27 अक्टूबर से पहले ईरान पर टूट सकता है कहर? रिपोर्ट में बड़ा दावा, ईरान बोला- ‘चुकानी पड़ेगी कीमत’

वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं। खबर है कि, ये सैन्य कार्रवाई 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों से पहले शुरू हो सकती है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है।

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 योजना को दिया जा रहा अंतिम रूप  

रिपोर्ट में गुरुवार को ईरानी अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी गई है। लिखा गया है कि, दोनों देश ईरान पर नए सिरे से हमले की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसकी टाइमिंग इजरायली चुनावों से जोड़कर देखी जा रही है। यह भी साफ कर दें कि, यह सब रिपोर्ट के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हेगसेथ ने नेतन्याहू से की गुप्त मुलाकात

रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने यहां सैन्य अभियानों का संचालन करने वाली अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जवानों से मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार, हेगसेथ ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी गुप्त बैठक की। इन मुलाकातों ने अटकलों को और हवा दे दी है।

ट्रंप दे सकते हैं हरी झंडी

ड्रॉप साइट ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान को मंजूरी दे सकते हैं।

Tensions rise again in the Middle East

अधिकारी के मुताबिक, मध्य पूर्व में सैन्य संसाधन भेजे जाने की यही प्रमुख वजह है। उसने कहा कि, सेंट्रल कमांड बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने के लिए सभी जरूरी तैयारियां कर रहा है। हालांकि, इसी अधिकारी ने इजरायली चुनावों से पहले हमला शुरू होने को लेकर आशंका भी जताई।

बढ़ रहा है अमेरिकी सेना का जमावड़ा

रिपोर्ट के अनुसार, एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। इनके साथ करीब 10 हजार अतिरिक्त नौसैनिक और मरीन भी भेजे जा रहे हैं। अरब सागर में पहले से ही अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट मौजूद हैं। इस सैन्य जमावड़े को किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

व्हाइट हाउस का इनकार

वहीं व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने ड्रॉप साइट से कहा कि, अमेरिका मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं।

ईरान की चेतावनी, चुकानी पड़ेगी कीमत

ईरान ने भी साफ शब्दों में पलटवार की धमकी दी है। ईरान के सिक्योरिटी चीफ मोहसिन रेजाई ने कहा कि, अगर अमेरिका और इजरायल हमला करते हैं, तो उन्हें करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने ड्रॉप साइट से कहा कि, तेहरान के पास पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता है।

रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि संघर्ष शुरू होने पर केबल, डेटा सेंटर और एआई सुविधाएं भी निशाने पर आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सभी को समझ लेना चाहिए कि ईरान के खिलाफ उठाए गए किसी भी कदम की कीमत चुकानी पड़ती है।

 नया नहीं है टकराव

ईरान के साथ मौजूदा टकराव नया नहीं है। अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू किया था। जून में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्षविराम का समझौता हुआ, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने 8 जुलाई की रात फिर बड़े हमले शुरू कर दिए।

इजरायली मीडिया में भी इसी तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू ने ट्रंप से इजरायली चुनाव और उसके एक हफ्ते बाद होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ लड़ाई फिर शुरू करने का आग्रह किया था। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इससे इनकार किया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसा कदम राजनीतिक मकसद से उठाया गया माना जाएगा।
इसी रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली सेना प्रमुख एयाल जमीर ने अमेरिकी समकक्षों को बताया कि, ऐसे हमले से इजरायल में चुनाव टालने पड़ सकते हैं। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 8 अक्टूबर को कह चुके हैं कि, अमेरिका कांग्रेस चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा, लेकिन 13 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि ईरान को लेकर जल्द फैसला लिया जाएगा।

होर्मुज में भी बढ़ा खतरा

समुद्री मोर्चे पर भी हालात नाजुक बने हुए हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम एंड ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के मुताबिक, सितंबर में हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान कम से कम 13 जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय निशाना बना चुका है। यह रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

Tensions rise again in the Middle East

फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। एक तरफ सैन्य तैनाती और अधिकारियों के हवाले से आ रही खबरें बड़ी कार्रवाई की आशंका जता रही हैं, तो दूसरी तरफ व्हाइट हाउस इनकार कर रहा है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी देकर साफ कर दिया है कि किसी भी हमले का नतीजा सिर्फ एकतरफा नहीं होगा। अब सबकी निगाहें इजरायली चुनाव की तारीख और ट्रंप के अगले फैसले पर टिकी हैं।

 

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