साक्षरता कर्मियों के बकाया मानदेय का रास्ता साफ, 64 जिलों को 397.19 करोड़ रुपए जारी

  • योगी सरकार का बड़ा कदम- वर्षों से अटका साक्षरता कर्मियों का मानदेय जल्द मिलेगा

लखनऊ। साक्षर भारत योजना से जुड़े कर्मियों के बकाया मानदेय को लेकर योगी सरकार ने अहम कदम उठाया है। प्रदेश के 64 जिलों के लिए लगभग 397.19 करोड़ रूपये  की राशि आवंटित की गई है। इससे वर्षों से अटके भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और योजना में काम कर चुके जिला व ब्लॉक समन्वयकों तथा प्रेरकों को उनका शेष मानदेय मिल सकेगा। भुगतान तय प्रक्रिया और वित्तीय अनुशासन के तहत कराने के साथ सत्यापन और समयसीमा का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के निदेशक एवं सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी आदेश में 31 मार्च 2018 तक कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों के शेष मानदेय के लिए यह धनराशि दी गई है। आदेश के अनुसार प्रेरकों को 2,000 रूपये प्रतिमाह और जिला/ब्लॉक समन्वयकों को 6,000 रूपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान होगा। यह आदेश लंबित मानदेय भुगतान से जुड़ा है।

 कार्यों और अभिलेखों की होगी जांच

मानदेय देने से पहले संबंधित कर्मियों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यों और अभिलेखों का सत्यापन होगा। जिला स्तर पर मौजूद ऑडिट रिपोर्ट व अन्य दस्तावेजों के आधार पर बकाया राशि तय की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि, धनराशि का इस्तेमाल सिर्फ निर्धारित मद में हो और किसी दूसरे मद में उसका उपयोग न किया जाए।

31 दिसंबर तक वित्तीय नियमों के अनुसार खर्च होगी राशि

संबंधित जिलों को 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित वित्तीय नियमों के मुताबिक राशि खर्च करनी होगी। खर्च का ब्योरा और उपयोगिता प्रमाण-पत्र 5 जनवरी 2027 तक निदेशालय को देना होगा। भुगतान बैंक खाते के जरिए किया जाएगा। आदेश में वित्तीय गड़बड़ी होने पर संबंधित जिला अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। इस तरह पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर ही पूरी की जाएगी।

 

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