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मुख्यमंत्री योगी के दिशा-निर्देशन में स्वच्छ हवा के लिए किए गए कार्यों को मिली राष्ट्रीय सराहना
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आगरा, गाजियाबाद, कानपुर व प्रयागराज ने भी शीर्ष रैंकिंग में बनाई जगह
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रायबरेली, अनपरा, खुर्जा व गजरौला ने भी राष्ट्रीय पटल पर दर्ज कराई उपस्थिति
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वार्ड स्तर पर भी यूपी की कामयाबी, लखनऊ का वार्ड-70 देश में अव्वल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर निरंतर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशन में राज्य ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सर्वेक्षण में 10 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली दफा इंदौर को पछाड़ते हुए देशभर में पहला स्थान अर्जित किया है।
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लखनऊ को मिले 198 अंक
लखनऊ को 198 अंकों के साथ प्रथम, इंदौर को 197 और जबलपुर को 195 अंकों के साथ क्रमशः दूसरा व तीसरा स्थान हासिल हुआ। यह सफलता सिर्फ राजधानी लखनऊ तक ही सीमित नहीं रही।

राज्य के 16 नगरों ने विभिन्न जनसंख्या वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर उम्दा प्रदर्शन किया है। इससे जाहिर होता है कि, प्रदेश में स्वच्छ वायु की दिशा में शहर से लेकर वार्ड स्तर तक व्यवस्थित ढंग से कार्य किया जा रहा है।
यूपी के अन्य नगरों ने भी दिखाया दम
10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के अनेक नगरों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों संग चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों संग नौवें, कानपुर 183.2 अंकों संग 11वें तथा प्रयागराज 180 अंकों संग 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें पायदान पर रहे। यह रैंकिंग बताती है कि, स्वच्छ हवा के मामले में राज्य के बड़े शहरों में हो रहे प्रयासों का प्रभाव व्यापक रूप से नजर आ रहा है।
3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा
मध्यम आबादी वाले नगरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक अर्जित कर देश में दूसरा मुकाम हासिल किया। नगर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की तरफ तेजी से रूपांतरित करने को खास उपलब्धि करार दिया गया। झांसी 192.5 अंकों संग पांचवें, वहीं मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों संग साझा रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।
छोटे नगरों ने भी किया बेहतरीन प्रदर्शन
तीन लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के नगरों ने असरदार प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें तथा गजरौला 31वें पायदान पर रहे। इन नगरों में धूल नियंत्रण और वाहन प्रदूषण को काबू में रखने के लिए किए गए उपायों को खास तवज्जो मिली।
वार्ड स्तर पर भी मिली शानदार कामयाबी
स्वच्छ वायु प्रबंधन को केवल शहरों तक सीमित न रखकर स्थानीय स्तर पर भी कारगर कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक जनसंख्या वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 अंतर्गत वार्ड-70 ने पहला मुकाम पाया। वहीं, 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को शानदार कार्य हेतु सम्मानित किया गया। खुले में कचरा जलाने पर सख्त पाबंदी और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे कदमों को इसमें अहम माना गया।
समन्वित रणनीति का नतीजा
राज्य में स्वच्छ हवा हेतु नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आपसी तालमेल से विभिन्न स्तरों पर कार्य किया गया। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत बनाई और अमल में लाई गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में प्रथम स्थान समेत यूपी के अनेक नगरों व वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में साफ नजर आया।
पुरस्कार से बढ़ा स्थानीय निकायों का हौसला
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने उम्दा प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की राशि दी गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को बड़ी सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 को तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है।
प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुयोग्य नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के नगरों की सूरत तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के मामले में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।
यह कामयाबी प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने भरोसा जताया कि जिस तरह स्वच्छ वायु में लखनऊ ने देश में पहला मुकाम पाया है। उसी तरह स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने हेतु सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।
लखनऊ की नंबर-1 सफलता ने बढ़ाया यूपी का मान
लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना राज्य के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली विस्तार और यातायात व्यवस्था सुधारने जैसे क्षेत्रों में निरंतर काम हुआ। नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के लिए तकरीबन 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने हेतु शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल पर नियंत्रण हेतु 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें चल रही हैं। साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल जनित प्रदूषण घटाने में सहायता मिली।
कचरा प्रबंधन और हरियाली पर खास बल
स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी अहम स्थान दिया गया। लखनऊ में 2,550 टीपीडी क्षमता से शत-प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या पर नियंत्रण के साथ-साथ शहर में कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर बल दिया गया। नगर में हरियाली बढ़ाने हेतु वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए।
इस प्रकार स्वच्छ वायु हेतु परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र जैसे सभी अहम पहलुओं को जोड़कर काम किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के संयुक्त प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह उपलब्धि अब प्रदेश के अन्य नगरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक कारगर नमूना बनकर उभरी है।
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