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जर्जर भवन, सुविधाओं का टोटा, ये हो गई थी सरकारी स्कूलों की हालत: सीएम योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का फीता काटकर शुभारंभ किया। इस मौके पर पूर्ववर्ती सरकारों पर सीधा निशाना साधते हुए सीएम ने कहा, जब सरकारें ही जर्जर थीं, तो सिस्टम  कैसे दुरुस्त रह सकता था। मुख्यमंत्री ने कहा, उस दौर में सरकारी विद्यालयों के भवन खंडहर बन चुके थे, बुनियादी सुविधाओं का घोर टोटा था, और इन्हीं हालातों ने उत्तर प्रदेश के माथे पर बीमारू राज्य का ठप्पा जड़ दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध विरासत रही है, लेकिन जब इस ज्ञान को संकीर्ण दायरे में कैद कर अपनी ही जड़ों से नाता तोड़ लिया गया, तो इसकी भारी कीमत पूरे प्रदेश को चुकानी पड़ी।

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 लगा था बीमारू राज्य का ठप्पा

मुख्यमंत्री ने कहा कि, एक दौर था जब प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का गंभीर संकट खड़ा था। युवा जब बहार जाता था, तब उसे अपनी पहचान बताने में भी संकोच महसूस होता था, लेकिन पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों ने अब प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। उन्होंने बेसिक शिक्षा की पूर्व स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना तक करना मुश्किल था।

Gomti Book Festival

ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए विद्यालयों के भवन बदले गए और स्मार्ट क्लास व डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चित्रकूट के अपने अनुभव को साझा करते हुए सीएम ने बताया कि, वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से चलाते देख उन्हें एहसास हुआ कि, बच्चों में क्षमता की कोई कमी नहीं है, बल्कि उन्हें सही अवसर और संसाधन नहीं मिल पाए थे।

युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा गलत है

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर बनी एक आम धारणा को भी सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि, यह मान लेना कि आज का युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर बिताता है, वास्तव में युवा के साथ एक बड़ा अन्याय होगा। असल सच्चाई यह है कि, उस तक किताबें पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास ही नहीं किया गया। जब युवाओं को उचित मंच और पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं, तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भारी भागीदारी ने यह धारणा पूरी तरह बदल दी।

 250 हुई स्टॉलों की संख्या 

मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में जब पुस्तक महोत्सव की शुरुआत हुई थी, तब उन्हें भी इसके नतीजों को लेकर कुछ संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कहीं अधिक छात्र और युवा पहुंचे थे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले नौ दिनों में हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से रूबरू होने का मौका मिलेगा, जहां पुस्तक विमोचन के साथ-साथ लेखक और पाठक भी आमने-सामने होंगे।

Gomti Book Festival

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देशभर में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि, इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ स्कूली परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर हिम्मत टूटने पर संबल देने वाली किताब है।

 विविध विषयों का अध्ययन जरूरी

ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा हमें चारों दिशाओं से ज्ञान ग्रहण करने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने भर से कोई ज्ञानवान नहीं बन जाता। पाठ्यक्रम किसी विषय में दक्षता तो दे सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को गहराई से समझने के लिए विविध विषयों और विचारों का अध्ययन जरूरी है।

उन्होंने लखनऊ को साहित्य का पुराना केंद्र बताते हुए यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों द्वारा पुराणों के माध्यम से ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाए जाने, काशी के विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों और प्रयागराज कुंभ को ऋषि-मुनियों के चिंतन व संवाद की स्थली बताया।

पुस्तकालयों तक पहुंचीं NBT की पुस्तकें

मुख्यमंत्री ने गांव-गांव तक ज्ञान पहुंचाने के सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट है, उसी तरह गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास पहले बैठने तक की अपनी जगह नहीं थी।

सरकार ने ग्राम सचिवालय बनवाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। नतीजतन प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबें पहुंच चुकी हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है, जिनका आज गांव के छात्र और युवा भरपूर उपयोग कर रहे हैं।

छात्राओं को भेंट कीं किताबें 

शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने महोत्सव परिसर में लगी विभिन्न प्रदर्शनियों और पुस्तक स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रकाशकों-आयोजकों से बातचीत की। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी किताबें वितरित की गईं।

इस मौके पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने शॉल ओढ़ाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा पर आधारित एक वीडियो भी दिखाया गया।

समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक सहित कई लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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