मिडटर्म में हार के बाद ट्रम्प की पार्टी में बगावत, ईरान जंग पर घिरे राष्ट्रपति

 

  • हाउस में डेमोक्रेट्स को बहुमत, सीनेट में भी बढ़त, उपराष्ट्रपति वेंस बोले- ‘हमारी हार की वजह जंग है’

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के नेता हार की वजह तलाशने में जुटे हैं और इसका ठीकरा एक दूसरे पर ही फोड़ने लगे हैं। निशाने पर ईरान के साथ चल रही जंग, टैरिफ की नीति और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के प्रति नरम रुख जैसे ट्रम्प के फैसले हैं।

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हाउस और सीनेट का हाल

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। अब तक के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी 242 और रिपब्लिकन पार्टी 151 सीटें जीत चुकी है, जबकि 42 सीटों पर गिनती जारी है। बहुमत के लिए 218 सीटें चाहिए और डेमोक्रेट्स यह आंकड़ा पार कर चुके हैं।एक अनुमान के मुताबिक, पार्टी को आखिर में 258 सीटें मिल सकती हैं। ऐसा हुआ, तो वह 1992 के बाद पहली बार इतनी सीटें हासिल करेगी। 1992 में डेमोक्रेट्स को 258 और 2008 में 257 सीटें मिली थीं, और उसके बाद क्रमशः 1993 और 2009 में बिल क्लिंटन और बराक ओबामा राष्ट्रपति बने।

US midterm elections

सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हुए। 33 सीटों के नतीजे आ चुके हैं, जिनमें डेमोक्रेट्स ने 20 और रिपब्लिकन ने 13 सीटें जीती हैं। दो सीटों पर गिनती जारी है। कुल मिलाकर सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 और रिपब्लिकन के पास 44 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी हैं। गवर्नर की 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आए हैं, जिनमें 22 पर डेमोक्रेट और 12 पर रिपब्लिकन जीते हैं।

ट्रम्प ने माना, ईरान जंग बनी हार की वजह

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने माना कि, ईरान से जंग के कारण पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का यही रास्ता था। उनके शब्दों में, जंग की वजह से कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन दोबारा मौका मिले तो वे फिर यही फैसला लेंगे।

हेगसेथ पर सवाल

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि, ट्रम्प के करीबी कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को हार का जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि, हेगसेथ ने राष्ट्रपति को ईरान युद्ध में उलझा दिया, लेकिन उससे बाहर निकलने की कोई साफ योजना नहीं बनाई।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी माना कि, इस जंग की वजह से 2024 में ट्रम्प को वोट देने वाले कई मतदाता इस बार पार्टी से दूर हो गए। वेंस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, हार की वजह जंग है और आगे की हर चर्चा इसी बात से शुरू होनी चाहिए। अब ट्रम्प के करीबी नेता भी इस जंग से दूरी बनाते दिख रहे हैं।

टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व कार्यकारी निदेशक चैड विलबैंक्स ने ईरान जंग, व्यापार नीति और पुतिन का पक्ष लेने वाले फैसलों को नुकसान की वजह बताया। टेक्सास के रिपब्लिकन नेता डॉन हफाइन्स ने पार्टी नेतृत्व और गवर्नर ग्रेग एबॉट की नीतियों को जिम्मेदार माना। सांसद चिप रॉय ने विवादित उम्मीदवारों और प्रचार पर हुए खर्च को कारण बताया, जबकि रणनीतिकार मैट मैकोविएक के मुताबिक पार्टी ने सीमित मतदाता वर्ग पर ज्यादा ध्यान दिया और उसकी रणनीति कमजोर रही।

हार से पल्ला झाड़ने की कोशिश

प्रचार के दौरान ट्रम्प बार-बार खुद को चुनाव का चेहरा बताते रहे। उन्होंने 47 बार लोगों से अपने नाम पर वोट मांगा। लेकिन नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि वे खुद उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए रिपब्लिकन समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने नहीं पहुंचे।

जिसे ट्रम्प ने ‘जिहादी’ कहा, वह बना सीनेटर

ट्रम्प ने अब्दुल अल-सैयद के बारे में कहा था कि, अगर कोई ब्लैक या यहूदी उन्हें वोट देता है तो वह पागल है, क्योंकि वे खतरनाक और हिंसक जिहादी हैं। नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल 52 फीसदी से ज्यादा वोट पाकर अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।

अलास्का और मिसिसिपी में कांटे की टक्कर

अलास्का की सीनेट सीट के नतीजे का इंतजार है। यहां डेमोक्रेट उम्मीदवार मैरी पेल्टोला मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन से करीब 600 वोट आगे हैं। मिसिसिपी में करीब 96 फीसदी मतगणना हो चुकी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक डेमोक्रेट स्कॉट कोलम रिपब्लिकन सिंडी हाइड-स्मिथ से 1138 वोट आगे हैं। करीब एक घंटे पहले यह बढ़त सिर्फ 65 वोट की थी, जो अब करीब 0.1 फीसदी हो गई है।

नतीजों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि चुनाव के बाद ईरान से जंग खत्म हो सकती है। गुरुवार को एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल करीब 1.5 फीसदी गिरकर 86.83 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

 टैरिफ से तुरंत राहत नहीं, पर कनाडा खुश

नतीजों को कनाडा के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है, क्योंकि डेमोक्रेट्स की जीत को अमेरिकी मतदाताओं की ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कहा कि वे खुशी से सड़कों पर उछल रहे थे और यह कनाडा की जीत है। हालांकि, तुरंत राहत की उम्मीद कम है, क्योंकि ट्रम्प ने ज्यादातर टैरिफ संसद की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति के आदेश से लगाए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता फिर शुरू हो गई है।

अब डेमोक्रेट्स क्या कर सकेंगे

जनवरी में नई संसद शुरू होने पर डेमोक्रेट्स कमान संभालेंगे और ट्रम्प प्रशासन के कामकाज की जांच कर सकेंगे। मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और जजों की नियुक्ति के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है, इसलिए वे ट्रम्प के चुने लोगों की नियुक्तियां रोक सकेंगे। लेकिन ट्रम्प के वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो डेमोक्रेट्स के पास नहीं है।

जीत के बाद पार्टी के सामने वादे निभाने की चुनौती है। नेताओं ने महंगाई घटाने और ईरान से जंग खत्म कराने को प्राथमिकता बताया है। हाउस में डेमोक्रेट नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि पार्टी आम लोगों के लिए काम करेगी। उनके अगले स्पीकर बनने की संभावना है और ऐसा हुआ तो वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे।

पांच भारतवंशी जीते

हाउस के चुनाव में पांच भारतवंशी नेता जीते हैं और अमीष शाह आगे चल रहे हैं। सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। जीतने वालों में रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया शामिल हैं। 2024 में इस सदन में छह भारतवंशी चुने गए थे।

 

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