वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की फिल्म “बवाल” ओटीटी पर रिलीज हो गई है, जिससे एक नया विवाद निकलकर सामने आया है। इस फिल्म में एक सीन है जो ऑश्वित्ज के नरसंहार से प्रेरित है, जिसके लिए दर्शकों के कुछ वर्गों ने आलोचना की। एक यहूदी संगठन ने फिल्म को प्राइम वीडियो से हटाने की मांग की है और ओपन लेटर में ओटीटी प्लेटफॉर्म से “बवाल” की स्ट्रीम पर रोक लगाने की गुजारिश की है।
आपको बता दे, भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने इस बारे में रिएक्शन दिया है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है कि वे इस फिल्म को अभी तक नहीं देखे हैं और देखने की योजना भी नहीं बना रहे, लेकिन उन्हें यह जानकर चिंता हुई है कि फिल्म में शब्दावली और प्रतीकवाद का चयन अच्छा नहीं था। उन्होंने दावा किया है कि उनका कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था, लेकिन उन्हें यह समझाने की आवश्यकता है कि प्रलय के बारे में ज्यादा जानकारी रखने वाले लोग इसके विषय में शिक्षित हों।
फिल्म के लिए एक दूसरे संदर्भ में, नितेश तिवारी ने भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने बताया कि फिल्म का ऑश्वित्ज सीक्वेंस निराशाजनक नहीं है और इसका मकसद असंवेदनशीलता नहीं था। उन्होंने कहा कि फिल्म के यह दृश्य अज्जू और निशा को बहुत प्रभावित करते हैं, जिन्होंने ऑश्वित्ज में हुए नरसंहार को देखा है। वे कैदियों के दर्द को देखकर वह असंवेदनशील नहीं हुए थे, बल्कि उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
यह विवादित सीन और फिल्म “बवाल” ने इस्राइली एंबेसी और भारत में रहने वाले लोगों के बीच उत्पन्न किए हुए तकरारों को सामने ला दिया है। फिल्म बनाने वालों के इरादे को समझते हुए और विवाद के परिणामस्वरूप, इस मामले को ध्यान में रखते हुए हम सभी को समझदारी से इस विषय पर विचार करना आवश्यक है।
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