किसानों ने फिर दिखाई सख्ती, बोले- सरकार जिद्दी है तो हम भी नहीं हटेंगे पीछे

कृषि बिल के खिलाफ आंदोलित किसानों और सरकार के बीच चर्चा का दौर अब खत्म हो चुका है। इस बीच सरकार की तरफ से किसानों को लिखित में एक प्रस्ताव भेजा गया है। भेजे गए प्रस्वाव में सरकार ने कृषि कानूनों में कुछ संशोधन करने का सुझाव किसानों को भेजा है। लेकिन इस बीच खबर ये भी है कि सुबह तक नरम रुख दिखाने वाले किसान अब फिर से सख्ती अपना रहे हैं। किसानों का कहना है कि वो सरकार का प्रस्ताव जरूर देखेंगे, लेकिन उनकी मांग सिर्फ तीनों कानूनों को हटाने की है।

वहीं खबर ये भी है कि सरकार की तरफ से किसानों के पास भेजे गए प्रस्ताव को लेकर दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर इस वक्त 40 किसान संगठनों की बैठक जारी है, इनमें से 13 किसान बीते मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मीटिंग में मौजूद थे। राकेश टिकैत, मंजीत राय किसानों को बैठक की जानकारी देंगे, सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। यहां योगेंद्र यादव और मेधा पाटकर भी मौजूद हैं।

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानून का मसला किसानों की शान से जुड़ा है, ऐसे में वो इससे पीछे नहीं हटेंगे। सरकार कानून में कुछ बदलाव सुझा रही है, लेकिन हमारी मांग कानून को वापस लेने की है। राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार जिद पर अड़ी है तो हम भी अड़े हैं, कानून वापस ही होगा। प्रस्ताव मिलने से पहले राकेश टिकैत ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि किसानों और सरकार में बात बन जाएगी, और प्रस्ताव मिलने के बाद शाम तक कुछ नतीजा निकलेगा, हालांकि अब उनका रुख बदला हुआ दिख रहा है।

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वहीं केंद्र द्वारा प्रस्ताव मिलने पर किसान नेता राजा राम सिंह ने भी कहा कि सरकार ने कुछ संशोधन सुझाए हैं जिनपर किसान चर्चा करेंगे। लेकिन उन संशोधनों में जमीन का मसला, आवश्यक वस्तु एक्ट को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया है। सरकार इन कानूनों के साथ आगे बढ़ना चाहती है और राज्यों के हाथों से सभी शक्ति अपने पास लेना चाहती है।

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सरकार की ओर से सुझाए गए कुछ ऐसे संशोधन:

• APMC एक्ट में बदलाव, फ्री मंडी में भी समान टैक्स, पहले फ्री मंडी में टैक्स नहीं था.

• विवाद होने पर स्थानीय कोर्ट जाने का भरोसा, पहले सिर्फ SDM के पास जा सकते थे.

• फ्री ट्रेडर्स के लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा, पहले सिर्फ पैन कार्ड से काम चल सकता था.

• कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में बदलाव, किसान की जमीन की सुरक्षा का भरोसा.

• MSP पर सरकार लिखित गारंटी देने को तैयार.

• पराली जलाने के मसले पर सख्त कानून में नरमी.

• आंदोलन के दौरान जिन किसान नेताओं पर केस दर्ज हुआ है, उनकी वापसी.

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आपको बता दें कि किसानों की ओर से लगातार कृषि कानूनों की वापसी की मांग की गई, MSP पर लिखित में गारंटी देने को कहा गया और उसे कानून का हिस्सा बनाने की मांग की गई। हालांकि, सरकार अपनी ओर से साफ कर चुकी है कि कानून में संशोधन हो सकता है लेकिन वापस नहीं हो सकते हैं।

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