
वॉशिंगटन। अमेरिका में रहकर भारत विरोधी गतिविधियां चलाने वाले खालिस्तानी समर्थक चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया है कि उसकी जान को खतरा है। उसने एक अमेरिकी मीडिया संस्थान से कहा, अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने उसे इस बारे में आगाह किया है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा का ऐलान किया है। उधर पन्नू का संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) 18 अक्टूबर को कनाडा के एडमंटन में कथित जनमत संग्रह कराने की तैयारी में है।
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न्यूयॉर्क के घर पहुंचे एफबीआई एजेंट
मीडिया को दिए अपने बयान में पन्नू ने कहा कि, गुरुवार को एफबीआई के एजेंट न्यूयॉर्क स्थित उसके घर पहुंचे। उसके मुताबिक एजेंटों ने उसे बताया कि, उसकी जान को खतरा है। पन्नू का कहना है कि, एजेंट खतरे से जुड़े कुछ सुरागों की जांच कर रहे हैं।

पन्नू के अनुसार यह खतरा उसकी संभावित कनाडा यात्रा से जुड़ा है, जहां उसे जनमत संग्रह कार्यक्रम में हिस्सा लेना है। हालांकि अभी तक इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न्यूज चैनल को बताया कि, उसने इस मामले में एफबीआई से टिप्पणी मांगी थी, लेकिन एजेंसी की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
मोदी के कनाडा दौरे के ऐलान के बीच आया बयान
पन्नू का यह बयान राजनयिक लिहाज से एक ऐसे संवेदनशील समय पर आया है, जब भारत ने प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा की घोषणा की है। आपको बता दें कि, खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर भारत और कनाडा के रिश्ते बीते कुछ वर्षों में काफी तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के दौरे की घोषणा के बाद पन्नू की ओर से खतरे की बात उठाना चर्चा का विषय बन गया है।
भारत सरकार पन्नू को लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मानती रही है। वह भारत में वांटेड है और उसका संगठन सिख फॉर जस्टिस भारत में प्रतिबंधित है।
18 अक्टूबर को जनमत संग्रह
एसएफजे ने 18 अक्टूबर को कनाडा के एडमंटन में एक तथाकथित जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना बनाई है। इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि, क्या भारत के पंजाब राज्य को स्वतंत्र घोषित कर उसका नाम बदलकर खालिस्तान कर दिया जाना चाहिए। मतदान के लिए सिख समुदाय के लोगों को आमंत्रित किया गया है।
संगठन इस तरह के आयोजन पहले भी कई देशों में कर चुका है। भारत इन आयोजनों को खारिज करता रहा है और इन्हें अलगाववादी एजेंडे को हवा देने की कोशिश मानता है। भारत का यह भी कहना रहा है कि विदेशी धरती से ऐसी गतिविधियों को जगह मिलना चिंता का विषय है।
अपने बयान में पन्नू ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि वह हत्या की साजिश से बच पाएगा या नहीं। उसके शब्दों में, असली सवाल यह है कि क्या सिखों के आत्मनिर्णय के अधिकार को जान से मारने की धमकियों के जरिए रोका जा सकता है। उसने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। पन्नू ने इस बयान के जरिए खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जिसकी आवाज दबाने के प्रयास हो रहे हैं। हालांकि भारत की ओर से उसके दावों और गतिविधियों को लेकर रुख पहले से स्पष्ट है।
2023 की साजिश और निखिल गुप्ता का मामला
पन्नू की हत्या की साजिश का मामला पहले से अमेरिका की न्यायिक प्रक्रिया में है। अमेरिकी अधिकारियों ने वर्ष 2023 में दावा किया था कि उन्होंने पन्नू की हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया था। इस मामले में एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता और पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकास यादव पर पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। निखिल गुप्ता इस समय अमेरिकी जेल में बंद है। रिपोर्ट के अनुसार उसने इसी वर्ष फरवरी में पैसे देकर हत्या कराने की साजिश रचने के आरोपों को स्वीकार कर लिया था।
क्यों अहम है यह घटनाक्रम
पन्नू का ताजा दावा कई कारणों से अहम माना जा रहा है। पहला, यह प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा की घोषणा के तुरंत बाद आया है। दूसरा, एसएफजे का जनमत संग्रह आयोजन 18 अक्टूबर को प्रस्तावित है और उससे पहले सुरक्षा का मुद्दा उठाकर पन्नू ने इस कार्यक्रम को सुर्खियों में ला दिया है। तीसरा, 2023 की साजिश का मामला अमेरिकी अदालत में अब भी चर्चा में है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में अब तक सिर्फ पन्नू का बयान ही सामने आया है। एफबीआई ने न तो चेतावनी की पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। ऐसे में खतरे की प्रकृति और उसके स्रोत को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
एफबीआई ने नहीं की अधिकारिक टिप्पणी
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि एफबीआई इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी करती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि कनाडा सरकार एडमंटन में प्रस्तावित आयोजन को लेकर क्या रुख अपनाती है और प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कैसी बातचीत होती है।
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