सुबह की अकड़न, लंगड़ाकर चलना और जोड़ों में सूजन, बच्चों में गठिया के संकेत

गठिया का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के जेहन में बुजुर्गों की तस्वीर उभरती है। इसी वजह से कई माता-पिता मान बैठते हैं कि, छोटे बच्चों को यह बीमारी हो ही नहीं सकती। परिवार में किसी को जोड़ों की बीमारी न हो, तो चिंता और भी कम हो जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक हकीकत इससे अलग है। बच्चों को भी गठिया हो सकता है और इसके लिए परिवार में पहले से यह बीमारी होना जरूरी नहीं है।

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जागरूकता दिवस पर विशेषज्ञ की सलाह

हर साल 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इसी मौके पर मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. अंजू सिंह ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि, अगर बच्चे के जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न रहती है, तो इसे सिर्फ खेलकूद या थकान की वजह मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्यों होता है बच्चों में गठिया

बच्चों में गठिया के सबसे आम प्रकारों में से एक है जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस। यह सूजन से जुड़ी कई बीमारियों का समूह है, जो 16 साल की उम्र से पहले शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कोई एक निश्चित कारण अभी पता नहीं है। माना जाता है कि शरीर की बनावट और बाहरी परिस्थितियां, दोनों इसमें भूमिका निभा सकती हैं।

Arthritis In Children

इस बीमारी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से जोड़ों को ही प्रभावित करने लगती है। नतीजतन जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न होती है। हालत यह हो सकती है कि, बच्चे के लिए हाथ-पैर चलाना और सामान्य गतिविधियां करना भी मुश्किल हो जाए।

हर जोड़ दर्द गठिया नहीं

विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि, बच्चे के किसी जोड़ में दर्द या सूजन का मतलब हमेशा गठिया नहीं होता। खेलते समय लगी चोट, गिरने या जरूरत से ज्यादा खेलने से भी जोड़ों में दर्द हो सकता है। कुछ संक्रमणों के बाद भी थोड़े समय के लिए जोड़ों में परेशानी आ सकती है। बच्चों की कुछ अन्य बीमारियां भी जोड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ मामलों में जोड़ में ही संक्रमण हो जाता है, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है, इसलिए अगर दर्द या सूजन लगातार बनी हुई है, तो इसे थकान या खेलकूद का असर मानकर छोड़ देना सही नहीं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बच्चे अक्सर अपनी तकलीफ ठीक से बयां नहीं कर पाते। ऐसे में माता-पिता को उनके चलने-फिरने और रोजमर्रा के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। ये संकेत ध्यान देने लायक हैं।

  • सुबह उठने के बाद काफी देर तक अकड़न रहना या कुछ देर बैठने के बाद चलने में दिक्कत होना
  • घुटने, टखने या कलाई में लगातार सूजन या गर्माहट
  • बिना चोट के लंगड़ाकर चलना या किसी पैर पर वजन डालने से बचना
  • पहले की तरह खेल न पाना, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना
  • जोड़ को मोड़ने या सीधा करने में दिक्कतलगातार थकान रहना

डॉ. सिंह के मुताबिक, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं कि बच्चे को गठिया ही है, लेकिन अगर परेशानी लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार लौटे, तो जांच जरूरी है।

बुखार के साथ सूजन हो तो देर न करें

अगर बच्चे का कोई जोड़ गर्म और सूजा हुआ है और साथ में बुखार, तेज दर्द या पैर पर वजन न डाल पाने जैसी तकलीफ है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में जोड़ में संक्रमण की आशंका रहती है और जल्द इलाज बेहद जरूरी होता है।

कैसे होती है जांच

जांच के दौरान डॉक्टर पहले बच्चे की पूरी जानकारी लेते हैं। इसमें देखा जाता है कि दर्द या सूजन कब से है, सुबह अकड़न कितनी देर रहती है और चलने-फिरने में क्या बदलाव आया है। इसके बाद जोड़ों की जांच कर उनकी गतिविधि परखी जाती है। जरूरत पड़ने पर खून की जांच से शरीर में सूजन के संकेत पता किए जाते हैं। कुछ मामलों में जोड़ की स्थिति ठीक से समझने के लिए अल्ट्रासाउंड या एमआरआई की मदद ली जाती है।

गौर करने वाली बात यह है कि गठिया की पुष्टि करने या उसे पूरी तरह खारिज करने के लिए कोई एक जांच काफी नहीं होती। जरूरत पड़ने पर बच्चे को जोड़ों की ऐसी बीमारियों के विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकता है।

समय पर इलाज क्यों जरूरी

बचपन में हड्डियां और जोड़ लगातार विकसित हो रहे होते हैं। ऐसे में अगर लंबे समय तक सूजन बनी रहे और सही इलाज न मिले, तो जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में बच्चे की बढ़त पर भी असर पड़ सकता है।

इलाज बीमारी की स्थिति के हिसाब से तय होता है। इसमें सूजन और दर्द घटाने वाली दवाएं, बीमारी को काबू में रखने वाली दवाएं और जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने के लिए व्यायाम चिकित्सा शामिल हो सकती है। नियमित जांच से बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जाती है, ताकि जोड़ों की सूजन नियंत्रण में रहे।

आंखों की जांच भी जरूरी

कुछ बच्चों में गठिया के साथ आंखों में भी सूजन हो सकती है। चिंता की बात यह है कि आंखों की सूजन के साफ लक्षण हमेशा दिखें, यह जरूरी नहीं। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर आंखों की नियमित जांच कराना जरूरी हो सकता है।

अभिभावक क्या करें

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इस बीमारी को रोकने का कोई निश्चित तरीका अभी नहीं है, क्योंकि इसके सही कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में माता-पिता की सबसे बड़ी भूमिका लक्षणों पर नजर रखने की है। अगर बच्चे के जोड़ों में सूजन है, सुबह अकड़न रहती है, बुखार आता है या चलने के तरीके में बदलाव दिखता है, तो इन बातों को नोट करके रखें। डॉक्टर को यह जानकारी देने से जांच और बीमारी को समझने में मदद मिल सकती है।

 

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