
नई दिल्ली: तंबाकू का सेवन दुनिया भर में हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है। इसके बावजूद बड़ी तादाद में लोग धूम्रपान और तंबाकू से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल बेरोकटोक जारी रखे हुए हैं। चिंता की बात यह है कि, तंबाकू से होने वाले नुकसान केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहते हैं। ये ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की भी वजह बनते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि अब यह बीमारी बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। अब ये 25 से 45 साल के युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है।
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जानलेवा होगी लापरवाही
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, मुंह में दिखने वाले कुछ सामान्य से लगने वाले संकेत कई बार कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं, लेकिन लोग अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में जानलेवा साबित होती है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि, देश में ओरल कैंसर के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके प्रति जागरूकता अभी भी बेहद कम है। यही सबसे बड़ी समस्या है। अधिकांश लोग मुंह के छालों, मसूड़ों से खून आने या मुंह के भीतर होने वाली अन्य तकलीफों को मामूली समझकर टाल देते हैं। वे सोचते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन यही सोच खतरनाक है।
मुंह के छाले को न करें नजरंदाज
डॉक्टर कहते हैं कि, अगर कोई छाला दो सप्ताह यानी 14 दिनों से अधिक समय तक ठीक नहीं होता, तो उसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। ऐसे लक्षण ओरल कैंसर से जुड़े हो सकते हैं और समय पर जांच न होने पर स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती है।
धूम्रपान, तंबाकू चबाना, वेपिंग, शराब का अत्यधिक सेवन और खराब मौखिक स्वास्थ्य, ये सभी मिलकर ओरल कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। आधुनिक जीवनशैली में वेपिंग का चलन युवाओं में तेजी से बढ़ा है और यह नई लेकिन बेहद खतरनाक आदत ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों में एक बड़ा कारण बन रही है।
ये हैं लक्षण
मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना, जो साफ न हों, चबाने में दर्द महसूस होना, मुंह के किसी हिस्से में गांठ या सूजन महसूस होना, दांतों का बिना किसी कारण ढीला पड़ जाना, बोलने या खाना निगलने में परेशानी होना, लगातार मुंह से दुर्गंध आना जो ब्रश करने के बाद भी न जाए और मुंह के किसी हिस्से में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होना। अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो तो बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और जांच करानी चाहिए।
जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, पान-मसाला खाते हैं या वेपिंग करते हैं, उनमें ये लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं। ऐसे लोगों को अपने मुंह की नियमित जांच कराते रहना चाहिए।
हर छाला नहीं होता कैंसर
यह एक बेहद जरूरी सवाल है जो अक्सर लोगों के मन में आता है। वह है क्या हर मुंह का छाला कैंसर होता है? तो हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, हर मुंह का छाला कैंसर नहीं होता। सामान्य छाले आमतौर पर तीन से चार दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं और उनमें ज्यादा तकलीफ भी नहीं होती, लेकिन अगर छाला लगातार बढ़ रहा हो, तेज दर्द दे रहा हो, आसानी से खून निकल रहा हो या खाने-पीने और बोलने में दिक्कत पैदा कर रहा हो, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। यदि उसके साथ मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे भी दिखाई दें, तो जांच में एक दिन की भी देरी नहीं करनी चाहिए।

यह जानकारी बेहद चिंताजनक है। पहले ओरल कैंसर मुख्य रूप से 50 से 75 वर्ष की आयु के लोगों में देखा जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर बड़ी तेजी से बदली है। अब 25 से 45 वर्ष की उम्र के युवा, जो धूम्रपान करते हैं या वेपिंग की लत में पड़ गए हैं, उनमें भी ओरल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं।
वेपिंग भी सुरक्षित नहीं
वेपिंग को अक्सर सिगरेट का सुरक्षित विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भी उतना ही खतरनाक मानते हैं। वेपिंग में मौजूद रसायन मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और धीरे-धीरे कैंसर का कारण बन सकते हैं। युवाओं में इस गलत धारणा को तोड़ना बेहद जरूरी है।
शुरुआती पहचान से बचाई जा सकती है जान
ओरल कैंसर के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि अगर इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इलाज आसानी से किया जाता है। डॉक्टर का कहना है कि शुरुआत में ही इसका पता चल जाए तो ठीक होने की संभावना 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। यही वजह है कि कोई भी लक्षण दिखने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर को दिखा देना चाहिए और इलाज शुरू कर देना चाहिए।
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