तेहरान से सुरक्षित निकाले गए भारतीय छात्र, दूतावास ने ‘कोम’ शहर में किया शिफ्ट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान में जारी सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय दूतावास ने तेहरान से अधिकांश भारतीय छात्रों को राजधानी के बाहर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है। 3 मार्च को जारी एक एडवाइजरी में दूतावास ने बताया कि तेहरान शहर में बढ़ती जोखिम की आशंका के कारण यह कदम उठाया गया है।

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दूतावास ने छात्रों के परिवहन, भोजन और आवास की व्यवस्था की है, जबकि शहर में केवल वे कुछ छात्र बचे हैं जिन्होंने दूतावास के रिलोकेशन ऑफर को ठुकरा दिया। यह कदम अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हालिया सैन्य हमलों के बाद उठाया गया है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष तेज हो गया है।

तेहरान

ईरानी राजधानी में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ रही है।भारतीय छात्रों, खासकर मेडिकल छात्रों की संख्या ईरान में हजारों में है, जिनमें से ज्यादातर तेहरान में पढ़ाई कर रहे हैं। दूतावास की यह पहल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है, लेकिन परिवारों में चिंता बनी हुई है और वे भारत सरकार से जल्द स्वदेश वापसी की मांग कर रहे हैं।

 दूतावास के संपर्क में रहें

भारतीय दूतावास, तेहरान ने 3 मार्च को जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया कि अधिकांश भारतीय छात्रों को तेहरान से बाहर सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है। दूतावास ने परिवहन, भोजन और ठहरने की पूरी व्यवस्था की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि केवल वे छात्र तेहरान में बचे हैं जिन्होंने दूतावास के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बाकी भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे जहां हैं वहीं रहें, जितना संभव हो घर के अंदर रहें, खिड़कियों से दूर रहें और अनावश्यक आवाजाही से बचें। दूतावास ने आगे सलाह दी है कि विरोध-प्रदर्शन या भीड़ वाली जगहों से दूर रहें, हर समय सावधानी बरतें और दूतावास के साथ नियमित संपर्क में रहें।

पहले भी दी गई थी ईरान छोड़ने की सलाह

आपात स्थिति में संपर्क नंबर और ईमेल भी प्रदान किए गए हैं। यह एडवाइजरी ईरान में अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद आई है, जिससे तेहरान में हाई अलर्ट स्थिति है। दूतावास ने पहले भी फरवरी के अंत में नागरिकों को उपलब्ध माध्यमों से ईरान छोड़ने की सलाह दी थी, लेकिन कई छात्र परीक्षाओं और अन्य कारणों से रुक गए थे।

तेहरान

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के राष्ट्रीय प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने पुष्टि की कि तेहरान से स्थानांतरित भारतीय छात्र सुरक्षित रूप से कोम शहर पहुंच गए हैं। कोम, तेहरान से लगभग 140 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर है। AIMSA ने बताया कि यह स्थानांतरण दूतावास के सहयोग से सावधानीपूर्वक किया गया, जिसमें बसों की व्यवस्था की गई थी। छात्रों को केवल 5 किलो का बैग लेकर जाने की सलाह दी गई थी।

AIMSA के जताया केंद्र सरकार का आभार

डॉ. मोमिन खान ने कहा, तेहरान में भारतीय मेडिकल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूतावास ने समय पर कदम उठाया। छात्र अब कोम में हैं और उनकी भलाई की पूरी व्यवस्था है। AIMSA ने केंद्र सरकार का आभार जताया और कहा कि यह कदम छात्रों के बीच राहत लेकर आया है। कई छात्र तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (TUMS), शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे संस्थानों से हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर के छात्रों की अच्छी संख्या है।

ईरान में 9 हजार भारतीय हैं

ईरान में फंसे भारतीय छात्रों के माता-पिता और परिजन हर पल चिंतित हैं। कई परिवारों ने बताया कि संपर्क सीमित है और विस्फोटों की खबरें सुनकर डर लग रहा है। एक मां ने कहा, मेरी बेटी तेहरान में पहले साल की मेडिकल छात्रा है। कल थोड़ी देर बात हुई, उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था। कैंपस से बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है।”कई अभिभावक भारत सरकार से तत्काल निकासी की मांग कर रहे हैं।जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रभावित क्षेत्रों से छात्रों की निकासी की अपील की है।

अनुमान है कि ईरान में करीब 9,000 भारतीय हैं, जिनमें से हजारों छात्र हैं। AIMSA और अन्य संगठन दूतावास के संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है, जिसमें वे विस्फोटों की आवाजें सुनने और तनावपूर्ण माहौल का जिक्र कर रहे हैं।

हवाई क्षेत्र बंद होने से आ रही मुश्किल

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। हालिया सैन्य हमलों से ईरानी हवाई क्षेत्र बंद है, जिससे हवाई निकासी मुश्किल हो गई है। भारतीय दूतावास ने पहले फरवरी में नागरिकों को छोड़ने की सलाह दी थी, लेकिन कई छात्र परीक्षाओं के कारण रुक गए। अब दूतावास छात्रों और नागरिकों के साथ निरंतर संपर्क में है।भारत सरकार ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और दूतावास के माध्यम से सभी संभव सहायता प्रदान कर रही है। MEA ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। छात्र संगठनों ने सरकार से विशेष राहत उड़ानें शुरू करने की मांग की है।

फिलहाल, कोम जैसे सुरक्षित शहरों में स्थानांतरण से कुछ राहत मिली है, लेकिन लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर निकासी की जरूरत बढ़ सकती है।

ईरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों की संख्या काफी है, खासकर MBBS और अन्य कोर्स में। कई छात्रों ने कहा कि निकासी से उनकी डिग्री प्रभावित हो सकती है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है। AIMSA ने परीक्षाओं के स्थगन और ऑनलाइन विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। परिवारों की मांग है कि सरकार छात्रों को सुरक्षित निकालकर भारत लाए, जहां वे पढ़ाई जारी रख सकें। यह स्थिति न केवल छात्रों के लिए बल्कि उनके परिवारों के लिए भी मानसिक तनाव का कारण बनी हुई है। हर नया दिन नई चिंता लेकर आ रहा है।

 

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