साल का पहला शुक्रवार आज: करें ये दुर्लभ उपाय, 2026 में कभी नहीं होगी धन की कमी

नए साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इस साल का पहला शुक्रवार 2 जनवरी को पड़ रहा है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि साल के पहले शुक्रवार को किए गए कुछ खास और दुर्लभ उपाय पूरे वर्ष आर्थिक परेशानियों से बचाते हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि बनाए रखते हैं।

अगर आप चाहते हैं कि 2026 में धन की आवक बनी रहे और तिजोरी कभी खाली न हो, तो साल के पहले शुक्रवार पर ये आसान लेकिन प्रभावशाली उपाय जरूर करें।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 5 महाउपाय

1. कमल का फूल और सफेद मिठाई का भोग
मां लक्ष्मी को कमल का फूल और सफेद रंग बेहद प्रिय है। साल के पहले शुक्रवार को स्नान के बाद लक्ष्मी नारायण मंदिर जाएं या घर में ही मां लक्ष्मी को मिश्री, माखन या खीर का भोग लगाएं। साथ में कमल का फूल अर्पित करें। इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

2. मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं
शुक्रवार की शाम घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाएं। दीपक में थोड़ी केसर या एक इलायची डाल दें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी का घर में वास होता है।

3. श्रीयंत्र की स्थापना और अभिषेक
अगर घर में श्रीयंत्र नहीं है, तो साल के पहले शुक्रवार को इसे जरूर स्थापित करें। पहले से मौजूद श्रीयंत्र का दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। श्रीयंत्र को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, जिसकी नियमित पूजा से दरिद्रता दूर होती है।

4. कनकधारा स्तोत्र का पाठ
धन संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए कनकधारा स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है। यदि पाठ न कर पाएं, तो शांत मन से इसे सुन सकते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में धन की कभी कमी नहीं होती।

5. कन्याओं को दान करें
शुक्रवार के दिन 7 या 11 कन्याओं को सफेद मिठाई खिलाएं। कन्याओं को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। उनके आशीर्वाद से घर में धन और खुशहाली बढ़ती है।

शुक्रवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां

  • शुक्रवार के दिन किसी को पैसा उधार न दें।
  • इस दिन महिला, कन्या या बुजुर्ग का अपमान न करें।
  • शाम के समय घर में झाड़ू लगाने से बचें, क्योंकि मां लक्ष्मी स्वच्छ स्थान पर ही वास करती हैं।

पूजा मंत्र

“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥”

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