Bhojshala Dispute

Bhojshala Dispute: देवी वाग्देवी की ऑयल पेंटिंग लेकर भोजशाला पहुंचा जुलूस, सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम

भोपाल/इंदौर/धार। वसंत उत्सव के दौरान, भोजशाला के मेन गेट पर भक्तों की लंबी लाइन लग गई। बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे परिसर में भीड़भाड़ का माहौल बन गया। इसी बीच, लाइन में खड़े एक बुजुर्ग भक्त की तबीयत खराब हो गई और वह बेहोश हो गए। मौके पर मौजूद एडमिनिस्ट्रेशन और वॉलंटियर्स की मदद से बुजुर्ग भक्त को मीडिया सेंटर के पास हेल्थ सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक टीम ने फर्स्ट एड दिया। इलाज के बाद, बुजुर्ग भक्त की हालत स्थिर बताई जा रही है।

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भगवा झंडे लिए शामिल हुए महिला-पुरुष

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भोजशाला पहुंचे जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष भगवा झंडे लेकर शामिल हुए। जुलूस में शामिल युवा “सड़कें खाली करो, भोजशाला के लिए!” जैसे नारे लगाते दिखे। जुलूस में DJ गाड़ियां भी शामिल थीं। जुलूस धार के लालबाग से शुरू हुआ और देवी वाग्देवी की ऑयल पेंटिंग को भोजशाला ले जाया जाएगा। इसके बाद जुलूस मोती बाग चौक पर खत्म होगा।

एसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा

इस दौरान धार के SP मयंक अवस्थी ने भोजशाला में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और कहा, “सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। धार शहर को सात ज़ोन में बांटा गया है, जिनकी मॉनिटरिंग SP रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। हर गली, चौराहे और सेंसिटिव एरिया पर नज़र रखी जा रही है। भोजशाला को छह सेक्टर में बांटा गया है। भक्तों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए बड़े इंतज़ाम किए गए हैं। ड्रोन और CCTV से निगरानी की जा रही है। नमाज़ के बारे में SP अवस्थी ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इंतज़ाम किए गए हैं।

धार में सामाजिक और बिज़नेस संगठनों ने गौशाला में आने वाले भक्तों के लिए खाने के स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉल पर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को पूरी-आलू की सब्जी, पोहा और चाय दी जा रही है।

बनाई गई अस्थाई जेल

किसी भी अनहोनी की आशंका को देखते हुए PG कॉलेज में टेम्पररी जेल बनाई गई है। कैंपस में तीन बड़े हॉल रिज़र्व किए गए हैं, जहां लीगल क्लास चलती हैं। 21 से 27 जनवरी तक कॉलेज को टेम्पररी जेल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए लिखित आदेश भी जारी किए गए हैं।

भोजशाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास 300 मीटर का एरिया नो-फ्लाई ज़ोन है। भोजशाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास 300 मीटर का एरिया नो-फ्लाई ज़ोन घोषित किया गया है। इस एरिया में ड्रोन, UAV, पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून जैसी कोई भी एक्टिविटी पूरी तरह से मना है। सड़कों और पब्लिक जगहों पर बिल्डिंग मटीरियल, मलबा, टायर और बिना देखरेख वाले खोखे छोड़ना भी मना है।

क्या है विवाद?

भोजशाला 11वीं-12वीं सदी की एक ऐतिहासिक जगह है, जिसे राजा भोज ने ज्ञान और कला की पढ़ाई के लिए बनवाया था। अब यह आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के संरक्षण में है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती का मंदिर और ज्ञान की जगह मानता है। मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है।

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क्या बोले काजी?

भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। शहर काज़ी वकार सादिक ने कहा कि जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा के लिए एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें सभी पक्षों से सलाह ली गई थी। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारा है। कुछ लोग निजी फायदे के लिए सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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शहर काज़ी ने साफ किया कि इस मामले में मुस्लिम समुदाय की तरफ से कोई याचिका दायर नहीं की गई है। विष्णु जैन की तरफ से एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) दायर की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं। मुस्लिम पक्ष ने कलेक्टर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन करने और कोर्ट की मंशा के अनुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

 अफ़सरों ने नमाज़ पढ़ने वालों के नाम मांगे

एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों ने मुस्लिम समुदाय से नमाज़ में शामिल होने वालों के नाम मांगे हैं। इन नामों के आधार पर नमाज़ पास जारी किए जाएंगे। नमाज़ दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच पढ़ी जाएगी। अधिकारियों ने नमाज़ पढ़ने के लिए कई ऑप्शन भी सुझाए हैं, जिसमें एक तय जगह भी शामिल है। इससे पहले 2016 में भोजशाला की छत पर नमाज़ पढ़ी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने धार भोजशाला मामले में एक अहम आदेश जारी किया, जिसके तहत आज, 23 जनवरी (बसंत पंचमी, शुक्रवार) को हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक देवी सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा करने की पूरी आज़ादी दी गई, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई।

कोर्ट ने प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, स्पेशल पास का इंतज़ाम करने और पूरी सुरक्षा और शांति पक्का करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने की।

मन्दिर तोड़कर बनाई गई थी मस्जिद

भोजशाला का इतिहास 11वीं सदी का है। कहा जाता है कि यहां देवी सरस्वती का एक मंदिर था। 12वीं-13वीं सदी में इस मंदिर को तोड़ दिया गया और पास में एक मकबरा और एक मस्जिद बनाई गई। रॉयल एशियाटिक सोसाइटी में छपे माइकल विलिस के एक रिसर्च पेपर, जिसका टाइटल “धार, भोज और सरस्वती” था, के मुताबिक, “भोजशाला” शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले जर्मनी के इंडोलॉजिस्ट एलोइस एंटोन फ्यूहरर ने किया था, जो 1893 में भारत आए थे और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के लिए काम करते थे।

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इस पेपर के मुताबिक, फ्यूहरर ने इसे भोजशाला (भोज का स्कूल) कहा था। हालांकि, बाद में फ्यूहरर को ASI से हटा दिया गया। इस शब्द का इस्तेमाल बाद में ब्रिटिश सरकार के स्टेट एजुकेशन सुपरिटेंडेंट के.के. लेले ने किया, जो 1902 में धार में ASI ऑफिस के इंचार्ज थे। उन्होंने वहां मिले संस्कृत इंस्क्रिप्शन का मतलब भी निकालना शुरू किया। इससे यह पता चला कि मौजूदा स्ट्रक्चर को तोड़े गए मंदिर के बचे हुए हिस्सों से फिर से बनाया गया था।

 

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