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धामी सरकार का सख्त एक्शन, गोहत्या-ड्रग्स तस्करों के घर पर चला बुलडोजर

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहां राज्य सरकार ने अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर एक्शन चलाया है। देहरादून के खुशहालपुर क्षेत्र में प्रशासन ने आधा दर्जन से अधिक ऐसे मकानों को ध्वस्त कर दिया, जो गोहत्या और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार इन सभी ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर वहां अवैध रूप से निर्माण कर लिया था, जिसे अब हटा दिया गया है।

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डीएम के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे अभियान की अगुवाई जिलाधिकारी आशीष चौहान के निर्देशन में की गई। उनके आदेश पर विकासनगर के उपजिलाधिकारी विनोद कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के साथ खुशहालपुर क्षेत्र में यह प्रशासनिक कार्रवाई अंजाम दी गई। बताया जा रहा है कि कार्रवाई से पहले प्रशासन ने संबंधित लोगों की संपत्ति के दस्तावेजों की गहनता से जांच-पड़ताल की थी और इसके बाद ही उन्हें विधिवत नोटिस जारी किए गए थे।

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प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले ज्यादातर लोग अन्य राज्यों से आकर यहां बस गए थे और समय के साथ आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए। इनमें से कई लोग पहले भी गोहत्या से जुड़े मामलों में जेल जा चुके हैं, जबकि कुछ पर नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं।

हिस्ट्रीशीटरों पर दर्ज हैं दर्जनों मामले

इस कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल ने विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है, वे सभी पहले से हिस्ट्रीशीटर अपराधी हैं और इनमें से हर एक के खिलाफ गोहत्या, नशा तस्करी, गुंडा एक्ट तथा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े दर्जनों मामले दर्ज हैं।

जिलाधिकारी आशीष चौहान से मिली जानकारी के अनुसार, खुशहालपुर क्षेत्र में सक्रिय बताए जाने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम आमिर बताया गया है और जिसके खिलाफ कुल 21 गंभीर मामले दर्ज हैं, उसके मकान को ध्वस्त कर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

इसी क्रम में प्रशासन ने कई अन्य आरोपियों के मकानों पर भी बुलडोजर चलाया। जानकारी के अनुसार मेहराज नामक व्यक्ति के खिलाफ आठ मामले दर्ज हैं।वहीं सलमान पर भी 21 मामलों का आरोप है। इसके अतिरिक्त दिलशाद मिर्ची के खिलाफ आठ मामले, मोहसिन के खिलाफ पंद्रह गंभीर मामले तथा फैज़ान के खिलाफ उन्नीस मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। वहीं कौसर नामक व्यक्ति पर नशीले पदार्थों से जुड़े दो मामले दर्ज हैं। इन सभी के मकानों को ध्वस्त करते हुए प्रशासन ने संबंधित सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई पूरी की।

सीएम धामी ने दिए थे सख्त निर्देश

इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि प्रशासन को लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं कि अन्य राज्यों से आए कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोग राज्य में सरकारी भूमि पर कब्जा कर वहां गोहत्या और नशा तस्करी जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार जब इन लोगों के आपराधिक इतिहास की गहनता से जांच की गई, तो इनकी संलिप्तता से जुड़े कई तथ्य सामने आए। इसके बाद ही जिला प्रशासन को इनके खिलाफ विधि सम्मत यानी कानून के दायरे में रहते हुए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

 अपनाई जा रही जीरो टोलरेंस की नीति

मुख्यमंत्री धामी की सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि राज्य में अपराध और अवैध कब्जों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। सरकार का कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले चाहे किसी भी पृष्ठभूमि के हों, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस कड़ी में देहरादून के खुशहालपुर क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती का ताजा उदाहरण मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया, जिसमें संबंधित पक्षों को नोटिस देना और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना शामिल था।

स्थानीय प्रशासन की सतर्क 

इस घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों की पहचान के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। पुलिस विभाग भी हिस्ट्रीशीटरों पर करीबी नजर रखे हुए है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।

कार्रवाई पर सबकी नजर

देहरादून में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने एक बार फिर राज्य में अवैध अतिक्रमण और अपराध के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती को लेकर चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए और ठोस सबूतों के आधार पर की गई है, लेकिन इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर सार्वजनिक विमर्श का विषय बन जाती हैं। बहरहाल, राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक जरूरी कदम है, और भविष्य में भी इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे।

 

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