
हम भोजन के बिना कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन पानी के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। एक सामान्य वयस्क मनुष्य के शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। शरीर की हर कोशिका, ऊतक और अंग को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन विडंबना यह है कि हम पानी कितना पीना है, कितनी बार पीना है और कब नहीं पीना है, इस पर बहुत कम चर्चा करते हैं।
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हालिया स्वास्थ्य शोधों और विशेषज्ञों की चेतावनियों के अनुसार, जब तक आपको प्यास का अहसास होता है और मुंह सूखने लगता है, तब तक आपका शरीर पहले ही डिहाइड्रेशन की स्थिति में पहुंच चुका होता है यानी प्यास शरीर की शुरुआती चेतावनी नहीं, बल्कि एक आपातकालीन पुकार है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पर्याप्त जल का सेवन केवल प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह को सुचारू रखने और महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। पानी हमारे जोड़ों के लिए लुब्रिकेंट का काम करता है और रीढ़ की हड्डी जैसे संवेदनशील ऊतकों की रक्षा करता है।
खासकर बदलते मौसम, शारीरिक श्रम या बीमारी के दौरान शरीर से तरल पदार्थ तेजी से बाहर निकलते हैं। ऐसे में यदि पानी की पूर्ति न की जाए, तो इसका सीधा असर हमारे मूड, याददाश्त, पाचन और त्वचा पर पड़ता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मस्तिष्क का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पानी है, इसलिए पानी की हल्की-सी कमी भी मानसिक एकाग्रता को भंग कर सकती है।
अधिकांश लोग डिहाइड्रेशन का मतलब केवल प्यास लगन समझते हैं, लेकिन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, इसके लक्षण बहुत पहले ही दिखाई देने लगते है।
मानसिक थकान और सुस्ती
क्या आप पूरी नींद लेने के बाद भी थकान महसूस करते हैं? यह पानी की कमी हो सकती है। जब शरीर में तरल कम होता है, तो रक्त की कुल मात्रा घट जाती है। इसे पंप करने के लिए दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे आप जल्दी थक जाते हैं।
सिरदर्द और ब्रेन फॉग
धीरे-धीरे बढ़ने वाला हल्का सिरदर्द अक्सर डिहाइड्रेशन का नतीजा होता है। शोध बताते हैं कि पानी की कमी से मस्तिष्क के ऊतकों में अस्थायी रूप से खिंचाव या सिकुड़न आ सकती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द महसूस होता है।
त्वचा का लचीलापन खोना
यदि आपकी त्वचा धोने के बाद खिंची-खिंची महसूस होती है या समय से पहले महीन रेखाएं दिखने लगी हैं, तो यह पानी की कमी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अपने हाथ की ऊपरी त्वचा को चुटकी से खींचकर देखें, यदि वह तुरंत अपनी सामान्य स्थिति में नहीं लौटती, तो आप डिहाइड्रेटेड हैं।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, यूरिन का रंग शरीर में पानी के स्तर का सबसे सटीक पैमाना है।
हल्का पीला यह आदर्श स्थिति है।
गहरा पीला या नारंगी: रंग यह स्पष्ट संकेत है कि आपको तुरंत पानी पीने की जरूरत है।
तेज गंध: यह संकेत देता है कि यूरिन में अपशिष्ट पदार्थों का संकेंद्रण बढ़ गया है और किडनी को सफाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।
पाचन के मोर्चे पर, यदि आपको अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है, तो दवा से पहले पानी पर ध्यान दें। हमारी आंतें मल को आगे बढ़ाने के लिए पानी का उपयोग करती हैं। पानी की कमी होने पर आंतें मल से ही पानी सोखने लगती हैं, जिससे वह सख्त हो जाता है और पाचन धीमा पड़ जाता है।
मीठा खाने की तलब और मांसपेशियों में ऐंठन
अजीब लग सकता है, लेकिन अचानक मीठा खाने की तीव्र इच्छा होना भी डिहाइड्रेशन से जुड़ा हो सकता है। शरीर को ऊर्जा के लिए ग्लाइकोजन जारी करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। जब पानी कम होता है, तो शरीर को ऊर्जा उत्पादन में संघर्ष करना पड़ता है और वह तुरंत चीनी की मांग करने लगता है।
इसके अलावा, मांसपेशियों में अचानक ऐंठन या बिना वजह चक्कर आना इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत है। मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम जैसे खनिज पानी के माध्यम से ही कोशिकाओं तक पहुँचते हैं। इनकी कमी एथलीटों और शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।
कितना पानी है पर्याप्त?
विशेषज्ञों का कहना है कि 8 गिलास पानी का नियम हर किसी पर लागू नहीं होता। एक सामान्य स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 2 से 3 लीटर तरल पदार्थ लेना आवश्यक माना गया है। हालांकि, इसकी सटीक मात्रा निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है
- गर्मी और उमस में अधिक पानी चाहिए।
- वर्कआउट करने वालों को सामान्य से अधिक तरल की जरूरत होती है।
- पुरुषों और महिलाओं की ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं।
- यदि आप रसीले फल और सब्जियां अधिक खाते हैं, तो पानी की सीधी मात्रा थोड़ी कम की जा सकती है।
कब न पिएं पानी?
- आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही कुछ स्थितियों में पानी पीने से बचने की सलाह देते हैं:
- खाने के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी पीने से पाचक रस (Digestive Juices) पतले हो जाते हैं, जिससे पाचन प्रभावित होता है।
- खड़े होकर या बहुत तेजी से पानी पीने के बजाय घूंट-घूंट करके बैठ कर पानी पीना किडनी के लिए बेहतर माना जाता है।
पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि एक औषधि है। अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को पहचानें और प्यास लगने का इंतज़ार न करें। नियमित अंतराल पर पानी पीकर आप न केवल अपनी ऊर्जा बढ़ा सकते हैं, बल्कि भविष्य की कई बीमारियों को भी टाल सकते हैं।
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