जनजातीय कला और शिल्प को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, यूपी दर्शन पार्क में सजेगा भागीदारी उत्सव

 लखनऊ। राजधानी लखनऊ में 23 से 26 नवंबर तक जनजातीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक हुनर का राष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग) ‘राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव’ का आयोजन करेगा। गोमती नगर के यूपी दर्शन पार्क में होने वाले चार दिवसीय कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों के 500 से ज्यादा कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से जनजातीय जीवन और संस्कृति की विविधता से लोगों को रूबरू कराएंगे।

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कई प्रदेशों के कलाकार उतरेंगे मंच पर

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, समाज कल्याण विभाग, जनजाति विकास विभाग और पर्यटन निदेशालय की संयुक्त पहल से होगा। मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, सिक्केम, त्रिपुरा, असम, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के कलाकार मंच पर उतरेंगे।

UP Darshan Park

 

इन राज्यों के सांस्कृतिक दल लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए अपने क्षेत्र की जनजातीय विरासत पेश करेंगे। दूसरे राज्यों के कलाकारों को बुलाने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के माध्यम से भी कोशिश की जाएगी।

लुप्त होती लोक विधाएं होंगी उत्सव की जान

उत्सव में जनजातीय कलाकारों के साथ घुमंतू समुदायों की पारंपरिक कलाओं को भी खास जगह दी जाएगी। बीन वादन, जादू, कठपुतली, बहुरूपिया और नट-नटी की प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने को मिलेंगी। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर रंगोली के साथ नाटकों का मंचन भी होगा। लुप्त होती लोक विधाओं को आयोजन का मुख्य आकर्षण बनाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इन परंपराओं को जान सके। साथ ही उन कलाकारों और समुदायों को भी मंच मिलेगा, जो लंबे समय से इन विधाओं को संजोने और आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

शिल्प मेले में दिखेगा हुनर

उत्सव में शिल्प मेला भी लगेगा, जहां 150 से ज्यादा शिल्पकार अपनी कला और उत्पाद पेश करेंगे। मेले में जनजातीय व्यंजनों, हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषणों और वाद्ययंत्रों की दुकानें सजेंगी। जनजातीय चित्रकला और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी तथा कार्यशालाएं भी होंगी। मूंज और गेहूं के डंठल से उपयोगी व सजावटी सामान बनाने का प्रदर्शन भी किया जाएगा। जनजातीय जीवन और परंपराओं को नजदीक से समझाने के लिए आयोजन स्थल पर ग्रामीण परिवेश भी तैयार होगा। इसके अलावा जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी पुस्तकों की बिक्री की व्यवस्था भी रहेगी।

 विदेशी कलाकार भी देंगे प्रस्तुति

इस बार उत्सव में मध्य प्रदेश को थीम स्टेट बनाया गया है। इसके तहत वहां की जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष रूप से दिखाया जाएगा। आयोजन में विदेशी कलाकार भी हिस्सा लेंगे, जिससे दर्शकों को अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने का मौका मिलेगा। राज्यों के कलाकारों के साथ विदेशी सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

विद्यालय-विश्वविद्यालय भी होंगे शामिल

जयवीर सिंह ने बताया कि उत्सव को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और युवाओं को जनजातीय संस्कृति से जोड़ने के लिए स्थानीय विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को भी शामिल किया जाएगा। विद्यार्थियों को लोककलाओं, जनजातीय शिल्प, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को जानने का अवसर मिलेगा। संगोष्ठी, चित्रकला प्रदर्शनी और हस्तशिल्प कार्यशालाओं के जरिए जनजातीय समाज के इतिहास, परंपराओं और हुनर पर चर्चा होगी। चार दिन के इस आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लेकर शिल्प और खानपान तक, जनजातीय जीवन के अलग-अलग पहलुओं को एक ही मंच पर लाने की तैयारी है।

 

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