
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आया जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू होता जा रहा है। अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि,अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी मतदाता सूची में हेरफेर की तैयारी में जुट गई है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय होने और ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ सामाजिक न्याय आधारित सरकार बनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए सवाल
सोमवार को पार्टी कार्यालय पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सपा मुखिया ने दावा किया कि, बीजेपी सरकार पीडीए वर्ग के लोगों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIT) की प्रक्रिया के बाद फॉर्म-7 भरवाए गए हैं और अब चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं के फिर से सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। सपा अध्यक्ष के अनुसार, इस प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरे राज्यों से लाकर जुड़वाए जाएंगे वोट
अखिलेश यादव ने अपने बयान में एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि, चुनाव से पहले बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लोगों को लाकर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल कराए जाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने इसे बीजेपी की एक सुनियोजित चुनावी रणनीति बताते हुए कहा कि, यह सब अपने पक्ष के मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के मकसद से किया जा रहा है।

हालांकि, सपा अध्यक्ष ने इस दावे के समर्थन में तत्काल कोई ठोस प्रमाण या दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए। बीजेपी की तरफ से इस आरोप पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करो
अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि, वे बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करें। उन्होंने कहा कि ‘पीडीए’ के नारे के आधार पर सामाजिक न्याय की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाना होगा। सपा अध्यक्ष ने विशेष रूप से कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदाता सूची पर लगातार नज़र बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि पार्टी समर्थकों के नाम सूची से किसी भी तरह न हटें। उनके अनुसार, आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की निगरानी पार्टी की प्राथमिकताओं में से एक होगी।
कानून-व्यवस्था पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि, पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। इस दौरान उन्होंने बदायूं ज़िले में हुई एक हिरासत में मौत की घटना का ज़िक्र करते हुए राज्य पुलिस की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े किए।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि, पुलिस हिरासत में होने वाली मौत एक गंभीर मुद्दा है। ऐसे मामलों में स्पष्ट रूप से जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और हिरासत में मौत के मामलों में सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश में तेज हुई सियासी हलचल
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर उठाए गए सवाल राज्य में सियासी बहस का नया मुद्दा बन सकते हैं। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अखिलेश यादव के इस बयान को आगामी चुनावों की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें वे अपने कार्यकर्ताओं को शुरुआती दौर में ही सक्रिय करने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, मतदाता सूची में सत्यापन और एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर आपत्तियां जताई जाती रही हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में पूर्व में भी इस तरह के विवाद सामने आ चुके हैं।
‘पीडीए’ पर सपा का फोकस
सपा बीते कुछ समय से लगातार ‘पीडीए’ अर्थात पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का मानना है कि, यह सामाजिक समीकरण उसे आगामी विधानसभा चुनावों में मज़बूत स्थिति दिला सकता है। अखिलेश यादव का यह ताज़ा बयान भी इसी रणनीति की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची की निगरानी को पार्टी के जनाधार को सुरक्षित रखने से सीधे जोड़ा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव आयोग या राज्य प्रशासन की ओर से अखिलेश यादव के इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी या नहीं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या समाजवादी पार्टी इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक करती है, और बीजेपी की ओर से इस पर क्या जवाब आता है।
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