
आजकल कम उम्र में ही बालों का सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। बालों का सफ़ेद होना पहले जहां बुढ़ापे की निशानी माना जाता था, वहीं अब ये समस्या महज 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में देखने को मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह मानसिक तनाव यानी स्ट्रेस माना जा रहा है, लेकिन कई वैज्ञानिक शोधों में यह भी सामने आया है कि, इंसान का खानपान और जीवनशैली भी इसके पीछे एक अहम कारण हो सकती है। ऐसे में यह सवाल भी लोगों के मन में बार-बार उठता है कि क्या समय से पहले सफेद हुए बालों को फिर से प्राकृतिक रूप से काला किया जा सकता है।
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इसी विषय पर कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर आरजू पाहवा ने विस्तार से जानकारी साझा की। डॉक्टर आरजू ने कहा कि, चिकित्सा भाषा में समय से पहले बाल सफेद होने की इस स्थिति को प्रीमैच्योर कैनिटीज़ कहते हैं।
युवाओं में तेजी से बढ़ रही है समस्या
एक्सपर्ट के अनुसार, आजकल 20 और 30 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है।

ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि, आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है और क्या इस स्थिति को फिर से रिवर्स किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी समझना आवश्यक है कि, किस तरह का खानपान अपनाकर इस समस्या से कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।
मेलेनिन की कमी से सफेद होते हैं बाल
डॉक्टर आरजू पाहवा बताती हैं कि, हमारे बालों को उनका प्राकृतिक और स्वाभाविक रंग मेलेनिन नामक एक खास पिगमेंट से प्राप्त होता है। शरीर में मौजूद कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाएं ही इस मेलेनिन का उत्पादन करती हैं, जब किन्हीं कारणों से ये कोशिकाएं कम मात्रा में मेलेनिन बनाने लगती हैं या फिर पूरी तरह से काम करना बंद कर देती हैं, तो धीरे-धीरे बालों का रंग बदलने लगता है और वे ग्रे या सफेद नजर आने लगते हैं।
डॉक्टर के अनुसार, इसके सबसे सामान्य और प्रमुख कारणों में सबसे पहले जेनेटिक्स यानी अनुवांशिकता का नाम आता है। इसके अतिरिक्त शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार मानी जाती है। इनमें खासतौर पर विटामिन बी12, विटामिन डी3, आयरन, कॉपर और फोलेट जैसे तत्वों की कमी शामिल है, जो बालों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
ये बीमारियां और आदतें भी हैं वजह
डॉक्टर आरजू के मुताबिक, सिर्फ पोषण की कमी ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बालों के समय से पहले सफेद होने में अहम भूमिका निभाती हैं। इनमें थायराइड की बीमारी प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा एलोपेसिया और विटिलिगो जैसी ऑटोइम्यून कंडीशन भी इस समस्या को बढ़ावा दे सकती हैं।
इसके साथ ही स्मोकिंग यानी धूम्रपान की आदत, शरीर में बढ़ने वाला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, पर्यावरण से जुड़े विभिन्न कारण, बढ़ता प्रदूषण और लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव, ये सभी कारक मिलकर बालों के सफेद होने की प्रक्रिया को तेज करने का काम करते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि, आधुनिक जीवनशैली में इन सभी कारणों का एक साथ मौजूद होना ही युवाओं में इस समस्या के तेजी से बढ़ने की मुख्य वजह है।
क्या दोबारा से काले हो सकते हैं बाल?
इस अहम सवाल के जवाब में डॉक्टर आरजू पाहवा का कहना है कि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि बाल सफेद होने के पीछे असली वजह क्या है। अगर बाल सफेद होने का कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी है या फिर कोई ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसका इलाज संभव है, तो ऐसी स्थिति में उस समस्या का सही इलाज कराने से बालों के और अधिक सफेद होने की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

वह कहती हैं कि, कुछ मरीजों में तो इलाज के बाद बालों का पिगमेंटेशन यानी प्राकृतिक रंग वापस भी आ जाता है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि, अगर बालों के सफेद होने की वजह जेनेटिक्स यानी अनुवांशिक कारण या फिर उम्र बढ़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया है, तो फिलहाल विज्ञान के पास इसका कोई ऐसा प्रभावी और साबित इलाज मौजूद नहीं है, जिससे इसे पूरी तरह उलटा जा सके।
ब्लड टेस्ट जरूरी
डॉक्टर आरजू पाहवा कहती हैं कि, बाजार में मौजूद कई सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पाद यह दावा करते हैं कि, उनके इस्तेमाल से सफेद बालों को दोबारा काला किया जा सकता है, लेकिन इन दावों के पीछे कोई ठोस और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। ऐसे में बिना जांचे-परखे इन उत्पादों पर भरोसा करना नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह है कि, इस तरह की स्थिति में सबसे बेहतर विकल्प यही है कि, व्यक्ति किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह ले। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मरीज को कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं, ताकि बालों के सफेद होने की असली वजह का सटीक पता लगाया जा सके। इसके जरिए शरीर में पोषण की कमी, थायराइड की समस्या या फिर किसी अन्य मेडिकल कंडीशन की सही समय पर पहचान की जा सकती है, जिससे समय रहते उचित इलाज शुरू किया जा सके।
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि, भले ही जेनेटिक्स की वजह से सफेद हुए बालों को दोबारा काला करने का कोई निश्चित और पक्का तरीका फिलहाल मौजूद न हो, लेकिन एक हेल्दी और संतुलित जीवनशैली अपनाना बालों की समग्र सेहत बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति संतुलित और पौष्टिक आहार ले, स्मोकिंग जैसी हानिकारक आदतों से पूरी तरह दूरी बनाए और शरीर में मौजूद किसी भी मेडिकल समस्या का समय रहते सही इलाज कराए। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन सभी बातों का ध्यान रखा जाए, तो न सिर्फ बालों के सफेद होने की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है, बल्कि कुल मिलाकर बालों की सेहत को भी लंबे समय तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
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