महाराष्ट्र। NCP नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की महाराष्ट्र के बारामती के पास एक प्राइवेट प्लेन क्रैश में मौत हो गई। यह हादसा प्लेन की लैंडिंग के दौरान हुआ। अजित पवार के साथ प्लेन में सवार अन्य चार लोगों की भी जान चली गई।

पीएम मोदी और शाह ने ली जानकारी

जानकारी के मुताबिक, अजीत पवार आज बुधवार को एक प्राइवेट चार्टर प्लेन से जिला परिषद चुनावों के लिए मुंबई से बारामती आ रहे थे, तभी सुबह 8:45 बजे बारामती में प्लेन क्रैश-लैंड हो गया और उनका निधन हो गया। हादसे वाली जगह का एक वीडियो भी सामने आया है, जो काफी परेशान करने वाला है। मौके पर लोगों की भारी भीड़ मौजूद है और विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया है।
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DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने बताया कि बारामती क्रैश लैंडिंग के दौरान विमान में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, दो अन्य लोग (1 PSO और 1 अटेंडेंट), और दो क्रू मेंबर (PIC + FO) सवार थे। विमान में सवार किसी भी व्यक्ति की जान नहीं बच पाई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया और बारामती विमान हादसे के बारे में जानकारी मांगी।
Shri Ajit Pawar Ji was a leader of the people, having a strong grassroots level connect. He was widely respected as a hardworking personality at the forefront of serving the people of Maharashtra. His understanding of administrative matters and passion for empowering the poor and… pic.twitter.com/mdgwwGzw4R
— Narendra Modi (@narendramodi) January 28, 2026
चार अन्य लोगों की भी गई जान
क्रैश लैंडिंग के समय मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने कहा, “मैंने ये हादसा अपनीआंखों से देखा। यह सच में बहुत दुखद है। जब विमान नीचे आ रहा था, तो ऐसा लग रहा था कि यह क्रैश हो जाएगा और देखते नहीं देखते एक जोरदार धमाका हुआ और प्लेन में आग लग गई। विमान में 4-5 और धमाके हुए। इस बीच मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सबने लोगों को (विमान से) बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन क्योंकि भीषण आग की वजह से कोई उसके पास तक नहीं जा सका। विमान में अजीत पवार भी सवार थे।
छह बार संभाल चुके थे डिप्टी सीएम का पद
बता दें कि, अजीत पवार मंगलवार को मुंबई में थे, यहां उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र कैबिनेट की इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की बैठक में हिस्सा लिया था। अजीत पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उपमुख्यमंत्री थे, जिन्होंने लगातार छह बार यह पद संभाला था। अजीत पवार ने 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड के लिए चुने जाने के बाद अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 1991 में, उन्हें पुणे जिला सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक का चेयरमैन चुना गया।
2022 में छोड़ा था चाचा का साथ
राजनीति के बेताज बादशाह माने जाने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से महाराष्ट्र में पार्टी को मजबूत किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद से NCP के लिए एक बड़ा सपोर्ट बेस बनाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन 2022 में उन्होंने शरद पवार से अलग होकर अपना राजनीतिक रास्ता चुना और BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई।

1991 में, वह पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी। इसके बाद शरद पवार केंद्र में पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने। यहीं से शरद पवार केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए, जबकि अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति की कमान संभाली।
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अपनी कड़ी मेहनत और लगन से अजित पवार ने महाराष्ट्र में खुद को शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित किया। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत की और 1995 में वह पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। तब से, वह इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में जीत हासिल की। उन्होंने न सिर्फ अपने राजनीतिक करियर में खुद को स्थापित किया, बल्कि सत्ता पर अपनी पकड़ भी मजबूत की।
अपने 45 साल के राजनीतिक करियर में, अजीत पवार एक बार संसद सदस्य और सात बार विधायक रहे। उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधियां महाराष्ट्र तक ही सीमित रखी हैं। उन्हें सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहने का अनुभव है। उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। बाद में, जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने, तो उन्हें मंत्री बनाया गया।
2010 में पहली बार बने थे उप मुख्यमंत्री
1999 में, जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आईं, तो उन्हें विलासराव देशमुख की सरकार में सिंचाई मंत्री का प्रभार दिया गया। 2003-2004 में, उन्हें सुशील कुमार शिंदे की सरकार में ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद, वह उपमुख्यमंत्री बने।

अजीत पवार पहली बार नवंबर 2010 में उपमुख्यमंत्री बने, और फिर 2010 में दोबारा। 2019 में, वह फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री बने, और फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में भी डिप्टी सीएम बने। इसके बाद, 2023 में शरद पवार ने बगावत कर दी और शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बन गए। 2024 में, वह छठी बार उप मुख्यमंत्री बने।
फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे अजीत पवार के पिता
22 जुलाई, 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर जन्मे अजीत पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। उनके पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे। अनंतराव मुंबई में वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजीत पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई है और उनके दो बच्चे हैं, पार्थ पवार और जय पवार।
अजीत पवार ने अपनी शुरुआती शिक्षा बारामती के महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी हाई स्कूल से प्राप्त की। हालांकि, जब वह कॉलेज में थे, तब उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। फिर वह राजनीति में आ गए।
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