
आजकल की भागमभाग जिन्दगी के बीच फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता भी तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि, बड़ी संख्या में लोग जिम, दौड़ना, वेट ट्रेनिंग और अन्य तरह की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, शरीर को फिट और स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी जा रही है कि बिना उचित तैयारी के अचानक बहुत ज्यादा या तेज एक्सरसाइज करना कुछ लोगों के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है।
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खासतौर पर वे लोग जो लंबे समय से किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि से दूर रहे हैं, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार बेहद धीरे-धीरे शुरुआत करने की सलाह दी जाती है। सही तरीके से किया गया वर्कआउट जहां शरीर को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। वहीं जरूरत से ज्यादा मेहनत करना नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
अचानक ज्यादा मेहनत करने से बचने की सलाह
हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी तरह की एक्सरसाइज नहीं कर रहा है और अचानक बेहद तेज दौड़ना शुरू कर देता है, भारी वजन उठाने लगता है या सीधे हाई इंटेंसिटी वर्कआउट करने लगता है, तो इससे शरीर पर अचानक भारी दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बेहद तेजी से बढ़ सकते हैं, जो हृदय पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। इसके अलावा अपनी क्षमता से अधिक वजन उठाने की कोशिश करना या वर्कआउट के दौरान गलत तकनीक अपनाना भी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि, किसी भी वर्कआउट की शुरुआत हमेशा हल्की एक्सरसाइज और वार्म-अप से करनी चाहिए। उसके बाद धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाना चाहिए, जो लोग पहली बार जिम जॉइन कर रहे हैं या लंबे समय के अंतराल के बाद दोबारा एक्सरसाइज शुरू कर रहे हैं, उनके लिए शुरुआती दौर में हल्की शारीरिक गतिविधियों को अपनाना कहीं ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। शरीर को पर्याप्त समय देकर धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि हृदय और मांसपेशियों को नई गतिविधि के अनुरूप ढलने का पर्याप्त मौका मिल सके।
किन्हें को बरतनी चाहिए सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ खास वर्ग के लोगों को एक्सरसाइज को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है, जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें किसी भी तेज या तीव्र एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसी तरह अधिक उम्र के लोगों और उन लोगों को भी, जो लंबे समय से बिल्कुल भी शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे हैं, अपनी वर्कआउट यात्रा बेहद धीमी गति से शुरू करनी चाहिए।
वेट ट्रेनिंग करने वालों के लिए विशेषज्ञ सही तकनीक अपनाने और अपनी क्षमता के अनुरूप उचित वजन चुनने पर खास जोर देते हैं। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि, बहुत भारी वजन उठाते समय सांस को रोक लेना भी ब्लड प्रेशर पर नकारात्मक असर डाल सकता है, इसलिए वेट ट्रेनिंग के दौरान सांस लेने की सही तकनीक का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे चेतावनी संकेतों के बारे में भी बताया है, जिन्हें एक्सरसाइज के दौरान बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द या दबाव महसूस हो, सांस लेने में परेशानी हो, अचानक चक्कर आने लगे, असामान्य कमजोरी महसूस हो, अत्यधिक थकान हो या दिल की धड़कन असामान्य रूप से महसूस हो, तो ऐसी स्थिति में तुरंत एक्सरसाइज रोक देनी चाहिए और बिना देर किए चिकित्सकीय सहायता ली जानी चाहिए। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से आगाह किया है कि ऐसे लक्षणों को सामान्य थकान समझकर हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए किसी भी असामान्य संकेत को गंभीरता से लेना जरूरी है।
वार्म-अप और कूल-डाउन की अनदेखी न करें
एक्सरसाइज से जुड़ी एक और अहम सलाह यह है कि वर्कआउट शुरू करने से पहले कुछ मिनट का वार्म-अप जरूर किया जाना चाहिए। इससे शरीर धीरे-धीरे वर्कआउट के लिए तैयार होता है और अचानक दबाव पड़ने का खतरा कम हो जाता है। इसी तरह एक्सरसाइज खत्म करने के बाद भी अचानक पूरी तरह रुकने के बजाय, कुछ देर हल्की गतिविधि करते हुए और स्ट्रेचिंग के साथ धीरे-धीरे वर्कआउट को समाप्त करना बेहतर माना जाता है।

जो लोग नई शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए तेज चाल से पैदल चलना, हल्की साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार सामान्य एरोबिक गतिविधियां एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती हैं। जैसे-जैसे फिटनेस स्तर बेहतर होता जाता है, वैसे-वैसे वर्कआउट के समय और उसकी तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
इन वजहों से भी आया है हार्ट अटैक
हेल्थ एक्सपर्ट ने ये भी कहा है कि, हार्ट अटैक का खतरा केवल किसी एक खास तरह की एक्सरसाइज करने की वजह से ही तय नहीं होता। इसके पीछे व्यक्ति की उम्र, समग्र स्वास्थ्य, मौजूदा फिटनेस स्तर और अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यानी सिर्फ एक्सरसाइज की तीव्रता को ही जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, बल्कि व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है, इसलिए विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही है कि लोग नियमित और संतुलित वर्कआउट को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, अचानक अत्यधिक तीव्रता वाली गतिविधियों से बचें और शरीर को धीरे-धीरे नई गतिविधियों के अनुरूप ढलने का समय दें।
साथ ही अगर किसी को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या एक्सरसाइज के दौरान किसी भी तरह का असामान्य लक्षण महसूस होता है, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है। सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया वर्कआउट न सिर्फ शरीर को फिट रखता है, बल्कि हृदय संबंधी जोखिमों को भी काफी हद तक कम कर सकता है।
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नोट- यह सामान्य जानकारी है। किसी भी नई एक्सरसाइज दिनचर्या को अपनाने से पहले, विशेषकर अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो कृपया किसी योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।



