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वेतन बढ़ाने की मांग पर ढाका, गाजीपुर और आशुलिया में हिंसक प्रदर्शन, सरकार ने बनाया वेतन बोर्ड
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आईएमएफ का अनुमान, विकास दर पिछले 40 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर
ढाका। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट से गुजर रही है। देश के सबसे बड़े उद्योग रेडीमेड गारमेंट सेक्टर में हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं और 10 लाख से ज्यादा कपड़ा मजदूरों में भारी असंतोष है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूर सड़कों पर उतरे हैं। कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। हालात संभालने के लिए तारिक रहमान की सरकार ने वेतन बोर्ड बनाया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी नही थम रहे हैं।
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दो साल में बदली तस्वीर
करीब दो साल पहले बांग्लादेश में छात्रों के आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उस समय देश की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में मानी जा रही थी और लोगों के पास रोजगार के अवसर थे। आंदोलन के दौरान देश में हिंसा, लूटपाट और अराजकता की घटनाएं हुईं। इसके बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली और फिर देश में तारिक रहमान की सरकार बनी, लेकिन इन ढाई वर्षों में देश की आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती गई। इसका सबसे ज्यादा असर कपड़ा उद्योग और वहां काम करने वाले मजदूरों पर पड़ा है।
529 फैक्ट्रियां बंद, मजदूरों में असंतोष
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के मुताबिक, देश में 529 गारमेंट फैक्ट्रियां बंद हैं। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले 10 लाख से ज्यादा मजदूरों में भारी असंतोष है। हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं और वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। ढाका, गाजीपुर और आशुलिया जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं।

देश में महंगाई सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इसी को आधार बनाकर मजदूर अपना मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने हालात बिगड़ते देख आनन-फानन में ‘वेतन बोर्ड’ का गठन कर दिया है।
गारमेंट उद्योग को बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से ज्यादा है। ऐसे में इस उद्योग पर आया संकट पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।
कई इलाकों में पुलिस से झड़प, आगजनी
बांग्लादेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में 500 से ज्यादा रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्रियों में काम ठप हो चुका है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों मजदूर सड़कों पर हैं। ढाका, गाजीपुर और सावर क्षेत्रों में पुलिस और मजदूरों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। जगह-जगह आगजनी की घटनाएं हुई हैं। प्रमुख राजमार्गों पर आवाजाही बंद हो गई है और कारखानों का कामकाज रुक गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी मजदूरों ने पुलिस चौकियों, पुलिस वाहनों, दमकल विभाग के वाहनों, एक जूट गोदाम और एक बैंक को आग के हवाले कर दिया।
कहां कितनी फैक्ट्रियां हुईं बंद
सबसे ज्यादा असर गाजीपुर और मयमनसिंह में दिख रहा है, जहां 276 फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं। सावर, आशुलिया और जिराबो में 185 फैक्ट्रियों का काम रोक दिया गया है। वहीं, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में 68 फैक्ट्रियां बंद हैं।
वेतन बोर्ड बना, फिर भी नहीं थमा प्रदर्शन
तारिक रहमान सरकार ने रविवार को गारमेंट कर्मचारियों के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी हैं। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे, पानी की बौछारें छोड़ीं और साउंड ग्रेनेड भी फेंके। कानून-व्यवस्था संभालने के लिए प्रभावित औद्योगिक इलाकों में ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ की पांच प्लाटून तैनात की गई हैं।
फैक्ट्री मालिकों की चेतावनी
हिंसक प्रदर्शनों के बीच गारमेंट निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि अगर वेतन बोर्ड बनने के बाद भी हिंसा और अव्यवस्था जारी रही, तो उन्हें अपनी फैक्ट्रियां बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। इससे बेरोजगारी का नया संकट खड़ा हो सकता है।
Breaking: Garment workers have blocked the highway in Chandra, Kaliakair, Gazipur, since this morning.
#BangladeshCrisis https://t.co/dajamGrml7
— Asifur Rahman Chowdhury (@Asifurrahman71) November 2, 2026
बीजीएमईए के अध्यक्ष महमूद हसन खान ने रविवार को ढाका स्थित एसोसिएशन परिसर में गारमेंट निर्माताओं के साथ आपात बैठक की। बैठक में मौजूदा मजदूर असंतोष पर चर्चा हुई और उसके बाद उन्होंने चेतावनी जारी की। उन्होंने मजदूर संगठनों और महासंघों से जिम्मेदारी के साथ काम करने और आंदोलन को नियंत्रित करने में मदद करने की अपील की। उन्होंने गृह मंत्री से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि, हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी, चाहे वह मजदूर हो या फैक्ट्री मालिक।
IMF और विश्व बैंक की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्टों के मुताबिक देश में बैंकिंग संकट, ईंधन की भारी कमी और ऊंची महंगाई जैसी समस्याएं हैं। निजी क्षेत्र में कर्ज की वृद्धि घटी है और विदेशी निवेश (एफडीआई) की रफ्तार थम सी गई है।

आईएमएफ ने बांग्लादेश की विकास दर का जो अनुमान जताया है, वह पिछले 40 वर्षों में सबसे कम बताया जा रहा है। देश की विकास दर के 2.2 प्रतिशत से 3.6 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि, गारमेंट सेक्टर में लंबे समय तक अशांति रहने पर निर्यात, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय, तीनों पर बुरा असर पड़ेगा। फिलहाल, सबकी नजर वेतन बोर्ड की सिफारिशों और सरकार के अगले कदम पर है। अगर मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी, तो संकट और गहरा सकता है।
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