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मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ RSS का BMS, किया श्रम क़ानून का विरोध

केंद्र की सत्तारूढ़ मोदी सरकार द्वारा हाल ही में बनाए गए श्रम कानून को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध किसी और ने नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मजदूर संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने ही किया है। बुधवार को मजदूर संगठन ने सड़क पर उतरकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने इस क़ानून को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह क़ानून जल्दबाजी में लाया गया है।

मोदी सरकार पर BMS लगाया बड़ा आरोप

दरअसल, कोरोना वायरस की वजह से देश में लागू किये गए लॉकडाउन की वजह से हुई आर्थिक संकट को लेकर सरकार ने कई कदम उठाए। इसी क्रम में उन्होंने श्रम कानून भी बनाया। हालांकि यह श्रम क़ानून आरएसएस के मजदूर संगठन BMS को रास नहीं आई है। उनका आरोप है कि श्रम कानूनों में जो बदलाव लाए गए हैं, उनके लिए श्रम संगठनों की सहमति भी नहीं ली गई। इन्हें जल्दबाजी में लाया गया है।

BMS का आरोप है कि मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इस क़ानून में कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनसे ना केवल मजदूरों का हित प्रभावित होगा बल्कि उनका भविष्य भी इससे प्रभावित होगा, इसलिए इन्हें वापस ले लिया जाए। ये पहला मौका नहीं है कि BMS ने यह मुद्दा उठाया है। इसके पहले आरएसएस के सर संघसंचालक मोहन भागवत के सामने भी BMS यह मुद्दा उठा चुका है।

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जिला अध्यक्ष गुरमेल सिंह बैंस ने कहा कि पहले औद्योगिक नियोजन अधिनियम में 100 से कम कर्मी होने पर कंपनियों को ले ऑफ छंटनी और कारखाना बंदी के लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं थी। लेकिन अब ये संख्या 300 कर दी गई है। जिससे कुछ भारी उद्योगों को छोड़कर बाकी कर्मचारी इससे प्रभावित होंगे। इससे लोगों की नौकरी भी असुरक्षित हो जाएगी।