पहले चलती थीं गोलियां, अब बरसते हैं फूल, पीलीभीत से CM योगी का सपा पर निशाना

  • पीलीभीत में श्रीराम कथा महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री, ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ को दी श्रद्धांजलि

  • काशी, मथुरा और विंध्यवासिनी धाम से गोला गोकर्णनाथ और नाथ नगरी तक बदल रही तीर्थस्थलों की सूरत

पीलीभीत। ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की पुण्य स्मृति में पीलीभीत में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, अयोध्या में जलने वाला हर दीपक प्रदेश और देश की समृद्धि का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि, जिस अयोध्या में कभी रामभक्तों पर गोलियां बरसाई गईं, वहां आज श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए जाते हैं।

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आस्था के साथ विकास का केंद्र बनी अयोध्या

पांच सौ साल के संघर्ष के बाद भव्य राम मंदिर बना है और अयोध्या आस्था के साथ-साथ विकास का भी केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, तुष्टिकरण की राजनीति से आतंकवाद और नक्सलवाद को बल मिला, जबकि संतुष्टिकरण की नीति रामराज्य की राह खोलती है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही रामराज्य की अवधारणा है।

CM Yogi Adityanath

कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और नूरानपुर में अमृत सरोवर का लोकार्पण किया। महोत्सव में उन्होंने व्यासपीठ को प्रणाम किया और कथा व्यास संत अंजनी शरण और मौजूद संतों का स्वागत-अभिनंदन किया।

आस्था ने पिरोया भारत को एकता में

मुख्यमंत्री ने कहा कि, विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। उत्तर-दक्षिण और पूरब-पश्चिम में भाषा, पहनावा और जीवनशैली भले अलग हों, पर आस्था और संस्कृति पूरे देश को एक डोर में बांधे रखती हैं। दुनिया के लगभग 200 देशों की अपनी पहचान और चुनौतियां हैं, लेकिन भारत अपनी सांस्कृतिक एकता के कारण सबसे अलग खड़ा है।

उन्होंने बताया कि, पांच हजार वर्ष पहले शुकतीर्थ में श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा कही गई थी और आज भी उसी श्रद्धा से देश-दुनिया में भागवत कथा होती है। गांव-गांव की रामलीला, श्रीराम कथा और अखंड रामायण पाठ की परंपरा लोगों को प्रभु राम के आदर्शों से जोड़ती है। राम का चरित्र हर चुनौती का हल देता है और मर्यादित जीवन की प्रेरणा बनता है।

 1990 की घटना का किया जिक्र

दो नवंबर 1990 की घटना को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, तब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं। जय श्रीराम का उद्घोष करने और रामभक्तों के अयोध्या पहुंचने पर रोक थी। रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने बलिदान दिया। पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद आज वहां भव्य मंदिर खड़ा है और लाखों भक्त रामलला के दर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि, पहले अयोध्या में तंग गलियां, गंदगी और टूटी सड़कें थीं, रेल की सिंगल लाइन थी और हवाई सेवा नहीं थी। अब चौड़ी चार लेन सड़कों, बेहतर रेल सुविधा और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने शहर की तस्वीर बदल दी है। इस हवाई अड्डे का नामकरण महर्षि वाल्मीकि के नाम पर हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि, अयोध्या में रोज एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं, जबकि पर्व-त्योहारों पर यह संख्या पांच लाख से 50 लाख तक पहुंच जाती है।

 बिना भेदभाव मिल रहा योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि, 2017 से पहले विकास के लिए आया पैसा यहां-वहां बर्बाद हो जाता था। अब उसी धन से गरीबों का कल्याण और धार्मिक स्थलों का विकास हो रहा है। गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, किसानों को सम्मान निधि और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” पर चलते हुए सरकार हर पात्र व्यक्ति तक बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है, और यही रामराज्य का मूल भाव है। तुष्टिकरण से समस्याएं बढ़ती हैं, जबकि संतुष्टिकरण से समाज में भरोसे और समृद्धि का माहौल बनता है।

काशी से गोला गोकर्णनाथ तक निखर रहे तीर्थ

मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और मां विंध्यवासिनी धाम में भी श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ी हैं। लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर बनाया जा रहा है और बरेली की नाथ नगरी भी अपनी धार्मिक पहचान को नए रूप में सहेज रही है।

उनका कहना था कि, तीर्थस्थलों का विकास सिर्फ इमारतें बनाना नहीं है, बल्कि इसमें श्रद्धालुओं की सुविधा, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी शामिल है। धार्मिक आयोजन सकारात्मकता जगाते हैं। जहां नकारात्मकता होती है, वहां अराजकता और अशांति पनपती है, जबकि सकारात्मकता विकास और समृद्धि की राह बनाती है।

कई भाषाओं में उपलब्ध है रामायण

मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने आदि रामायण रचकर दुनिया को राम के आदर्शों से परिचित कराया, और आज रामायण कई भाषाओं में उपलब्ध है। श्रीराम का जीवन पुत्र, भाई, पति, शिष्य और समाज के प्रति कर्तव्य निभाने की सीख देता है। रामकथा का उद्देश्य केवल सुनना नहीं, बल्कि उसके आदर्शों को आचरण में उतारना है।

ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जीवन सरल और फक्कड़ संत का था। महंत हनुमान नाथ ने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भावना के अनुरूप उनका समाधि स्थल बनवाया, और अब उनकी स्मृति में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की स्वच्छता और आध्यात्मिक माहौल की प्रशंसा की तथा श्रद्धालुओं से कथा के बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री बलदेव सिंह औलख और संजय गंगवार, आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता, एमएलसी संजीव प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक विवेक वर्मा और बाबूराम पासवान, स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर तथा मंदिर के महंत हनुमान नाथ के साथ बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे।

 

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