पीएमओ का नया पता ‘सेवा तीर्थ’, अब छत के नीचे आए PMO, NSCS और कैबिनेट सचिवालय

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 13 फरवरी 2026 को ‘सेवा तीर्थ’ नाम के एक नए परिसर का उद्घाटन किया, जो अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का नया पता बन गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का भी लोकार्पण किया। यह तारीख बेहद प्रतीकात्मक महत्व रखती है, क्योंकि आज से ठीक 95 वर्ष पहले यानी 13 फरवरी 1931 को ब्रिटिश शासनकाल में नई दिल्ली को भारत की राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से उद्घाटित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने दोपहर करीब 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ नाम का अनावरण किया, जहां देवनागरी लिपि में नाम अंकित प्लाक को उद्घाटित किया गया।

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एक 100 रुपये का स्मारक सिक्का भी जारी किया

PMO

प्लाक के नीचे नारा ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक भगवान के समान है) लिखा है, जो सेवा और नागरिक-केंद्रित शासन की भावना को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने परिसर में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान एक 100 रुपये का स्मारक सिक्का भी जारी किया गया।

तीन प्रमुख संस्थाओं को एक छत के नीचे लाएगा ‘सेवा तीर्थ’ 

 सेवा का पवित्र स्थल ‘सेवा तीर्थ’ नाम का अर्थ ‘सेवा का तीर्थस्थल’ है, जो शासन को सेवा भावना पर आधारित बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह परिसर तीन प्रमुख संस्थाओं को एक छत के नीचे लाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय। पहले ये कार्यालय अलग-अलग भवनों में फैले हुए थे, जैसे पीएमओ साउथ ब्लॉक में स्थित था।

 

अब 78 वर्ष बाद पीएमओ साउथ ब्लॉक से स्थानांतरित होकर ‘सेवा तीर्थ’ में आ गया है, जो दारा शिकोह रोड पर स्थित है। यह बदलाव भारत की प्रशासनिक संरचना में एक परिवर्तनकारी कदम है। सरकार के अनुसार, इससे प्रशासनिक समन्वय बढ़ेगा, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, कार्य दक्षता में सुधार आएगा और नागरिक-केंद्रित शासन मजबूत होगा। पीएमओ के बयान में इसे ‘आधुनिक, कुशल, सुलभ और सेवा-उन्मुख शासन व्यवस्था’ की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है।

कर्तव्य भवन-1 और  2 प्रमुख मंत्रालयों का नया केंद्र

कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थानांतरित हो गए हैं। इनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय आदि शामिल हैं।

साउथ ब्लॉक को बनाया जायेगा राष्ट्रीय संग्रहालय

दशकों से नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसे पुराने भवनों में बिखरे दफ्तरों से समन्वय की चुनौतियां, उच्च रखरखाव लागत और कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं बनी रहती थीं। नए समेकित परिसर को इस तरह से बनाया गया है कि, इस तरह की समस्या नहीं आएगी।  चरणबद्ध तरीके से इन ऐतिहासिक भवनों से मंत्रालयों का स्थानांतरण जारी है। भविष्य में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय में बदलने की योजना है, जिसे विश्व के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल करने का लक्ष्य है।

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1911 में रखी गई थी नई दिल्ली की आधारशिला

नई दिल्ली की आधारशिला 1911 में दिल्ली दरबार के दौरान किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी ने रखी थी, जब राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित हुई थी। उस वक्त लगभग दो दशकों के निर्माण के बाद 13 फरवरी 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया था। रायसीना हिल परिसर ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर की डिजाइन का नतीजा है, जिसमें राष्ट्रपति भवन (पूर्व वायसराय हाउस), नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक शामिल हैं।

ये इमारतें आज भी विश्व की प्रमुख राजधानियों से मुकाबला करती हैं। स्वतंत्रता के बाद ये भवन भारत की सत्ता के केंद्र बने रहे, लेकिन अब 95 वर्ष बाद उसी तारीख पर ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनों का उद्घाटन औपनिवेशिक ढांचे से आधुनिक, स्वदेशी और सेवा-उन्मुख शासन की ओर संक्रमण का प्रतीक है।

इस सुविधाओं से लैस है ‘सेवा तीर्थ’

‘सेवा तीर्थ’ को डिजिटल, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल और कर्तव्य भवन 4-स्टार जीआरआईएचए (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट) के मानकों के हिसाब से बनाया गया है। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और उच्च-प्रदर्शन वाली संरचना शामिल है। डिजिटल एकीकरण, केंद्रीकृत स्वागत प्रणाली, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली से लैस हैं। ये सुविधाएं सहयोग बढ़ाएंगी, दक्षता सुनिश्चित करेंगी और नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करेंगी।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा

यह उद्घाटन 2019 में शुरू हुई सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये है और 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। परियोजना में नया संसद भवन (2023 में उद्घाटित), कॉमन सेंट्रल सचिवालय (कर्तव्य भवन श्रृंखला), कर्तव्य पथ (पूर्व राजपथ) का पुनर्विकास, नया प्रधानमंत्री आवास, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव आदि शामिल हैं। परियोजना का उद्देश्य राजधानी के केंद्र में एक समेकित, आधुनिक और नागरिक-उन्मुख प्रशासनिक क्षेत्र बनाना है।

यह न केवल भौतिक ढांचे को अपग्रेड करती है, बल्कि शासन की सोच को बदलती है, जहां सत्ता का केंद्र सेवा और नागरिक कल्याण पर आधारित है।

पीएम बोले-आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है ‘सेवा तीर्थ’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ को भारत की सेवा परंपरा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि, यह आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है और औपनिवेशिक अतीत से आगे बढ़कर मजबूत, आधुनिक और जन-केंद्रित भविष्य की ओर कदम है। यह उद्घाटन केवल इमारतों का नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का नया अध्याय है, जहां पुरानी विरासत को सम्मान देते हुए नई ऊर्जा और दक्षता के साथ आगे बढ़ा जा रहा है।

 

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