
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज मंगलवार को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत सड़क सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण मैराथन का सफल आयोजन किया गया। पांच किलोमीटर की इस मैराथन दौड़ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फ्लैग ऑफ किया। इस दौरान सीएम ने हजारों प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन तथा पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
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देश भर में चला सड़क सुरक्षा माह
ये राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह बीते 1 जनवरी से 31 जनवरी तक देशभर में चल रहा था, लेकिन देहरादून में इसे फरवरी में पर्यावरण के साथ जोड़कर विशेष रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के समीप की कैंट रोड से शुरू हुआ। इसमें विभिन्न आयु वर्ग लोग जैसे- युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए।

यह मैराथन न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने का माध्यम बनी, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में आम जनता की भूमिका पर भी जोर दिया।
हर व्यक्ति को समझनी होगी जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि, यातायात नियमों का पालन करना और पर्यावरण की रक्षा करना हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। इसे लेकर सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब समाज भी आगे आएगा और हर व्यक्ति खुद अपनी जिम्मेदारी समझेगा।
आपको बता दें कि, उत्तराखंड में सड़क दुर्घटना एक बड़ी समस्या है। यहां अक्सर ही सड़क हादसे होते रहते हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो, अधिकांश हादसे ओवर स्पीडिंग, ड्रिंक एंड ड्राइव, हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से होते हैं। राज्य में पहाड़ी इलाकों की वजह से सड़कें घुमावदार और संकरी हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
दूसरों की जान बचाने का संकल्प
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान देशभर में जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन उत्तराखंड ने इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़कर एक अनोखा कदम उठाया। ग्लोबल वार्मिंग के कारण क्लाइमेट चेंज से उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिससे बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियर पिघलना और अनियमित मौसम जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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कार्यक्रम में सीएम धामी ने शपथ दिलाते हुए कहा कि, सड़क सुरक्षा सिर्फ नियमों का पालन नहीं, बल्कि दूसरों की जान बचाने का संकल्प है। उन्होंने युवाओं से अपील की, कि वे दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें, स्पीड लिमिट का ध्यान रखें और कभी भी नशे में वाहन न चलाएं। पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने प्लास्टिक मुक्ति, पेड़ लगाना और ईंधन बचत जैसे छोटे-छोटे कदमों पर जोर दिया।
छात्रों ने भी निभाई भागीदारी
कार्यक्रम में परिवहन विभाग, पुलिस, एनजीओ और स्कूल-कॉलेज के छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की। दौड़ के दौरान प्रतिभागियों ने सुरक्षा ही बचाव है, ग्रीन अर्थ, क्लीन अर्थ और नो स्पीड, नो क्रैश जैसे स्लोगन लगाए गये थे। यह मैराथन उत्तराखंड सरकार की दोहरी प्राथमिकता को दर्शाती है।
कैम्प कार्यालय (देहरादून) से सड़क सुरक्षा जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित मैराथन दौड़ का फ्लैग ऑफ किया। साथ ही सभी प्रतिभागियों व उपस्थित जनों को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की शपथ दिलाई।
यातायात के नियमों का… pic.twitter.com/qONY38FUlt
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) February 17, 2026
तेजी से बढ़ रहे वाहन
बता दें कि, राज्य में चारधाम यात्रा, पर्यटन और पहाड़ी इलाकों की वजह से वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे दुर्घटनाओं और प्रदूषण दोनों में इजाफा हुआ है। सरकार ने हाल के वर्षों में सड़क सुरक्षा मैनुअल तैयार करने, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और क्लाइमेट रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया है। मुख्यमंत्री धामी ने पहले भी सड़क दुर्घटनाओं के बाद कमेटी गठित करने जैसे कदम उठाए हैं। इस मैराथन से मिली जागरूकता को आगे बढ़ाते हुए राज्य में स्कूलों में रोड सेफ्टी एजुकेशन, चेकिंग अभियान और ग्रीन इनीशिएटिव्स को मजबूत किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने इसे प्रेरणादायक बताया। एक प्रतिभागी ने कहा, दौड़ में भाग लेकर उन्होंने महसूस किया कि छोटे-छोटे कदम कितने बड़े-बड़े बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम में शामिल बुजुर्गों ने भी उत्साह दिखाया और कहा कि, अगली पीढ़ी के लिए पर्यावरण बचाना आवश्यक है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत राज्य में रैलियां, सेमिनार और मैराथन जैसे कार्यक्रम चलाए गए, जिनमें लाखों लोग पहुंचे।
जन भागीदारी जरूरी
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम के अंत में कहा कि सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती, जन भागीदारी जरूरी है। सड़क पर सुरक्षित चलना और पर्यावरण की रक्षा करना एक-दूसरे से जुड़े हैं, क्योंकि सुरक्षित सड़कें कम प्रदूषण और बेहतर स्वास्थ्य देती हैं। यह मैराथन न सिर्फ जागरूकता फैलाने में सफल रही, बल्कि उत्तराखंड को एक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल राज्य के रूप में पेश करने में भी मददगार साबित हुई। ऐसे प्रयासों से उम्मीद है कि सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ाई में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।
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