\n\n\n\n\n \n

19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, निकलेगा बुंदेलखंड जल संकट का हल

  • योगी सरकार का आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप और नेचुरल एसटीपी का कार्य पूर्ण

  • जलाशय से खेतों तक पहुंचेगा जल, बूंद-बूंद के सदुपयोग का मॉडल तैयार

लखनऊ। बुंदेलखंड में पानी की कमी और सीमित जल संसाधनों के बीच योगी सरकार जल संरक्षण, सिंचाई क्षमता और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट को गति दे रही है। झांसी के विकासखंड बड़ागांव के ग्राम गंगावली में लगभग 19.1 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट में कई अहम काम पूरे हो चुके हैं।

जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप की स्थापना, नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप व इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल आधारित भवनों सहित कई प्रमुख कार्य संपन्न हो चुके हैं। अगले चरण में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीनहाउस, सिंचाई ऑटोमेशन और किसान प्रशिक्षण जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इसे भी पढ़ें- 70 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का हुआ कायाकल्प, वाराणसी में बोले सीएम योगी- ‘पहले होता था बड़ा खेल’

जल संरक्षण से लेकर आधुनिक खेती तक एक ही मॉडल

नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ राजेश कुमार प्रजापति के मुताबिक योगी सरकार की इस पहल का मकसद बुंदेलखंड की स्थानीय जल उपलब्धता और खेती की परिस्थितियों के हिसाब से ऐसा मॉडल बनाना है, जिससे उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक ढंग से उपयोग हो सके।

CM Yogi

परियोजना में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप-स्प्रिंकलर, प्राकृतिक एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मकसद है किसानों को सीमित पानी में बेहतर सिंचाई और खेती का व्यावहारिक मॉडल देना।

पूरा हुआ नेचुरल एसटीपी का निर्माण 

गंगावली में परियोजना की प्रगति अब धरातल पर नजर आने लगी है। जलाशय क्षेत्र की डिमार्केशन और फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग भी संपन्न हो गई है। पीयूएफ पैनल आधारित भवनों का निर्माण पूरा होने के साथ वहां सीसीटीवी की व्यवस्था भी कर दी गई है। इसके अलावा सोलर पंप भी स्थापित किया जा चुका है। नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और जलाशय में इंटेक वेल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। गांव से निकलने वाले अपशिष्ट जल को जलाशय में जाने से रोकने और उसके शोधन के लिए नेचुरल एसटीपी बनाया गया है। जलाशय के आसपास सड़क निर्माण का काम फिलहाल जारी है।

दिखेगी आधुनिक खेती की झलक

मिनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक कृषि गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाना प्रस्तावित है। अगले चरण में ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को स्थापित कर सक्रिय किया जाएगा। साथ ही ग्रीनहाउस, टनल, पाइपलाइन और सिंचाई ऑटोमेशन-एससीएडीए व्यवस्था को भी क्रियाशील किया जाएगा।

इससे किसानों को यह समझने का मौका मिलेगा कि फसल की जरूरत के हिसाब से कितना पानी देना चाहिए और कम पानी में बेहतर पैदावार कैसे पाई जा सकती है। परियोजना में पानी की खपत, सिंचाई क्षमता, फसल उत्पादन, लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों पर तकनीकों के नतीजों का आकलन भी किया जाएगा।

किसानों को मिलेगी व्यावहारिक ट्रेनिंग

परियोजना में सिर्फ ढांचागत निर्माण ही नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 72 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। हर सत्र में लगभग 100 किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वाटर बजटिंग, फर्टिगेशन, क्रॉप प्लानिंग, सिंचाई संचालन और कृषि मशीनरी के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान उपलब्ध जल के अनुसार फसल क्षेत्र निर्धारित करने और सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम बनेंगे।

24 गांवों तक फैलेगा गंगावली मॉडल

डॉ. राजेश कुमार प्रजापति के अनुसार गंगावली में तैयार हो रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे बड़े क्षेत्र में लागू करने की तैयारी भी चल रही है। अगले चरण में बड़ागांव विकासखंड में पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में विस्तृत प्रदर्शनात्मक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे गंगावली में सफल साबित हुई तकनीकों को अन्य गांवों तक पहुंचाने की राह खुलेगी।

31 दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य

भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियांता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम के अनुसार परियोजना के वर्तमान निर्माण एवं क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके बाद ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के साथ परियोजना को जून 2029 तक संचालित करने का प्रस्ताव है। वहीं विस्तारित डेमोंस्ट्रेशन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2026 से मई 2029 तक चलाने का प्रस्ताव है।

 

इसे भी पढ़ें- चुनाव से पहले एक्शन मोड में योगी सरकार, विरोधियों को चित करने के लिए करेगी’BSP’ फार्मूले पर काम

Related Articles

Back to top button