
नई दिल्ली। छींक आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, जिससे हर व्यक्ति रोजाना गुजरता है। आमतौर पर इसे एलर्जी, धूल या मौसम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन भारतीय परंपराओं और शकुन शास्त्र में छींक को केवल शरीर की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य से जुड़े संकेतों के रूप में भी देखा जाता है। यही कारण है कि आज भी घर से निकलते समय छींक आ जाए तो लोग रुकने की सलाह देते हैं। मान्यता है कि छींक हमेशा अशुभ नहीं होती, बल्कि सही समय और परिस्थिति में आई छींक शुभ फल भी दे सकती है।
शकुन शास्त्र में छींक का महत्व
शकुन शास्त्र के अनुसार छींक का असर उसके समय, संख्या, दिशा और परिस्थिति पर निर्भर करता है। कहीं यह बाधा और सावधानी का संकेत देती है, तो कहीं सफलता, धन लाभ और स्वास्थ्य से जुड़ा शुभ संदेश देती है। इसलिए हर छींक को नकारात्मक मानना सही नहीं माना गया है।
कब मानी जाती है छींक अशुभ
शकुन शास्त्र के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी जरूरी काम से घर से निकलते समय छींक दे या सामने वाला छींक दे दे, तो इसे कार्य में रुकावट या बाधा का संकेत माना जाता है। ऐसे समय में कुछ देर रुककर पानी पीना शुभ माना गया है।
इसी तरह दूध उबालते समय महिला को छींक आना परिवार के किसी सदस्य की सेहत बिगड़ने की चेतावनी माना जाता है।
बहस या विवाद के दौरान छींक आना इस बात का संकेत माना जाता है कि मामला और ज्यादा बिगड़ सकता है। वहीं, घर से बाहर निकलते वक्त कुत्ते की छींक को अज्ञात भय या संभावित संकट से जोड़ा जाता है।
इन परिस्थितियों में छींक मानी जाती है शुभ
शकुन शास्त्र में यह भी बताया गया है कि कई बार छींक शुभ फल देती है। यदि कोई व्यक्ति शुभ या मांगलिक कार्य के लिए निकलते समय छींक दे, तो इसे सफलता और आकस्मिक धन लाभ का संकेत माना जाता है। दवा लेते समय छींक आना जल्द स्वस्थ होने की ओर इशारा करता है। वहीं, बाजार में कोई वस्तु खरीदते समय छींक आना भविष्य में उस वस्तु से सुख और लाभ मिलने का संकेत माना जाता है।
हर छींक को नकारात्मक न समझें
शकुन शास्त्र के अनुसार छींक कभी सावधानी का संकेत देती है, तो कभी शुभ अवसर का। इसलिए हर छींक को अपशकुन मानकर घबराने के बजाय उसके समय और परिस्थिति को समझना जरूरी बताया गया है।



