इस्लामाबाद। भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस व्यापार समझौते को “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील” कहा। इस ट्रेड डील पर अब दुनिया भर के नेता, आर्थिक विशेषज्ञ और राजनीतिक टिप्पणीकार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पाकिस्तान ने भी इस पर अपनी राय जाहिर की है।

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तबाह हो सकता है पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग
एक पाकिस्तानी समाचार वेबसाइट, brief.pk ने भारत-यूरोप व्यापार डील को लेकर शहबाज़ शरीफ की सरकार को एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि, यह व्यापार समझौता यूरोपीय बाजारों में पाकिस्तान को मिलने वाले फायदों को पूरी तरह से खत्म कर देगा। इससे कई क्षेत्र, खासकर कपड़ा उद्योग, पूरी तरह से तबाह हो जायेगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि, यह विकास एक गंभीर आर्थिक चुनौती है जिसके लिए तत्काल और व्यावहारिक कदम उठाने की आवश्यकता है। बेवसाइट में ये भी लिखा गया है कि केवल कल्पनाओं या खोखले वादों से काम नहीं चलेगा।
भारत को मिलेगी टैरिफ में रियायत
रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जाहिर की गई है कि, यह व्यापार समझौता भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार को पूरी तरह से बदल देगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण बढ़त बनाए रखी है। भारत को अब टैरिफ रियायतें मिलेंगी, जो यूरोपीय संघ ने किसी अन्य व्यापारिक भागीदार को नहीं दी हैं, जिससे GSP प्लस दर्जे के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले लाभ सीधे कम हो जाएंगे। इसके अलावा, यह समझौता 2032 तक यूरोपीय संघ के भारत को निर्यात को दोगुना कर देगा और कई क्षेत्रों में यूरोप को भारतीय निर्यात में जबरदस्त वृद्धि होगी।

रिपोर्ट में शहबाज़ सरकार को चेतावनी देते हुए भारत और यूरोप के बीच हुई इस ट्रेड डील के पैमाने को समझाने की कोशिश की गई है। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार 136.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो उसी बाजार में पाकिस्तान के लगभग 9 बिलियन डॉलर के निर्यात से कई गुना अधिक है। हालांकि, इस समझौते से भारत को जो फायदे होंगे, वे इन क्षेत्रों में पाकिस्तान के कारोबार को लगभग पूरी तरह से खत्म कर देंगे, क्योंकि उत्पादन, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में पाकिस्तान भारत के मुकाबले कहीं नहीं टिकता।
GSP प्लस दर्जा
रिपोर्ट की मानें, तो भारत-यूरोप व्यापार समझौता पाकिस्तान के कपड़ा क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग को यूरोपीय बाजारों में GSP प्लस दर्जा दिया गया है, जिससे इसे जबरदस्त फायदा हुआ है। पाकिस्तान को ये दर्जा साल 2014 में मिला था। इसके बाद से ईयू के लिए पाकिस्तान के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 66.6% का इजाफा हुआ था, जिससे यूरोप को कुल पाकिस्तानी एक्सपोर्ट लगभग $4.7 बिलियन से बढ़कर लगभग $9 बिलियन हो गया है। वहीं, भारत ने 2024 में EU को लगभग $7.01 बिलियन मूल्य के टेक्सटाइल, कपड़े और होम टेक्सटाइल भेजे, जिसमें रेडीमेड कपड़ों का हिस्सा $4.46 बिलियन था। हालांकि, भारत के पास अभी कुल EU टेक्सटाइल और कपड़ों के इंपोर्ट का सिर्फ़ 3% हिस्सा है, लेकिन FTA के बाद, जब टैरिफ खत्म हो जाएंगे, तो भारत के एक्सपोर्ट में भारी उछाल देखने को मिलेगा। अभी तक इस क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश को फायदा हो रहा था, क्योंकि उनके पास GSP प्लस स्टेटस था।
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पाकिस्तान- बांग्लादेश होंगे पीछे
ये स्टेटस भारत के पास नहीं था, लेकिन अब समय बदल गया है। अब वह समय दूर नहीं जब भारतीय मैन्युफैक्चरर्स, कीमत के मामले में पीछे रहने के बजाय, क्वालिटी, डिज़ाइन, कंप्लायंस स्टैंडर्ड और डिलीवरी टाइमलाइन के आधार पर पाकिस्तान और बांग्लादेश को बहुत पीछे छोड़ देंगे। इससे पाकिस्तान के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को EU मार्केट में अपने हिस्से का 10 प्रतिशत से ज़्यादा का नुकसान हो सकता है, जिससे सालाना $450 मिलियन से $900 मिलियन का अनुमानित नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, पाकिस्तान पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है, इसलिए, ये नुकसान काफी ज़्यादा है और घरेलू रोज़गार पर सीधा असर डालेंगे। पाकिस्तान EU मार्केट में अनाज, फल, सब्जियां और मछली एक्सपोर्ट करता है।
चमड़े उद्योग को मिलेगा फायदा

भारत-EU समझौते में कृषि उत्पादों के लिए प्रावधान शामिल हैं और भारत के विशाल कृषि क्षेत्र और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर में पाकिस्तान को पूरी तरह से पीछे छोड़ने की क्षमता है। दोनों देश यूरोप को चमड़े का सामान भी एक्सपोर्ट करते हैं, हालांकि, यह क्षेत्र टेक्सटाइल से छोटा है। ट्रेड डील के बाद अब अगर टैरिफ खत्म होता है, तो भारतीय चमड़ा एक्सपोर्टर्स के लिए कीमतें कम हो जाएंगी, जिससे पाकिस्तानी मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव पड़ेगा जो पहले से ही अपने सामान को कम मार्जिन और न्यूनतम मुनाफे पर बेचने के लिए मजबूर हैं।
शाहबाज सरकार को चेतावनी
पाकिस्तानी वेबसाइट में शाहबाज सरकार को चेतावनी दी गई है कि यह समझौता क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत के आर्थिक प्रभाव को और अधिक मजबूती प्रदान करने वाला है। इस डील में EU भारत को एक निवेश संरक्षण समझौता और सार्वजनिक खरीद तक पहुंच प्रदान कर रहा है, ऐसे उपाय जो यूरोपीय कंपनियों को पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के बजाय भारत में अपने संचालन का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
ये यूरोपीय कंपनियां अब भारत में अपने सोर्सिंग कार्यालय और वेंडर डेवलपमेंट कार्यक्रम में बढ़ोत्तरी करेंगी। EU भारत को इंडो-पैसिफिक में एक रणनीतिक संतुलन बनाने वाला और बहुध्रुवीय दुनिया में एक लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में देखता है। यह समझौता इस रणनीतिक तालमेल को दर्शाता है, इसलिए, भारतीय प्रोडक्ट्स से मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान को भी यूरोप के साथ ऐसी कोई डील करनी चाहिए, जिससे यूरोप के बाजारों में पाकिस्तान की पकड़ मजबूत बनी रहे।
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