रूसी सेना में फंसे 69 भारतीयों की वापसी कब? जयशंकर-लावरोव मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

  • रूसी सेना में फंसे 69 भारतीयों की वापसी पर बातचीत जारी, विदेश मंत्रालय बोला: हर स्तर पर उठाते रहेंगे मुद्दा

  • जयशंकर-लावरोव मुलाकात में यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा, 259 में से 139 भारतीय लौटे

नई दिल्ली। रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीय नागरिकों की वापसी का मामला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत इस मुद्दे को रूस के साथ हर स्तर पर उठाता रहेगा। मंत्रालय ने बताया कि, रूसी सेना में भर्ती करीब 259 भारतीयों में से 139 को मुक्त कराकर स्वदेश लाया जा चुका है। बाकी बचे 69 भारतीयों की वापसी को लेकर बातचीत जारी है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये जानकारी दी। उन्होंने यह बात ऐसे समय बताई जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अमेरिका के अटलांटा में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की थी।

अटलांटा में हुई अहम बैठक

जायसवाल ने बताया कि, जयशंकर और लावरोव के बीच हाल के महीनों में कई बार मुलाकातें हुई हैं। अटलांटा की बैठक में दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े यूक्रेन के हालात पर चर्चा की। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय महत्व के कई अन्य मुद्दे भी बातचीत में शामिल रहे।

Jaishankar-Lavrov

विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात का ब्योरा जी-20 सम्मेलन के कुछ दिन बाद साझा किया। यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों को लेकर वैश्विक चिंता के बीच दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों की यह बातचीत अहम मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री स्तर पर भी उठा मामला

प्रवक्ता ने बताया कि, रूसी सेना में फंसे भारतीयों का मुद्दा केवल विदेश मंत्री स्तर तक सीमित नहीं रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस विषय पर बात की थी। यह चर्चा पहले बिश्केक में और उसके बाद नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान हुई।

जायसवाल के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर स्वयं भी मॉस्को जा चुके हैं और वहां लावरोव के साथ इस मामले पर विस्तार से बात कर चुके हैं। इसी दौरान वे यूक्रेन की राजधानी कीव भी गए थे। यानी भारत ने संघर्ष के दोनों पक्षों के साथ संवाद का रास्ता खुला रखा है।

 भारत अपनी राय स्पष्ट कर चुका है

रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति स्थापित करने के लिए भारत की भूमिका या उसके विचारों के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी राय पहले ही स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने बताया कि भारत ने अपने सुझाव यूक्रेन और रूस, दोनों पक्षों के साथ साझा किए हैं। जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन की टिप्पणियां सबके सामने हैं और यूक्रेन के विदेश मंत्री की प्रतिक्रियाएं भी सुनी जा चुकी हैं। उन्होंने इससे आगे किसी नई पहल या प्रस्ताव का ब्योरा नहीं दिया।

259 भारतीय भर्ती हुए थे रूसी सेना में

रूसी सेना में फंसे भारतीयों के आंकड़ों पर मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की। प्रवक्ता के मुताबिक, पिछले महीने मंत्रालय ने बताया था कि करीब 259 भारतीय नागरिकों की भर्ती रूसी सेना में हुई थी। इनमें से 139 को सेना से मुक्त कराकर भारत वापस लाया जा चुका है। शेष 69 की वापसी के लिए रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है।

जायसवाल ने कहा कि, भारत रूसी अधिकारियों के सामने रूस में मौजूद भारतीयों की सुरक्षित वापसी का मुद्दा लगातार उठा रहा है। भारत उन सभी भारतीय नागरिकों की रिहाई की मांग उठाता रहेगा, जो अब भी रूस के पास हैं।

रूसी नागरिकता पर जानकारी नहीं

मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि, उसके पास केवल भारतीय नागरिकों का रिकॉर्ड है। ऐसे में वह यह नहीं बता सकता कि रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीयों में से कितने लोगों ने रूस की नागरिकता हासिल कर ली है। यह टिप्पणी उन सवालों के जवाब में आई, जिनमें पूछा गया था कि बचे हुए लोगों की वास्तविक संख्या क्या है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम एशिया के हालात का मुद्दा भी छाया रहा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि, भारत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारत ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाएं।

मंत्रालय के अनुसार इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरक और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। भारत ने सभी पक्षों से शत्रुता समाप्त कर हालात सामान्य बनाने का आह्वान किया है।

खाड़ी की स्थिति पर यूएई से भी संवाद

पश्चिम एशिया संकट के बीच एक सप्ताह में दूसरी बार यूएई के विदेश मंत्री और जयशंकर के बीच बातचीत हुई है। इसमें भारत ने खाड़ी की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। इससे संकेत मिलता है कि, भारत क्षेत्र के प्रमुख देशों से लगातार संपर्क में है।

क्यों अहम है मुद्दा

रूसी सेना में फंसे भारतीयों का मामला कई परिवारों के लिए गहरी चिंता का विषय बना हुआ है। 139 लोगों की वापसी से राहत मिली है, लेकिन 69 भारतीयों के परिजन अब भी अपनों की घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि, कूटनीतिक स्तर पर प्रयास रुके नहीं हैं और प्रधानमंत्री से लेकर विदेश मंत्री तक, हर स्तर पर यह मुद्दा उठाया जा रहा है।

फिलहाल मंत्रालय की ओर से बाकी भारतीयों की वापसी की कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है। उसने सिर्फ इतना भरोसा दिलाया है कि बातचीत जारी है और भारत इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाता रहेगा।

 

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