
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत सरकार ने गुरुवार को एक विस्तृत बयान जारी किया और वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर तस्वीर साफ की। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में साफ़ कहा गया कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए सभी यात्री तमिलनाडु के निवासी बताए जा रहे हैं। हालांकि, इसी यात्रा पर निकले करीब 200 भारतीय नागरिक अब भी चीन में फंसे हुए हैं, जबकि इस आपदा के बाद कुल 288 भारतीयों से अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में उन्हें लापता माना जा रहा है।
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विदेश मंत्रालय ने दी पूरी जानकारी
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि, भारत सरकार नेपाल में बने हालात पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, नेपाल में अब तक 288 भारतीय नागरिकों से किसी भी तरह का संपर्क स्थापित नहीं हो सका है, जो इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले करीब 200 भारतीय नागरिक अभी भी सीमा पार चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनकी वापसी को लेकर संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
Update on Indian nationals rescued in Nepal.
21 Indian nationals from Tamil Nadu, who travelled for the Kailash Mansarovar Yatra, have been rescued in Nepal.
Details below ⬇️ pic.twitter.com/zOWUtB30A2
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 27, 2026
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में राहत की बात यह रही कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में ही सुरक्षित बचा लिया गया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि, बचाए गए सभी यात्री तमिलनाडु राज्य से ताल्लुक रखत हैं। यह जानकारी उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर बीते कुछ दिनों से गहरी चिंता में थे।
पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत 73 लोग भी बचाए गए
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि, नेपाल में एक पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 73 भारतीय कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। इस बचाव अभियान को स्थानीय प्रशासन और भारतीय एजेंसियों के समन्वित प्रयासों का नतीजा बताया जा रहा है।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े ईशा फाउंडेशन के भी कुछ सदस्य फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। यह जानकारी इस बात का संकेत देती है कि, आपदा की चपेट में केवल आम यात्री ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग भी आए हैं।
भारत ने भेजी 47 टन सहायता
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत ने पड़ोसी देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए मानवीय सहायता में तेजी से इजाफा किया है। जानकारी के अनुसार भारत ने अब तक दो अलग-अलग विमानों के जरिए कुल 47 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है।
MEA : Several indian nationals stranded on chinese side.
Approximately 200 Indian nationals sought assistance for evacuation from Chinese side.
Mission in touch with local authorities and doing best for resuce operation
Persons of Indian Origin from Isha Foundation / Foreign…
— Siddhant Mishra (@siddhantvm) August 27, 2026
इसमें पहले विमान से करीब 10 टन सामान भेजा गया, जबकि दूसरे विमान के जरिए 37.2 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) से जुड़ा सामान तथा जरूरी दवाइयां नेपाल पहुंचाई गई हैं। यह सहायता सामग्री विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव अभियानों में मदद के लिए भेजी गई है, ताकि स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन में हर संभव सहयोग मिल सके।
भारत, नेपाल के साथ खड़ा है- जयशंकर
इस पूरे संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल और वहां की जनता के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह हिमालयी पड़ोसी देश भोटेकोशी नदी में आई भयावह और अचानक बाढ़ के गंभीर परिणामों से जूझ रहा है। ऐसे मुश्किल समय में भारत हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्री का यह बयान भारत-नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से रहे मजबूत और भावनात्मक रिश्तों को भी दर्शाता है, जो आपसी संकट के समय हमेशा से एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना पर आधारित रहे हैं।
बुधवार को आई थी आपदा
गौरतलब है कि, बुधवार को नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों की बस्तियों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। यह आपदा भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण आई, जिसने कई गांवों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान हुआ है, इसका असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस रास्ते से गुजर रहे कई भारतीय यात्री भी इसकी चपेट में आ गए, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तीर्थयात्री भी शामिल थे।

भारत सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लापता भारतीय नागरिकों का जल्द से जल्द पता लगाया जाए और चीन में फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा सके। विदेश मंत्रालय की ओर से नेपाल और चीन दोनों देशों के स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है, ताकि बचाव अभियान को और तेज किया जा सके। इसके साथ ही भारत की ओर से नेपाल को हर संभव राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का सिलसिला भी जारी है।
विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जैसे ही लापता नागरिकों या फंसे हुए यात्रियों के बारे में कोई नई जानकारी सामने आती है, उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। इस बीच प्रभावित परिवारों के लिए हेल्पलाइन और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि वे अपने प्रियजनों की जानकारी प्राप्त कर सकें।
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