Midterm Elections: ट्रंप का फूटा गुस्सा, कहा- ‘मैं होता तो जीत मिलती, उम्मीदवारों पर फोड़ा ठीकरा’

वाशिंगटन। Midterm Elections: अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में मध्यावधि चुनावों के बाद आए अप्रत्याशित और चौंकाने वाले परिणामों ने भूचाल ला दिया है। रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में उम्मीद के मुताबिक, नतीजे न आने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। चुनाव परिणामों पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में उन्होंने दो टूक कहा कि, यदि इस चुनाव के मैदान में वे खुद उतरे होते, तो नतीजे आज के मुकाबले बिल्कुल उलट होते और पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिलती।

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ट्रंप ने की तीखी पोस्ट

अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि, आज रात वे खुद सीधे तौर पर चुनावी मैदान में नहीं थे। यही वजह रही कि, पार्टी को वह बड़ी सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इस बयान के जरिए उन्होंने एक तरह से अपनी पार्टी की हार की पूरी जिम्मेदारी रिपब्लिकन उम्मीदवारों के सिर मढ़ दी है और खुद को इस असफलता से अलग करने की कोशिश की है।

 दोनों सदनों में रिपब्लिकन को झटका

डोनाल्ड ट्रंप का यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब शुरुआती रुझानों और परिणामों में डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में बहुमत के आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ती नजर आ रही है और सीनेट में भी उसका दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस के दोनों ही प्रमुख सदनों में भारी निराशा हाथ लगी है।

donald trump

अमेरिका की 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए जादुई आंकड़े यानी कम से कम 218 सीटों की आवश्यकता होती है। शुरुआती और वर्तमान चुनावी आंकड़ों के आधार पर यह माना जा रहा है कि डेमोक्रेट्स इस चुनाव में आसानी से बहुमत का यह आंकड़ा पार कर लेंगे। इसके विपरीत, रिपब्लिकन पार्टी को बमुश्किल 160 सीटों के आसपास ही संतोष करना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, यह सीधा और करारा झटका सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक रसूख और उनकी नीतियों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

ट्रंप ने स्वीकारी हार

एक तरफ जहां ट्रंप ने अपनी पार्टी की हार के लिए खुद के मैदान में न होने को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि वे इन मध्यावधि चुनावों के जनादेश को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि, डेमोक्रेट्स को इस चुनाव में बढ़त और जीत हासिल हुई है तथा वे देशहित में उनके साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें अपने फैसलों या राजनीतिक रुख को लेकर किसी भी प्रकार का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पीछे मुड़कर देखने के बजाय अब पूरी तरह से भविष्य की रणनीतियों और आगे की राह पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस बयान के भीतर छिपा असंतोष और झुंझलाहट साफ तौर पर देखी जा सकती है।

राष्ट्रपति कार्यकाल पर पड़ेगा असर

इन मध्यावधि चुनावों के नतीजे डोनाल्ड ट्रंप के लिए आने वाले समय में गंभीर राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अभी पूरे दो साल बाकी हैं। ऐसे में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों या कम से कम निचले सदन में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण हो जाना उनके प्रशासनिक कामकाज पर सीधा और गहरा असर डालेगा।

donald trump

ट्रंप के लिए अपने अहम राजनीतिक और नीतिगत फैसले उस तरह से लागू करना अब कतई आसान नहीं होगा, जिस प्रकार वे अब तक अपने मनमुताबिक करते आए हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप की यह कार्यशैली रही है कि वे हर काम अपने ही अनूठे और आक्रामक तरीके से करते हैं। उनकी इसी कार्यशैली के कारण उनके कई बड़े फैसले अतीत में कानूनी पेचीदगियों में फंसते रहे हैं और उन्हें अमेरिकी अदालतों में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

इन मुद्दों पर बढ़ेंगी मुश्किलें

अब जबकि संसद के सदनों में उनकी अपनी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत नहीं होगा, तो ट्रंप प्रशासन के लिए इमिग्रेशन (प्रवासन), टैक्स रिफॉर्म्स और टैरिफ जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर पहले की तरह अपनी मनमर्जी चलाना लगभग असंभव हो जाएगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अब यह ताकत होगी कि, वे राष्ट्रपति ट्रंप के एजेंडे को रोक सकें, उनके विधेयकों को खारिज कर सकें और यहां तक कि उनके फैसलों की प्रशासनिक जांच भी बैठा सकें।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, यह मिडटर्म चुनाव अमेरिका की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। यह न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप के शेष दो वर्षों के कार्यकाल की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्ति संतुलन किस करवट बैठेगा। ट्रंप का यह गुस्सा और उनकी सफाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका की घरेलू राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक ध्रुवीकृत और संघर्षपूर्ण होने वाली है।

 

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