
भारतीय पैरा निशानेबाजी के लिए शुक्रवार का दिन बेहद शानदार रहा। देश की स्टार निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में ऐसा अचूक निशाना साधा कि, विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया और भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक आ गया। महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में जीत दर्ज कर मोना ने इन खेलों में अपना दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस कामयाबी ने न सिर्फ पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत की, बल्कि देश की निशानेबाजी को भी एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई।
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फाइनल में 357.5 का शानदार स्कोर
शुक्रवार को हुए फाइनल मुकाबले में मोना ने शुरू से अंत तक अपनी एकाग्रता बनाए रखी और कुल 357.5 अंक जुटाए। यह स्कोर अब इस स्पर्धा का नया विश्व रिकॉर्ड है। इससे पहले यह कीर्तिमान स्वीडन की अन्ना बेन्सन के नाम था, जिन्होंने जुलाई 2026 में सर्बिया के नोवी साद में 356 अंक हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था। मोना ने बेन्सन के स्कोर को 1.5 अंक के अंतर से पीछे छोड़ दिया। निशानेबाजी जैसे खेल में, जहां एक-एक दशमलव अंक का फर्क पदक का रंग बदल देता है, यह अंतर बेहद अहम माना जाता है।

थ्री पोजिशंस स्पर्धा को निशानेबाजी की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। इसमें खिलाड़ी को अलग-अलग मुद्राओं में निशाना साधना पड़ता है और हर मुद्रा में संतुलन, धैर्य और तकनीक की अलग परीक्षा होती है। एसएच1 श्रेणी में वे निशानेबाज शामिल होते हैं जो अपनी राइफल या पिस्टल को स्वयं संभाल सकते हैं। ऐसे में 50 मीटर की दूरी से लगातार सटीक निशाने लगाना शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती की भी मांग करता है। मोना ने इसी कसौटी पर खुद को साबित किया।
एक ही मुकाबले में दो रिकॉर्ड
मोना की उपलब्धि यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने इसी स्पर्धा में एशियाई रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। दक्षिण कोरिया की ली युनरी ने सितंबर 2026 में चांगवॉन में 355.7 अंक हासिल कर यह रिकॉर्ड बनाया था। मोना के 357.5 अंक इस आंकड़े से 1.8 अंक ज्यादा रहे। इस तरह एक ही फाइनल में उन्होंने विश्व और एशियाई, दोनों कीर्तिमान अपने नाम कर लिए।
गौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों रिकॉर्ड हाल के महीनों में ही बने थे। बेन्सन ने जुलाई में और ली युनरी ने सितंबर में अपने-अपने कीर्तिमान स्थापित किए थे, यानी स्पर्धा का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है। ऐसे माहौल में कुछ ही हफ्तों के भीतर दोनों रिकॉर्ड तोड़ देना मोना की तैयारी और फॉर्म की गवाही देता है।
पहले भी जीत चुकी हैं गोल्ड
मोना अग्रवाल के लिए ये खेल पहले से ही यादगार रहे हैं। इस मुकाबले से पहले वह महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं। उस फाइनल में उन्होंने 250 अंक हासिल कर गेम्स रिकॉर्ड बनाया था। उस स्पर्धा में भारत की ही अवनि लेखरा ने 249.6 अंक के साथ रजत पदक जीता था। यानी दोनों खिलाड़ियों के बीच महज 0.4 अंक का फासला रहा, जो मुकाबले की कांटे की टक्कर को बयां करता है।
अवनि लेखरा का नाम भारतीय पैरा खेलों में पहले से सम्मान के साथ लिया जाता है। ऐसे दिग्गज को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़कर स्वर्ण जीतना मोना की क्षमता को और पुख्ता करता है। इसके साथ ही उसी स्पर्धा में स्वर्ण और रजत, दोनों पदक भारत के हिस्से आना देश की निशानेबाजी की गहराई को भी दर्शाता है।
शानदार फॉर्म जारी
अब 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में दूसरा गोल्ड जीतकर मोना ने साबित कर दिया है कि, उनकी लय बरकरार है। एक ही खेल आयोजन में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। इसके लिए अलग-अलग दूरी, अलग-अलग प्रारूप और अलग-अलग दबाव में खुद को ढालना पड़ता है। मोना ने दोनों ही मोर्चों पर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित किया और वह भी रिकॉर्ड के साथ।
भारत के लिए गर्व का क्षण
मोना की इस जीत से एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन और मजबूत हुआ है। विश्व रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण जीतना उनके शानदार खेल, अनुशासन और निरंतर मेहनत का नतीजा है। इस उपलब्धि से देश को एक बार फिर गर्व करने का मौका मिला है और यह देश के उन तमाम उभरते पैरा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
भारतीय निशानेबाजी की यह कामयाबी बताती है कि, पैरा खेलों में देश की प्रतिभाएं अब वैश्विक स्तर पर चुनौती देने की स्थिति में हैं। स्वीडन और दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत निशानेबाजी वाली टीमों के खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना इसका सबसे ताजा उदाहरण है। अब सबकी नजरें इस पर रहेंगी कि, मोना आने वाली प्रतियोगिताओं में अपनी इस लय को कैसे बनाए रखती हैं।
देशभर से खेलप्रेमियों की बधाइयां मोना अग्रवाल के नाम हैं। एक के बाद एक स्वर्ण और दो-दो रिकॉर्ड के साथ उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय पैरा खेल इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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