बंगाल सरकार को कानूनी शिकंजे में कसने की तैयारी में बीजेपी, ममता भी हुई आक्रामक

पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की वजह से बीजेपी और सूबे की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ममता सरकार के बीच जारी राजनीतिक जंग अपनी चरम पर पहुंच चुकी है। इसी क्रम में इस बार तृणमूल सरकार ने जहां बीजेपी पर सीएए-एनआरसी को लेकर निशाना साधा है। वहीं, बीजेपी ने भी ममता सरकार को कानूनी शिकंजे में कसने की कोशिश शुरू कर दी है।

बीजेपी ने की चुनाव आयोग से शिकायत

दरअसल, बीजेपी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में हो रही राजनीतिक हिंसाओं का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। बीजेपी ने सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत करने वाले नेताओं में शामिल सभ्यसाची दत्ताने बताया कि बंगाल की हालत कश्मीर से भी बुरी हो गई है।

बीजेपी ने चुनाव आयोग के समक्ष दो पेज का ज्ञापन सौंपा है, जिसमें सूबे की क़ानून व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा का मुद्दा मुख्य रहा। इसके अलावा चुनाव आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कुछ अन्य मुद्दे भी उठाए गए।     

•    जेपी नड्डा के काफिले पर हमला निंदनीय, बंगाल की पुलिस निष्पक्ष नहीं। पुलिस टीएमसी कार्यकर्ता की तरह काम कर रही है।

•    राज्य में सुरक्षा की दृष्टि से अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति की जाए।

•    राज्य सरकार के कर्मचारी आपस में बैठक कर तृणमूल को खुला समर्थन देने को कह रहे हैं, ऐसे में बंगाल में वो कैसे निष्पक्ष चुनाव करवा पाएंगे।

•    बंगाल में जल्द से जल्द आचार संहिता लागू हो।

बीजेपी के इस ज्ञापन के बाद चुनाव आयोग भी एक्शन में आ गया है। बताया जा रहा है कि आगामी 17 दिसंबर को चुनाव आयोग के डिप्टी कमिश्नर सुदीप जैन बंगाल का दौरा करेंगे और हालात को परखेंगे।

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उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीएए-एनआरसी का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी को आड़े हाथों लिया है। ममता बनर्जी ने अपने नॉर्थ बंगाल दौरे पर कहा कि हम लोग रिफ्यूजी कॉलोनी का ध्यान रखेंगे, बीजेपी से डरने की जरूरत नहीं है। बीजेपी ने नॉर्थ बंगाल के लिए क्या किया है, बीजेपी से बड़ा कोई लुटेरा नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लोगों को वादा किया और फिर धोखा दिया। बोले थे कि हर साल दो करोड़ नौकरी देंगे, लेकिन कहां हैं? अभी तक 15 लाख भी खाते में नहीं आए।

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