबत ला सकती है।

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ये हैं डायबिटीज के लक्षण

डायबिटीज के पारंपरिक लक्षणों जैसे बार-बार प्यास लगना, थकान और धुंधला दिखने के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन हाल ही में ब्रिटेन की प्रमुख संस्था डायबिटीज यूके ने एक ऐसे लक्षण की तरफ इशारा किया है, जिसे अक्सर लोग थकान या काम का तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वह लक्षण है नींद में खलल या नींद से जुड़ी समस्याएं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि आपकी खराब नींद का सीधा संबंध आपके शरीर में बढ़ते शुगर लेवल से हो सकता है।

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हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, शरीर में ग्लूकोज के स्तर में होने वाला असंतुलन सीधे तौर पर आपकी स्लीप साइकिल को प्रभावित करता है। जब शरीर में शुगर का स्तर बहुत अधिक (हाइपरग्लाइसीमिया) या बहुत कम (हाइपोग्लाइसीमिया) हो जाता है, तो रात की नींद बाधित होना निश्चित है। हाई ब्लड शुगर की स्थिति में शरीर अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी पर दबाव डालता है, जिसके कारण मरीज को रात में बार-बार पेशाब लगने लगती है, जिससे कई बार नींद में खलल पड़ता है और उसकी नींद नहीं पूरी होत, जिससे वह अगले दिन बेहद थका हुआ महसूस करता है। इसके अलावा, हाई शुगर के कारण होने वाला सिरदर्द और अत्यधिक प्यास भी सुकून भरी नींद में बड़ी बाधा बनती है।

शुगर लेबल कम होने से टूटती है नींद

रात के समय ब्लड शुगर का गिरना यानी हाइपोग्लाइसीमिया और भी खतरनाक हो सकता है। यह समस्या विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में अधिक देखी जाती है। अगर रात में सोते समय शुगर का लेवल अचानक कम हो जाए, तो शरीर में पसीना आना, घबराहट होना या डरावने सपने आने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। कई बार शुगर लेवल को नियंत्रित करने वाली कुछ दवाएं भी रात के समय शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं। रात में बार-बार शुगर कम होने से न केवल नींद का पैटर्न बिगड़ता है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति को क्रोनिक अनिद्रा का शिकार बना सकता है।

नींद और डायबिटीज के इस खतरनाक चक्र को समझने के लिए साल 2022 में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल ने एक विस्तृत अध्ययन किया। इस शोध के परिणाम चौंकाने वाले थे। अध्ययन में पाया गया कि, जिन लोगों को नियमित रूप से सोने में परेशानी होती है या जिनकी नींद बीच-बीच में बार-बार टूटती है, उनके रक्त में शुगर का स्तर उन लोगों की तुलना में काफी अधिक पाया गया जो चैन की नींद सोते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि, नींद की कमी शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है, जिससे डायबिटीज होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है यानी यह एक दोहरा हमला है डायबिटीज नींद खराब करती है और खराब नींद डायबिटीज को और गंभीर बनाती है।

  बढ़ता है तनाव हार्मोन का स्तर 

शुगर लेवल के अलावा डायबिटीज से जुड़ी अन्य शारीरिक समस्याएं भी नींद में रोड़ा अटकाती हैं। डायबिटिक न्यूरोपैथी या नर्व डैमेज के कारण अक्सर मरीजों के पैरों में जलन, झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है। रात के शांत माहौल में यह दर्द और अधिक महसूस होता है, जिससे मरीज बिस्तर पर करवटें बदलते रह जाता है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो अंततः हृदय रोगों और मानसिक विकारों को न्यौता देता है।

स्लीप हाइजीन नियमों का करें पालन

डायबिटीज यूके ने अच्छी नींद सुनिश्चित करने के लिए कुछ स्लीप हाइजीन नियमों का पालन करने की सलाह दी है। सबसे पहले, दिन के समय शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बेहद जरूरी है ताकि शरीर रात तक प्राकृतिक रूप से थक सके। सोने से कम से कम एक घंटे पहले सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल, लैपटॉप को दूर रख देना चाहिए, क्योंकि इनकी ब्लू लाइट नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन को रोकती है। इसके अलावा, सोने के कमरे का तापमान थोड़ा ठंडा रखना और बिस्तर को आरामदायक बनाना भी मददगार साबित होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि, सोने से पहले शराब के सेवन और हैवी डिनर से बचना चाहिए, क्योंकि ये ब्लड शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।

अगर आप भी पिछले कुछ समय से नींद की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे केवल मानसिक तनाव न मानें बल्कि एक बार अपना ब्लड शुगर लेवल जरूर चेक करवाएं। डायबिटीज एक ‘साइलेंट किलर’ है, अगर इसे पहचान कर जल्द ही इसका इलाज नहीं शुरू किया जाता है तो परिणाम घातक हो सकते हैं।

 

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