
नई दिल्ली। पिछले एक महीने से अधिक समय तक राजनीतिक आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और लगातार प्रभावित होते जनजीवन के कारण सुस्ती का सामना कर रहे दिल्ली के बाजारों ने आखिरकार रफ्तार पकड़ ली है। त्योहारी सीजन के आगमन के साथ ही राजधानी के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में ग्राहकों की चहल-पहल और भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
बाजारों में लौटती इस रौनक से लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहे व्यापारियों के चेहरे खिल उठे हैं। व्यापारिक संगठन ‘कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ (कैट) ने अनुमान जताया है कि, इस दीवाली सीजन में देशभर में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक और अकेले राजधानी दिल्ली में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड कारोबार हो सकता है।
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आंदोलनों की मार से उबरे बाजार
बीते एक महीने के दौरान दिल्ली में बार-बार हुए धरना-प्रदर्शनों और रास्तों की नाकेबंदी के कारण खुदरा व थोक व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया था। स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान) से आने वाले व्यापारियों और खरीदारों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया, दिल्ली के व्यापारियों को पिछले कुछ हफ्तों में कई तरह की गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। जनजीवन में बार-बार पैदा होने वाली बाधाओं के कारण फुटफॉल्स घट गए थे, लेकिन अब दीवाली के नजदीक आते ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। बाजारों में ग्राहकों की वापसी व्यापारिक समुदाय के लिए बेहद राहत और उत्साह का संकेत है।
पूरे महीने बना रहेगा खरीदारी का सिलसिला
व्यापारिक विशेषज्ञों का मानना है कि, इस साल नवंबर का महीना आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहने वाला है। एक के बाद एक लगातार आने वाले त्यौहारों और मांग के कारण पूरे महीने बाजारों में खरीदारी का सिलसिला बना रहेगा।
महीने के प्रमुख त्यौहारों की श्रृंखला इस प्रकार है।
- 6 नवंबर: धनतेरस
- 7 नवंबर: छोटी दीवाली
- 8 नवंबर: दीपावली
- 9 नवंबर: गोवर्धन पूजा
- 10 नवंबर: भाई दूज
- 21 नवंबर: तुलसी विवाह / देव उठनी एकादशी
- 24 नवंबर: गुरु नानक जयंती
इसके अतिरिक्त, राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में धूमधाम से मनाए जाने वाले छठ पूजा के त्यौहार को लेकर भी खरीदारी में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। 21 नवंबर को देव उठनी एकादशी के साथ ही देशभर में शहनाइयां बजने लगेंगी और विवाह समारोहों का बड़ा सीजन शुरू हो जाएगा। व्यापारियों का आकलन है कि, शादी-ब्याह के सीजन के बाद क्रिसमस और नववर्ष तक बाजारों में बिक्री का यह दौर बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।
इन उत्पादों की मांग बढ़ी
इस बार की त्योहारी खरीदारी का पैटर्न केवल पारंपरिक पूजा-सामग्री और दीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) और आधुनिक लाइफस्टाइल उत्पादों पर भी खुलकर खर्च कर रहे हैं।
बाजार में प्रमुख उत्पाद श्रेणियों की स्थिति
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं होम अप्लायंसेज: टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव और मोबाइल फोन की बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
फैशन व लाइफस्टाइल: रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवेयर, ज्वेलरी और कॉस्मेटिक्स सेगमेंट में जबरदस्त उछाल है।
सजावटी सामान व उपहार: होम डेकोर, फैंसी लाइट्स, ड्राई फ्रूट पैकेट्स और कॉरपोरेट गिफ्ट्स की भारी खपत हो रही है।
प्रवीन खंडेलवाल ये भी बताते हैं कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई ‘वोकल फॉर लोकल’ और भारतीय सामान खरीदने की अपील का असर ज़मीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। ग्राहक विदेशी या चीनी सामानों के बजाय बड़े पैमाने पर भारतीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका सीधा फायदा स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्यमियों, कुम्हारों और फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे विक्रेताओं को मिल रहा है।
रोजगार तंत्र को जीवनदान
त्योहारी सीजन के दौरान होने वाला यह व्यापार केवल दुकानों के गल्ले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह देश की पूरी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और रोजगार तंत्र को जीवनदान देता है।

उत्पादन और लॉजिस्टिक्स: मांग बढ़ने से कारखानों में उत्पादन तेज होता है। इसके साथ ही माल ढुलाई के लिए ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को बड़ा काम मिलता है।
पैकेजिंग उद्योग: नए-नए गिफ्ट आइटम्स और पैकेजिंग जरूरतों के कारण पैकेजिंग सेक्टर में काम कई गुना बढ़ जाता है।
असंगठित क्षेत्र और दैनिक वेतनभोगी: रेहड़ी-पटरी वालों, पल्लेदारों, डिलीवरी बॉयज़, अस्थायी सेल्स एग्जीक्यूटिव्स और कारीगरों को इस दौरान भरपूर रोजगार मिलता है।
सरकारी राजस्व: रिकॉर्ड बिक्री से केंद्र व राज्य सरकारों को जीएसटी (GST) और अन्य करों के रूप में भारी राजस्व प्राप्त होगा।
व्यापारिक नुकसान की भरपाई की उम्मीद
चांदनी चौक, सदर बाजार, कनाट प्लेस, करोल बाग, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर जैसे दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापारिक संघों ने रात-दिन काम करने की तैयारी कर ली है। व्यापारियों को पूरा भरोसा है कि, पिछले एक महीने में हुए व्यापारिक नुकसान की भरपाई यह त्योहारी और शादियों का सीजन पूरी तरह से कर देगा।
बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात है। नई ऊर्जा और उम्मीदों के साथ दिल्ली का व्यापारिक समुदाय अब एक रिकॉर्ड-तोड़ कारोबारी सीजन का गवाह बनने जा रहा है।
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