
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति में शुक्रवार को भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर चल रही बैठक में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके बाद भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ यानी जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दो टूक कहा कि नई दिल्ली परमाणु ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाली नहीं है। भारत ने साफ किया कि परमाणु हथियारों को शासन चलाने के औजार की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और उसकी क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं।
इसे भी पढ़ें- एशियन गेम्स: टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर जीता गोल्ड
जम्मू-कश्मीर अभिन्न हिस्सा
भारत का पक्ष जिनेवा में ‘कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट’ में भारत के स्थायी मिशन के सीनियर एडवाइजर अनमोल शेर सिंह बेदी ने रखा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस पर किसी तरह के सवाल की गुंजाइश नहीं है। बेदी ने यह भी कहा कि, भारत टकराव नहीं चाहता। उन्होंने चेतावनी दी कि, गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के लिए जवाबदेही तय न होने से इस इलाके में संकट बार-बार गहराते हैं। उनका इशारा सीमा पार से होने वाली गतिविधियों की ओर था।
अवैध कब्जे वाले इलाके खाली करने की मांग
भारतीय प्रतिनिधि ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया। बेदी ने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि, भारत के जिन इलाकों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किया गया है, उन्हें खाली किया जाए और वापस लौटाया जाए।’

शांति पर भारत की नीति समझाते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है और सभी के साथ शांति बनाए रखना चाहता है। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के लिए कोई जवाबदेही नहीं होती है, तो शांति शायद ही संकटों के बीच का कोई ठहराव बन पाती है।’ सरल शब्दों में, जवाबदेही के बिना शांति दो संकटों के बीच की थोड़े दिनों की राहत भर रह जाती है।
हमारी क्षमताएं बचाव के लिए
बेदी ने कहा कि भारत की क्षमताएं बचाव के मकसद से हैं और किसी देश के खिलाफ नहीं हैं। इन्हें देश की सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक तैयार किया गया है। तनाव बढ़ने को लेकर जताई गई चिंताओं पर उन्होंने कहा, ‘हमने तनाव बढ़ने को लेकर चिंताएं सुनीं। ये जायज चिंताएं हैं। हालांकि, समय के साथ किए गए कामों से ही इनका सही अंदाजा लगाया जा सकता है। परमाणु हथियारों को शासन-संचालन के आम औजारों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।’
परमाणु धमकी से बढ़ता है जोखिम
भारत ने अपने जवाब में सबसे ज्यादा जोर परमाणु धमकियों के इस्तेमाल पर दिया। बेदी ने कहा कि, जो रुख आतंकी या अप्रत्यक्ष गतिविधियों के नतीजों को छिपाने या सीमित करने के लिए परमाणु धमकी का सहारा लेता है, वह तनाव के जोखिम को बढ़ाता है, संयम की संभावना को नहीं।
भारत का तर्क है कि, अगर कोई देश परमाणु हथियारों का डर दिखाकर अपनी हरकतों की जवाबदेही से बचना चाहे, तो इससे क्षेत्र में स्थिरता नहीं आती। उलटे हर संकट पहले से ज्यादा खतरनाक हो जाता है। ऐसी धमकियां न तनाव घटाती हैं, न आपसी भरोसा बनाती हैं।
क्या है ‘राइट ऑफ रिप्लाई’
संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में जब कोई सदस्य देश किसी दूसरे देश का नाम लेकर या उसके हितों पर टिप्पणी करता है, तो प्रभावित देश को जवाब देने का मौका मिलता है। इसी व्यवस्था को ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ कहा जाता है। यह अधिकार देशों को अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब उसी मंच पर देने की सुविधा देता है, ताकि रिकॉर्ड में सिर्फ एक पक्ष की बात दर्ज न रहे।
महासभा की पहली समिति निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच मानी जाती है। परमाणु हथियारों, हथियारों की होड़ और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषयों पर सदस्य देश यहीं अपना रुख रखते हैं। भारत ने इसी मंच पर कश्मीर के मुद्दे को उठाए जाने का जवाब दिया।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताई ये तीन बातें
इस बयान के जरिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तीन बातें साफ तौर पर बताईं।
- पहली, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- दूसरी, भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन आतंकवाद और उकसावे वाली कार्रवाइयों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
- तीसरी, परमाणु हथियारों को डराने-धमकाने या ब्लैकमेल करने का जरिया बनाना किसी भी जिम्मेदार देश का रवैया नहीं हो सकता।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में साफ शब्दों में कहा कि परमाणु हथियारों को गीदड़ भभकी या ब्लैकमेलिंग का औजार बनाना बंद होना चाहिए। उसके मुताबिक ऐसी धमकियों से तनाव घटता नहीं, बल्कि और बढ़ता है। भारतीय पक्ष का कहना है कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब हर देश अपने कदमों की जिम्मेदारी ले और परमाणु हथियारों को सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित रखे।
इसे भी पढ़ें- पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान पहुंचेगा भारत, ईरान ने पूरा किया 730 किमी लंबा रेल लिंक



