श्रीसंत का गंभीर पर सीधा हमला, टीम इंडिया को ‘कोच नहीं, मेंटॉर चाहिए’

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज एस श्रीसंत ने वर्तमान टीम और कोच को लेकर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। दरअसल, उन्होंने साफ़ कहा है कि, भारतीय क्रिकेट टीम को इस समय कोच की नहीं बल्कि एमएस धोनी जैसे मेंटर की जरूरत है।

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श्री संत ये बात एक न्यूज चैनल से हुई बातचीत के दौरान कही। अब उनकी ये टिप्पणी क्रिकेट जगत की मुख्य सुर्खी बन गई है। इसकी मुख्य वजह ये है कि, गौतम गंभीर इस समय टीम इंडिया के मुख्य कोच हैं और संत का ये बयान सीधे तौर पर उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। संत ये बात चैनल द्वारा किये गये एक सवाल के जवाब में कही।

टीवी शो के डायरेक्टर से की तुलना

आपको बता दें कि, बातचीत के दौरान जब श्रीसंत से पूछा गया कि, आखिर भारतीय टीम घरेलू मैदान पर भी जीत क्यों नहीं पा रही, और टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका दोनों के खिलाफ क्लीन स्वीप जैसी शर्मनाक स्थिति कैसे बन गई, तो श्रीसंत इस सवाल का जवाब दें कि बजाय सीधा सवाल किया, उस वक्त कोच की भूमिका में कौन था। यह वही दौर है जब भारत की लगातार दो घरेलू टेस्ट सीरीज में करारी हार के बाद टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2027 के फाइनल की दौड़ से लगभग बाहर होती दिख रही है, और इसी वजह से गंभीर के कोचिंग कार्यकाल पर सवाल उठने लगे हैं।

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श्रीसंत ने इसकी तुलना एक टीवी शो की टीम से करते हुए समझाया कि, जिस तरह किसी प्रोडक्शन में डायरेक्टर की भूमिका सबसे अहम होती है, ठीक वैसे ही कोच की भूमिका टीम में होती है। उनका तर्क है कि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस स्तर पर खिलाड़ियों को कोचिंग नहीं, बल्कि एक अनुभवी मेंटॉर के मार्गदर्शन की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि, वह किसी भी कोच के व्यक्तिगत रूप से खिलाफ नहीं हैं, बस यह मानते हैं कि, सीनियर इंटरनेशनल टीम को चलाने का तरीका अलग होना चाहिए।

कोचिंग के तरीके पर उठाएं सवाल

श्रीसंत की सबसे तीखी आलोचना गंभीर की कोचिंग पद्धति को लेकर रही। उनका मानना है कि, गंभीर की मौजूदगी में खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव बना रहता है, जो लंबे समय में टीम के प्रदर्शन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि, एक अच्छा मेंटॉर वही होता है जो खिलाड़ी पर परिणाम को लेकर बोझ नहीं डालता, अगर कोई खिलाड़ी लगातार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहा, तो उसे शांति से टीम से बाहर कर देना ही समझदारी है, न कि उस पर दबाव बढ़ाना।

श्रीसंत के मुताबिक, धोनी की कप्तानी की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि, वह खिलाड़ियों के मन में आत्मविश्वास भरते थे, न कि डर। इसी संदर्भ में उन्होंने शिवम दुबे और अजिंक्य रहाणे का जिक्र किया। उन्होंने कहा, दोनों खिलाड़ियों का खेल धोनी की कप्तानी में सबसे ज्यादा निखर कर सामने आया था। श्रीसंत का मानना है कि, धोनी के पास वह खास टैलेंट है, जो किसी भी खिलाड़ी से बेहतरीन प्रदर्शन निकलवा सकता है और आज टीम इंडिया को भी ऐसे ही एक मेंटर की जरूरत है।

श्रेय के बंटवारे का जिक्र

श्रीसंत ने एक और अहम मुद्दा उठाया, ये मुद्दा है हाल के टी20 वर्ल्ड कप खिताब का श्रेय बंटवारा। उनका कहना है कि, जब टीम कोई बड़ा टूर्नामेंट जीतती है तो अक्सर उसकी पूरी तारीफ कोच के खाते में चली जाती है, जबकि असली मेहनत मैदान पर खिलाड़ी करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि, अगर संजू सैमसन का योगदान न होता, सूर्यकुमार यादव कप्तान के तौर पर सही समय पर फैसले न लेते, और सही मौके पर गेंदबाजी में बदलाव न किया जाता, तो क्या टीम वह खिताब जीत पाती।

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उनके अनुसार मैदान पर फैसले खिलाड़ी और कप्तान लेते हैं, कोच नहीं, इसलिए श्रेय लेने में संतुलन होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि, अगर कोई कोच आशीष नेहरा की तरह टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा रहता है, तो उसकी भूमिका सराहनीय मानी जा सकती है।

श्रीसंत ने यह भी कहा कि, कोच और खिलाड़ियों का रिश्ता भाईचारे जैसा होना चाहिए। उनके मुताबिक सिर्फ जीत के वक्त खुशी मनाना और हार के वक्त गुस्सा दिखाना सही रवैया नहीं है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि गंभीर ने बतौर खिलाड़ी देश के लिए शानदार योगदान दिया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि, बाकी सदस्य मेहनत नहीं कर रहे। उनकी राय में टीम को कोच से ज्यादा एक भरोसेमंद मेंटॉर की जरूरत है।

बीसीसीआई को सलाह

दो बार के विश्व विजेता रह चुके श्रीसंत ने बीसीसीआई को सीधी सलाह भी दे डाली। उनका सुझाव है कि, सचिन तेंदुलकर या एमएस धोनी जैसे दिग्गजों को टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार बोर्ड को ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए जिनकी ड्रेसिंग रूम में स्वाभाविक रूप से इज्जत हो, न कि ऐसे लोगों को जो पीठ पीछे राजनीति करते हों या सिर्फ कैमरे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आने के लिए कोच बने बैठे हों।

श्रीसंत का कहना है कि टीम को असल में इज्जत चाहिए, ईगो नहीं। उन्होंने एक दिलचस्प टिप्पणी भी की कि, अगर गैरी कर्स्टन जैसे कोच आज टीम के साथ होते, तो शायद भारत किसी बड़े टूर्नामेंट में हार का सामना नहीं करता। यह बयान जाहिर तौर पर मौजूदा कोचिंग सेटअप पर एक और परोक्ष कटाक्ष माना जा रहा है।

क्रिकेट जगत में छिड़ी बहस

श्रीसंत के इस बयान ने क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पारंपरिक कोच की भूमिका अब पुरानी पड़ चुकी है? क्या टीमों को अनुभवी मेंटॉर की तरफ रुख करना चाहिए? जहां एक तरफ गंभीर के समर्थक उनके खिलाड़ी और कोच, दोनों रूप में हासिल उपलब्धियों का हवाला देते हैं, वहीं श्रीसंत जैसे आलोचक हालिया घरेलू टेस्ट हार और टीम पर बढ़ते दबाव को आधार बनाकर बदलाव की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल बीसीसीआई की तरफ से इस मसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह तय है कि आने वाले दिनों में यह चर्चा और तेज होगी।

 

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