पानी पीते ही भागना पड़ता है टॉयलेट? क्या है मुख्य कारण और कैसे इसे ठीक करें

कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ आम शिकायतें होती हैं, जिन पर आमतौर पर ध्यान कम दिया जाता है। इसी में से एक है पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते ही कुछ ही मिनटों में यूरिन की तीव्र इच्छा होना यानी टॉयलेट जाना पड़ता है। ये समस्या कई बार ऑफिस में मीटिंग के दौरान, यात्रा के वक्त या किसी जरूरी काम के वक्त बेहद परेशान करने वाली होती है। अगर यह स्थिति कभी-कभार की होती है, तो चिंता की बात नहीं, लेकिन अगर दिन में कई बार ऐसा होने लगे तो यह स्वास्थ्य संबंधी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। आइए जानते हैं क्या  है ये समस्या और कैसे इससे निपटें।

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हेल्थ एपसपर्ट्स कहते हैं कि, बार-बार यूरिन आने की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है। यह ओवरएक्टिव ब्लैडर (ओएबी), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई), डायबिटीज, प्रोस्टेट की समस्या या जीवनशैली से जुड़े कारणों से हो सकती है। कुछ मामलों में इसे जीवन शैली में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है, लेकिन कुछ में डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ सकती है।

बार-बार यूरिन आने के मुख्य कारण?
ओवरएक्टिव ब्लैडर 

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, ओएबी सबसे आम कारणों में से एक है। इसमें ब्लैडर की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा सिकुड़ने लगती हैं। ब्लैडर में ज्यादा यूरिन न होने पर भी दिमाग को लगता है कि, ब्लैडर भर गया है और तुरंत यूरिन की जरूरत महसूस होती है। यह समस्या 40 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा देखी जाती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

महिलाओं में यह समस्या ज्यादा आम है। बैक्टीरिया के कारण ब्लैडर में जलन होती है, जिससे बार-बार और थोड़ा-थोड़ा यूरिन आता है। जलन, दर्द या पेशाब में खून आने जैसे लक्षण साथ में हों तो तुरंत जांच जरूरी है।

अनियंत्रित ब्लड शुगर 

डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में बार-बार यूरिन आना प्रमुख है। ज्यादा शुगर के कारण किडनी अतिरिक्त पानी निकालने लगती है, जिससे यूरिन की मात्रा बढ़ जाती है। रात में कई बार उठना (नॉक्टूरिया) भी डायबिटीज का संकेत हो सकता है।

कैफीन, शराब और ज्यादा पानी पीना

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और शराब ब्लैडर को इरिटेट करती हैं। ये डाइयूरेटिक (मूत्रवर्धक) होते हैं, जिससे यूरिन तेजी से बनता है। साथ ही, एक साथ ज्यादा पानी पीने से भी किडनी तेजी से फिल्टर करती है और पेशाब बार-बार आता है।

तनाव और चिंता

मानसिक तनाव ब्लैडर की संवेदनशीलता बढ़ा देता है। तनाव में शरीर का ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड एक्टिव होता है, जिससे ब्लैडर पर दबाव बढ़ता है और कम यूरिन होने पर भी तीव्र इच्छा होती है।

प्रोस्टेट की समस्या (पुरुषों में)

50 साल से ऊपर के पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यूरिन फ्लो को ब्लॉक करता है, जिससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता और बार-बार यूरिन की जरूरत पड़ती है।

उम्र बढ़ने के साथ ब्लैडर क्षमता में कमी

उम्र के साथ ब्लैडर की क्षमता और मांसपेशियों का नियंत्रण कम होता है, जिससे समस्या बढ़ सकती है।

 खतरे का संकेत?

चिकित्सक चेतावनी देते हैं कि, अगर बार-बार यूरिन आने के साथ नीचे लिखे ये कुछ लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

पेशाब में जलन या दर्द
पेशाब में खून आना
निचले पेट या कमर में दर्द
बुखार, ठंड लगना या थकान
रात में 3-4 बार से ज्यादा उठना
यूरिन रोक नहीं पाना (इनकॉन्टिनेंस)
यूरिन की धार कमजोर होना

ये लक्षण यूटीआई, ब्लैडर स्टोन, प्रोस्टेट कैंसर, डायबिटीज या किडनी संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। इस समस्या से राहत पाने के लिए क्या करें?

पानी पीने का तरीका बदलें

एक साथ ज्यादा पानी न पिएं। दिनभर में थोड़ा-थोड़ा अंतराल पर पानी लें। रात को सोने से 2-3 घंटे पहले पानी कम करें।

ब्लैडर इरिटेंट्स कम करें

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, मसालेदार खाना और सिट्रस फ्रूट्स कम करें। ये ब्लैडर को ज्यादा एक्टिव करते हैं।

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज  

रोजाना 10-15 मिनट कीगल एक्सरसाइज करें। यह ब्लैडर और यूरेथ्रा की मांसपेशियों को मजबूत करती है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए फायदेमंद।

ब्लैडर ट्रेनिंग

तय समय पर यूरिन करें, जैसे हर 2-3 घंटे में। “जस्ट इन केस” टॉयलेट जाने से बचें। धीरे-धीरे अंतराल बढ़ाएं।

वजन नियंत्रण और व्यायाम

ज्यादा वजन ब्लैडर पर दबाव डालता है। नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन ब्लैडर कंट्रोल में मदद करता है।

तनाव प्रबंधन

योग, मेडिटेशन, गहरी सांस या काउंसलिंग से तनाव कम करें। तनाव ब्लैडर की समस्या को बढ़ाता है।

डॉक्टर से जांच

अगर समस्या 2-3 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, तो यूरोलॉजिस्ट या यूरोगायनेकोलॉजिस्ट से मिलें। यूरिन टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या यूरोडायनामिक स्टडी जरूरी हो सकती है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, ज्यादातर मामलों में जीवनशैली में छोटे बदलाव से यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो जाती है, लेकिन अगर लक्षण गंभीर हों तो देरी न करें, क्योंकि समय पर इलाज से बड़ी बीमारियां रोकी जा सकती हैं। बार-बार यूरिन आने की समस्या को हल्के में न लें। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शरीर का संकेत भी हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच से आप इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।

 

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