
नई दिल्ली। महंगाई, आवास संकट, पेंशन में कटौती, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, भ्रष्टाचार और युद्ध के खिलाफ यूरोप के कई देशों में जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। वीकेंड पर फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में हजारों लोग विरोध-प्रदर्शन के लिए घरों से निकले। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हालात बिगड़ते देख सरकारों को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी, जबकि कुछ जगहों पर सेना तक को तैनात करना पड़ा।
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फ्रांस में 1000 लोग हिरासत में
फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान भारी तनाव का माहौल रहा। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देशभर में लगभग 1000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। रैलियों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकार और आयोजकों के दावों में बड़ा अंतर है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, करीब 4.10 लाख लोगों ने इन रैलियों में हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों का कहना है कि यह आंकड़ा लगभग 8 लाख था।

राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे। उपद्रवियों पर नजर रखने के लिए पुलिस के हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए।
इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस की सख्त कार्रवाई की आलोचना की। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में फ्रांस के मौजूदा हालात के लिए वहां की इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
अल्बानिया में छात्रों का आक्रोश
अल्बानिया की राजधानी तिराना समेत कई शहरों में छात्रों के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब शिक्षा व्यवस्था को लेकर नाराज थे। उनकी प्रमुख मांगों में ट्यूशन फीस घटाना और शिक्षा बजट बढ़ाना शामिल रहा। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की भी मांग की।
प्रदर्शन ने जल्द ही उग्र रूप ले लिया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी। सरकारी इमारतों और बैंकों को भी निशाना बनाया गया, जबकि पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके गए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा रोधी पुलिस को आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का सहारा लेना पड़ा।
इटली में युवाओ ने निकाला मार्च
इटली के मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स और फ्लोरेंस जैसे बड़े शहरों में युवाओं ने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर मार्च निकाला। पुलिस ने आठ शहरों से 9 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 371 लोगों को अस्थायी तौर पर हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में 110 नाबालिग भी शामिल हैं।
रोम में प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह ने ऐतिहासिक कोलोसियम में जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। हिंसा की आशंका को देखते हुए मिलान के फैशन हब में दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपनी दुकानों की खिड़कियों पर सुरक्षा बोर्ड लगा दिए थे।
हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का एलान किया। उन्होंने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
स्पेन में सड़कों पर उतरे लोग
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों पेंशनभोगियों और आम नागरिकों ने मार्च निकाला। वे सार्वजनिक पेंशन प्रणाली की सुरक्षा और महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम पेंशन को न्यूनतम वेतन के बराबर करने, महिला-पुरुष पेंशन अंतर खत्म करने और पेंशन के निजीकरण पर रोक लगाने की भी मांग उठाई।

यह प्रदर्शन अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले हुआ है, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। इसके अलावा, देश में लगातार बढ़ते किराये और घरों की आसमान छूती कीमतों ने भी आम जनता में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।
पुर्तगाल में टेंट लगाकर डाला डेरा
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने आवास संकट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ मार्च किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं के लिए अब घर खरीदना या किराये पर लेना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है। मार्च खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने रॉसियो स्क्वायर में 100 से ज्यादा टेंट लगाकर डेरा डाल दिया। पुलिस ने रविवार तड़के बलपूर्वक यह जमावड़ा हटा दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग उस नए कानून को वापस लेने की है, जिससे किरायेदारों को बेदखल करना आसान हो जाएगा और नए पट्टों पर किराये की सीमा हट जाएगी। उनका आरोप है कि यह कानून आम किरायेदारों के हितों के खिलाफ है।
आंकड़े भी इस संकट की गंभीरता को बयां करते हैं। पुर्तगाल में वर्ष 2017 के बाद से घरों की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। बैंक ऑफ पुर्तगाल के अनुसार देश में करीब 3 लाख घरों की भारी कमी है।
कई देश, एक जैसा गुस्सा
अलग-अलग देशों में प्रदर्शनों के मुद्दे भले ही स्थानीय रहे हों, लेकिन इनके पीछे की नाराजगी काफी हद तक एक जैसी दिखी। कहीं महंगाई और घरों की कीमतों ने लोगों को परेशान किया, तो कहीं पेंशन, शिक्षा और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया। एक साथ कई देशों में हुए इन प्रदर्शनों से साफ है कि यूरोप के बड़े हिस्से में आम लोगों की आर्थिक और सामाजिक परेशानियां बढ़ी हैं और जनता अब सरकारों से ठोस कदम की उम्मीद कर रही है।
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